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Friday, April 20, 2012

अलविदा डिस्कवरी

बीते मंगलवार की सुबह वाशिंगटन का ट्रैफिक थम गया। लोग टकटकी लगाए अंतरिक्ष यान डिस्कवरी को देखते रहे। दरअसल, इस पुराने यान को बोइंग 747 पर लादकर संग्रहालय में लाया जा रहा था। यकीनन, अमेरिकी गौरव के इस प्रतीक की यह उपयुक्त विदाई रही। कुछ साल पहले संयुक्त राज्य अमेरिका ने यह दावा किया था कि वह इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम है। ऐसे में, अंतरिक्ष यान के बेड़े ही वे प्राथमिक साधन थे, जिनके द्वारा इंसानों को अंतरिक्ष की कक्षाओं में भेजने का सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान बार-बार इस पर भी विचार-विमर्श किया गया कि यूएस एयरफोर्स का नाम बदलकर एयरोस्पेस फोर्स कर दिया जाए। लेकिन बीते जुलाई महीने में यह बहस समाप्त हो गई, जब अंतरिक्ष यान अटलांटिस ने अपना आखिरी मिशन पूरा किया। अब अगर किसी अमेरिकी को अंतरिक्ष में जाने की इच्छा होगी, तो वह दूसरे देशों के यात्रियों के साथ ही जा पाएंगे। और यह भी सच है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की वायुसेना खुद को एयरोस्पेस फोर्स बताती है। एक वक्त था, जब अंतरिक्ष कार्यक्रम अमेरिकी उपलब्धियों का प्रतीक था। यह युवा पीढ़ी के लिए गर्व व प्रेरणा का स्त्रोत था। लेकिन अब वे दिन लद गए हैं। 2011 के बजट में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नासा की नक्षत्र परियोजना को रद्द कर दिया। यहां तक कि पुराने अंतरिक्ष यान की जगह नए को लाने की इजाजत भी नहीं दी गई। वैसे व्हाइट हाउस की तरफ से अंतरिक्ष अन्वेषण और मंगल ग्रह पर अमेरिकियों को उतारने का भरोसा दिया जाता रहा। दो साल पहले ओबामा ने कहा था, ‘उम्मीद है कि 2030 तक हम मंगल पर कदम रख देंगे।’ लेकिन अपने हालिया बजट में उन्होंने मंगल मिशन से जुड़ी योजनाएं खत्म कर दीं। वहीं, चीन के कदम मंगल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। खैर, हवा में शटल को चक्कर काटते देखकर वाशिंगटन के बाशिंदे खड़े के खड़े रह गए। कारें रुक गईं। लोग इमारतों से बाहर निकल आए। वे यान को देखकर खुशी के मारे चीखने-चिल्लाने लगे। कुछ लोग तो रोने भी लगे। जाहिर है, उनमें उत्तेजना थी, पर कुछ खोने का गम भी था।
द वाशिंगटन पोस्ट, अमेरिका