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Sunday, April 28, 2019

NPS के बारे में सभी जरूरी जानकारी

NPS यानी 60 के बाद नो टेंशन
A to Z about National Pension System

क्या आपने कभी सोचा है कि 60 साल की उम्र के बाद जिंदगी की जरूरतों के लिए आप पैसे कहां से लाएंगे क्योंकि तब तक तो आप रिटायर हो चुके होंगे? अगर आपके पास इसका कोई जवाब नहीं है तो हमारे पास आपके लिए एक ऑप्शन है नैशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का। NPS में निवेश और रिटर्न के बारे में पूरी जानकारी दे रहे हैं राजेश भारती

क्या है NPS
नैशनल पेंशन सिस्टम (NPS) पैसों का वह पेड़ है जिस पर रिटायरमेंट या 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद पैसे लगते रहते हैं और जिसे आप जॉब के दिनों में रोपते और सींचते हैं। अच्छी बात यह है कि इस दौरान यह आपका टैक्स भी बचाता रहता है। यह इन्वेस्टमेंट का एक टूल है जिसमें बैंकों के जरिए आप अपना पैसा जमा करते हैं और बैंक से जुड़े NPS फंड मैनेजर जोखिम उठाने की आपकी क्षमता के अनुसार अलग-अलग स्कीम में निवेश करते हैं। अगर आपको मार्केट की जानकारी है तो बिना फंड मैनेजर के आप खुद भी NPS अकाउंट को ऑपरेट कर सकते हैं। रिटायर होने पर या 60 साल की उम्र के बाद जमा रकम में से आपको बीमा कंपनियों से एन्युटी खरीदनी होती है और इसी से आपको पेंशन मिलती है। शुरू में इसका फायदा सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को मिलता था, लेकिन अब न केवल प्राइवेट जॉब करने वाले बल्कि बिजनेस या दूसरे तरीके से अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले भी इसका फायदा उठा सकता है। इस स्कीम में शामिल होने की उम्र 18 से 60 साल के बीच है। और हां, कोई व्यक्ति सिर्फ एक ही एनपीएस अकाउंट खोल सकता है।

फंड मैनेजर कौन
फंड मैनेजर आपकी जमा रकम को बेहतर ढंग से इन्वेस्ट करते हैं ताकि आपको ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिल सके। NPS अकाउंट खुलवाने के दौरान ही आपको इसका चयन करना होता है। सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त 8 फंड मैनेजर हैं। इनकी नियुक्ति पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) की ओर से की जाती है। ये हैं:
1. HDFC Pension Management Co. Ltd.
2. Reliance Capital Pension Fund Ltd.
3. UTI Retirement Solutions Ltd.
4. Kotak Mahindra Pension Fund Ltd.
5. LIC Pension Fund Ltd.
6. SBI Pension Funds Pvt. Ltd.
7. ICICI Prudential Pension Fund Management Company Ltd.
8. Birla Sun Life Pension Management Ltd.

फंड मैनेजर ऐसे चुनें
फंड मैनेजर के कारण ही आपका पैसा बढ़ता है और बाद में अच्छा रिटर्न मिलता है। ऐसे में जरूरी है कि आप एक बेहतर फंड मैनेजर चुनें। फंड मैनेजर चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें:

रिटर्न देखें: उस फंड मैनेजर का चुनाव करें जिसने अब तक बेहतर रिटर्न दिलाया है। इसकी पूरी जानकारी आप npstrust.org.in/return-of-nps-scheme से ले सकते हैं।

AMU पता लगाएं: Assets under management (AUM) का मतलब फंड हाउस की उस रकम से होता है जो लोगों ने निवेश की होती है। यह वैल्यू जितनी अधिक होगी, फंड मैनेजर की ओर से रिटर्न मिलने की उम्मीद उतनी ही बेहतर होती है। इसके लिए आप सभी फंड मैनेजरों की वेबसाइट पर जाकर चेक करें।

बदल सकते हैं फंड मैनेजर: NPS खाते में जो रकम जमा की जाती है, उस पर रिटर्न मिलता है। यह रिटर्न फिक्स्ड नहीं होता और निर्भर करता है कि आपका फंड मैनेजर आपका पैसा किस योजना में लगा रहा है। अगर आपका फंड मैनेजर अच्छा रिटर्न नहीं दिलवा पा रहा है तो आप उसे साल में एक बार बदल भी सकते हैं।

क्या है एन्युटी
NPS के पूरी होने के बाद आपके पास जो रकम जमा हो जाती है, उसमें से कम से कम 40% पैसा आपको बीमा कंपनी को देना होता है। बीमा कंपनी इस पैसे से आपकी पेंशन शुरू करती है। पेंशन के लिए बीमा कंपनी की दी जाने वाली रकम ही एन्युटी कहलाती है। एन्युटी से पेंशन के लिए आपको इन 5 कंपनियों में से किसी एक को चुनना पड़ता है:
1. HDFC Standard Life Insurance Company Ltd.
2. Star Union Dai-Chi Life Insurance Company Ltd.
3. Life Insurance Corporation of India Ltd.
4. ICICI Prudential Life Insurance Company Ltd.
5. SBI Life Insurance Company Ltd.

जरूरत के हिसाब से चार तरह के अकाउंट
केंद्रीय कर्मचारी: इसे केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खोला जाता है। सरकार की ओर से 14% और सैलरी (बेसिक+DA) का 10% NPS में जमा किया जाता है।
राज्य सरकारी कर्मचारी: जहां राज्य सरकारों ने PNS की सुविधा दे रखी है, वहां कर्मचारियों की सैलरी (बेसिक+DA) का अधिकतम 10% NPS अकाउंट में जमा किया जाता है।
कॉर्पोरेट सेक्टर: इसे प्राइवेट कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए खोलती हैं। इसमें कंपनियां कर्मचारी की सैलरी (बेसिक) का अधिकतम 10% NPS अकाउंट में जमा कराती हैं।
ऑल सिटिजन्स मॉडल: इसमें बिजनेसमैन, स्वरोजगार करने वाले लोग आते हैं। इस सेक्टर में आने वाले लोगों को ऑनलाइन या बैंक जाकर NPS अकाउंट खुलवाना होता है। वे इसमें कितनी भी रकम जमा करा सकते हैं। अगर आप किसी कंपनी में जॉब करते हैं तो कंपनी की ओर से जमा कराई रकम के अतिरिक्त आप खुद से भी पैसा NPS अकाउंट में जमा करा सकते हैं। साथ ही अगर कंपनी में NPS की सुविधा नहीं है तो आप इस मॉडल के तहत अकाउंट खुलवा सकते हैं।

पोर्टेबल है अकाउंट
NPS अकाउंट पूरी तरह पोर्टेबल है। हर ग्राहक को 12 अंकों का एक परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) दिया जाता है। जॉब बदलने पर PRAN को नई कंपनी की सैलरी से जोड़ सकते हैं। इसके लिए कंपनी के एचआर से बात करें। अगर नई कंपनी में NPS की सुविधा नहीं है तो इसे व्यक्तिगत (ऑल सिटिजन्स मॉडल) रूप से ऑपरेट कर सकते हैं। वहीं अगर आप जॉब पूरी तरह छोड़ देते हैं तो आपको व्यक्तिगत रूप से अकाउंट चलाना होगा।

ऐसे खुलवाएं अकाउंट
एनपीएस में दो तरह के अकाउंट होते हैं। पहला टियर-1 और दूसरा टियर-2 है। NPS के लिए सरकार ने देश के लगभग सभी सरकारी और कुछ प्राइवेट बैंकों में पॉइंट ऑफ प्रजेंस (पीओपी) बनाए हैं। नजदीकी बैंक ब्रांच में जाकर NPS अकाउंट खुलवाया जा सकता है। अपने नजदीकी पीओपी जानने के लिए वेबसाइट www.npscra.nsdl.co.in/pop-sp.php पर जा सकते हैं। अकाउंट ऑनलाइन भी खुलवा सकते हैं।

यह है टीयर 1 और टीयर 2 में फर्क
टीयर 1: NPS स्कीम में शामिल होने के लिए यह अकाउंट खुलवाना अनिवार्य है। इस अकाउंट को पेंशन अकाउंट भी कहते हैं। इसे 500 रुपये से खोला जा सकता है। साल में कम से कम 1 हजार रुपये जमा करने होते हैं। इसमें 60 साल या रिटायरमेंट की उम्र तक पैसा जमा करना होता है। जमा पैसे को रिटायरमेंट के बाद ही निकाला जा सकता है। इस अकाउंट में जो जमा करते हैं उस पर टैक्स में छूट मिलती है।
टीयर 2: इस अकाउंट को वही व्यक्ति खुलवा सकता है जिसका टीयर 1 अकाउंट है। इसमें व्यक्तिगत रूप में कितना भी पैसा जमा किया जा सकता है। इस अकाउंट से पेंशन का कोई लेनादेना नहीं होता। इसमें जमा पैसा म्यूचुअल फंड्स में लगाया जाता है और इस पैसे को कभी भी निकाला जा सकता है। टीयर 2 अकाउंट में जमा या निकाले गए पैसे पर टैक्स देना होता है। इस अकाउंट का फायदा है कि टीयर 1 अकाउंट होल्डर बिना डीमैट अकाउंट खुलवाए टीयर 2 से पैसा म्यूचुअल फंड में लगा सकता है। टीयर 2 से पैसा बैंक खाते में आने में डीमैट की अपेक्षा कम समय लगता है।
(*बेटी की शादी, गृह निर्माण, बीमारी, शिक्षा जैसे कुछ जरूरी काम के लिए सबूत दिखाकर 25% तक राशि निकाले सकते हैं)

पैसा निकालने की ये भी हैं कुछ शर्तेंः
3 साल बाद ही पैसा निकाल सकते हैं NPS अकाउंट खोलने के बाद
60 साल या रिटायरमेंट तक कुल तीन बार ही पैसा निकालने की अनुमति

इतना मिलता है टैक्स में फायदा
आप एनपीएस में कितना भी पैसा जमा कर सकते हैं, लेकिन इनकम टैक्स छूट की कुछ सीमाएं हैं। इसे ऐसे समझें:
- टैक्स में छूट टियर 1 अकाउंट में ही मिलती है।
- NPS के तहत धारा 80C के अंतर्गत आप साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये निवेश पर टैक्स में छूट ले सकते हैं।
- कंपनी की ओर से NPS में आपकी बेसिक सैलरी का अधिकतम 10% हिस्सा जमा कराया जा सकता है। यह 80CCD(2) के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। यह छूट 80C के अतिरिक्त है। अगर आप इसके अतिरिक्त कुछ रकम NPS मे जमा कराते हैं, तो उस पर आपको धारा 80CCD(1B) के तहत अधिकतम 50 हजार रुपये तक के निवेश पर अतिरिक्त छूट मिलती है।
- ऑल सिटिजंस मॉडल के तहत आने वाले लोग 80C के तहत अधिकतम 50 हजार रुपये तक के निवेश पर छूट का लाभ ले सकते हैं।

जानें, रिटायरमेंट के बाद क्या मिलेगा
रिटायरमेंट या 60 साल की उम्र के बाद आप NPS में जमा रकम का अधिकतम 60% हिस्सा कैश निकाल सकते हैं। यह टैक्स फ्री होता है। बाकी 40% रकम की एन्युटी लेनी होती है। इस पर टैक्स देना पड़ता है। एन्युटी वह रकम होती है जिसमें से आपको पेंशन मिलेगी। आप कितने समय के लिए पेंशन लेना चाहते हैं, इसकी जानकारी उस बैंक और बीमा कंपनी को देनी होती है जहां आपने अकाउंट खुलवा रखा है। जितने समय के लिए आप एन्युटी लेना चाहते हैं, उतने समय तक आपको पेंशन मिलती है। हालांकि पेंशन, रकम निकालने, नॉमिनी आदि से संबंधित कई फैसले आप खुद ले सकते हैं। इसकी कुछ शर्तें होती हैं जो इस प्रकार हैं:

आॅप्शन-1: जिंदगीभर सालाना 9% की दर से पेंशन मिलती रहेगी। पेंशनभोगी के न रहने पर पेंशन की बची रकम किसी को नहीं दी जाएगी।

आॅप्शन-2: रिटायरमेंट के 5, 10, 15 या 20 साल तक 9% की दर से पेंशन ली जा सकती है। इसके बाद पेंशनभोगी जिंदगीभर 8.5% की दर से पेंशन ले सकेंगे।

आॅप्शन-3: अगर पेंशनभाेगी चाहता है कि उसके न रहने पर पेंशन की बची रकम नॉमिनी को दी जाए तो पेंशनभोगी को पेंशन 6.80% की दर से मिलेगी।

(नोट: यह दर मौजूदा समय के अनुसार एक बीमा कंपनी की हैं। रिटायरमेंट के समय इन दरों में बदलाव संभव है। साथ ही एन्युटी की दर बीमा कंपनी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।)

EPS के तहत भी मिलती है पेंशन
किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब करने वाले एम्प्लॉई को कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत भी पेंशन मिलती है। इस योजना के अंतर्गत एम्प्लॉई की बेसिक सैलरी का 12% EPF में जमा किया जाता है। इसमें से 8.33% कंपनी की ओर से EPS खाते में जमा किया जाता है। यह रकम कर्मचारी के 58 साल की आयु हो जाने पर पेंशन के रूप में दी जाती है। EPS का लाभ लेने के लिए EPF में कम से कम 10 साल तक पैसा जमा जरूर होना चाहिए। अगर आप कंपनी बदलते हैं, तो अपना पीएफ अकाउंट नई कंपनी में ट्रांसफर करा लें।

एक्सपर्ट पैनल
चिन्मय समाजदार, इंडस्ट्री प्रफेशनल
अर्चित गुप्ता, फाउंडर और सीईओ, क्लियर टैक्स
राहुल त्यागी, एरिया सेल्स मैनेजर (दिल्ली-नोएडा), एचडीएफसी सिक्योरिटीज
साभार नवभारत टाइम्स

Thursday, September 6, 2018

SC/ST एक्ट पर अध्यादेश !! - मोदी सरकार की ताबूत में आखिरी कील


मै सामान्यतया राजनीतिक भविष्यवाणी नहीं करता लेकिन आज सीधे तौर पर कह रहा हूँ कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर SC/ST एक्ट पर अध्यादेश लानें का फैसला मोदी सरकार की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा .. इतिहास गवाह है कि जब शाहबानो प्रकरण पर 
राजीव गाँधी ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा था उसके बाद कांग्रेस देश में कभी उबर नहीं पाई . वीपी सिंह ने भी मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करके पिछड़ों और दलितों का मसीहा बनने की कोशिश की थी ,लेकिन उनका राजनीतिक क्या हश्र हुआ सब जानतें है  ,मंडल के बाद वीपी सिंह और उनकी राजनीती दोनों मिट गए.
कुछ चीजों के लिए मोदी सरकार को माफ़ नहीं किया जा सकता है ,न कभी माफ करना चाहिए,
पिछले दिनों अटल जी के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था तो वहाँ पर मेरे बगल में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह , अश्विनी चौबे और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बैठे थे, SC/ST एक्ट पर अध्यादेश पर मेरे मन में काफ़ी गुस्सा पहले से था इसलिए मैंने इसका जिक्र गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे जी से करते हुए कहा कि सरकार ने ये जो किया है ठीक नही है , इसका बड़ा खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ेगा , मेरा ऐसा कहते ही अचानक पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हमलावर होते हुए मुझसे बोले कि तुम्हें पता ही क्या है , मोदी दलितों के मसीहा है , बोलें कि मैं हरिजन हूँ और देश मे हमारी संख्या ज्यादा है ऐसे में हमारे हित में फैसला होगा, मैंने प्रतिवाद करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट पर सिर्फ यही कहा था कि निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए , बिना जाँच के गिरफ्तारी गलत है आदि तो धर्मेंद्र प्रधान बोलें कि सुप्रीम कोर्ट को कुछ पता नही , वो ऐसे ही फैसले देती है !! मैंने कहा कि सिर्फ आरोप के आधार पर आप किसी को कैसे गिरफ्तार कर सकतें है ,ये तो न्याय की बुनियादी अवधारणा के भी खिलाफ है, मैं उनसे लगातार प्रतिवाद करता रहा और वो काफी गुस्से में बोलतें रहें , जबकि इस दौरान गिरिराज और चौबे जी कुछ नही बोले , माहौल बड़ा अजीब हो गया ,कुछ लोगो के समझाने पर मैं थोड़ी देर के लिए चुप तो हो गया लेकिन मेरे अंदर गुस्से की ज्वाला धधक रही थी , कुछ समय बाद पता नहीं मुझे क्या सूझा और मैं अपने सीट से उठकर धर्मेंद्र प्रधान के पास जाकर उनके कान में बोला कि आप कुछ भी कर लीजिए यूपी में दलितों के वोट बीजेपी को नहीं मिलेंगे और ये फैसला बीजेपी की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा..मैंने उसी दिन इस विषय पर उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय को कहा था कि SC/ST एक्ट पर आप लोग आग से खेल रहें है ये समूची भाजपा को जला देगा ..
पिछले सिर्फ १ महीनें में मोदी सरकार ने SC/ST एक्ट पर अध्यादेश लाने के अलावा , SC/ST को पदोन्नति में आरक्षण ,और क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए केंद्र सरकार कह रही है कि सिर्फ “जाति “ ही पिछड़ेपन का आधार है (नीचे न्यूज पढ़ लीजिये ) मतलब आप चाहे कितने भी अमीर हो ,प्रभावशाली हो अगर SC/ST हैं तो आपको आरक्षण की सुविधा के साथ पदोन्नति में भी आरक्षण मिलेगा ,केंद्र की इसी सरकार ने अब विश्वविद्यालयों में विभागों के स्तर पर भी आरक्षण देनें के फैसला किया है जबकि पहले यूनिवर्सिटी स्तर पर आरक्षण लागू था (न्यूज पढ़ें )..
मतलब इस सरकार नें मानवीयता और नैतिकता की सारी हदें पार कर दी SC/ST को फायदा पहुँचाने के लिए ,उनके तुष्टीकरण के लिए (इतना तो इतिहास में किसी दल ने आजतक नहीं किया )..लेकिन आप डायरी में लिख लीजिये इतना करने के बाद भी इन्हें SC/ST का वोट कतई नहीं मिलने वाला ,ये अगला लोकसभा चुनाव बुरी तरह से हारने वालें हैं ..सवर्णों के वोट से तो ये पूरी तरह से हाथ धो चुके है .
देश की जनता ने इस मोदी /बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया ,ग्राम प्रधान ,विधायक सांसद ,मुख्यमंत्री ,प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति सब के सब बीजेपी के होते हुए भी इन्होने कुछ नहीं किया .. काश इस सरकार ने राम मंदिर निर्माण ,धारा ३७० ,कॉमन सिविल कोर्ट के  अपने अजेंडे के लिए आध्यादेश लाया होता.
यह इस देश की मिट्टी ,इस इन्द्रप्रस्थ का दुर्भाग्य है कि सत्ता में आतें ही लोग अपनी जड़ें भूल जातें है .इस देश का समूचा हिंदू जनमानस ठगा महसूस कर रहा है .कथित सेकुलरिज्म से त्रस्त इस देश की बहुसंख्यक जनता ने मोदी को मसीहा माना लेकिन ये भी वही करने लगे जो कांग्रेस या बाकी दल करतें आयें है ..बीजेपी और मोदी जी आप ये याद रखना कि आने वाली सदियाँ और इतिहास आपको कभी माफ़ नहीं करेगा .. 


Tuesday, February 27, 2018

श्रीमती जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

शशांक द्विवेदी 
आज हमारी श्रीमती जी का जन्मदिन है ,सबसे पहले तो उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ,आप हमेशा ऐसे ही डायनामिक और ख़ुशहाल बनी रहो यही प्रार्थना है ईश्वर से ..सामान्यतया हम दोनों का मिज़ाज बिल्कुल अलग है फिर भी लगभग 15 साल से साथ है (9 साल शादी के बाद और 6 साल शादी के पहले ), मिज़ाज के साथ साथ खाने -पीने की पसंद भी बिल्कुल अलग है . ,प्रियंका मुझसे ज्यादा डायनामिक और दुनियादारी के मामलों में समझदार है ,मै ज्यादा लिबरल हूँ जबकि ये उतनी नही है, तर्क और बहस तो खैर हमारी जिंदगी का हिस्सा ही है ,मुझसे खूब लड़ने के बाद अक्सर कवितायेँ लिखने बैठ जाती है , इन्होने सभी कवितायेँ मुझसे लड़ने के बाद ही लिखी है ..लेकिन सच्चाई यह है कि पूरे घर और बच्चों को इन्होने ही संभाल रखा है ..सबसे खास बात यह है कि देश के कई नामी ज्योतिषियों के मना करने के बाद भी हमने शादी की (प्रेम काल में शादी को लेकर परेशान थे तो उस समय ज्योतिषियों के यहाँ भी चक्कर लगा आये थे ) , प्रियंका विशुद्ध पत्रकार है जबकि मै उनके साथ रहकर इंजीनियर कम पत्रकार हूँ ...मेरे लेखो की आलोचनात्क स्क्रूटनी कर देती है , वर्कप्लेस और टेक्निकल टूडे मैगज़ीन में भी हम साथ है ऐसे में हमेशा इनका नया आइडिया देखने को मिलता है , इनकी वजह से काफ़ी हद तक निश्चिंत रहता हूँ , मोटामोटी मिज़ाज और पसंद अलग होते हुए भी हम एक दुसरे को प्यार करते है ,सम्मान करते है यही वजह है कि हम साथ साथ है ,खुश है ...और हां जब तक रहेंगे खुश ही रहेंगे ....एक बार फिर से प्रियंका को ढेरों बधाइयाँ ....

Wednesday, October 25, 2017

love से ज्यादा महत्वपूर्ण desires है, दिमाग के लिये

मेघा मैत्रैयी
कभी करीब 60 की उम्र के एक आदमी से मुलाकात हुई थी, अस्पताल में इंटर्नशिप के दौरान। बुरी तरह डिप्रेशन में था। काफी सीधा-साधा किस्म का इंसान था जो जिंदगी भर कोई ना कोई जिम्मेदारी उठाता रहा परिवार की, पर अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके सारे रिश्ते खराब क्यों हो गए।

बीवी लड़ती रहती थी, बच्चे उपेक्षा करते थे, रिश्तेदारों में भी कोई वैल्यू नहीं थी। कुल मिला कर वह पनीर की सब्जी में आलू की तरह हो गया, जिसको लोग चुन-बिछ कर अपनी प्लेट में नहीं डालते। बस इसीलिए दुःखी था।

बार -बार बोलता कि मैंने unconditional प्यार किया सबसे पर अब नफरत हो गयी है।

समस्या इस unconditional love के concept में ही है। ये exist ही नहीं करता। पर हम इस बात को समझते ही नहीं है।

एक माँ अपने बच्चे से प्यार करती है क्यूंकि ऐसा करने से उसकी maternal instinct को सन्तुष्टि मिलती है। एक  सैनिक अपने देश के लिये जान दे देता है खुशी-खुशी क्योंकि उसका दिमाग उसे बताता है कि वो अगर ऐसा नहीं करेगा तो सन्तुष्ट नहीं होगा। एक इंसान पूरे जीवन दूसरो की सेवा में लगाता है क्यूंकि उसे ऐसा करने से खुशी और सन्तुष्टि मिलती है।

हमें लगता है कि इनका unconditional प्यार और निस्वार्थ भाव है,  इनके कर्मो के पीछे। लेकिन नहीं। दिमाग स्वार्थी होता है, वो आपसे तब तक कोई काम नहीं कराएगा जब तक उसको उस से किसी प्रकार की सन्तुष्टि ना मिले।

उदाहरण के लिए एक ऐसा मरीज जिसके hypothalamus में feeding centre को कोई ऐसी क्षति पहुंच गयी हो कि वह काम करना बंद कर दे, तो उस इंसान को भूख लगेगी ही नहीं। उसका शरीर कमजोर होता जाएगा, वह मरने की कगार पर पहुंच जाएगा पर खायेगा नहीं, क्योंकि दिमाग ने उसे यह बताना बन्द कर दिया है कि खाना उसकी जरूरत है, और जो चीज  आप के दिमाग के हिसाब से आपके भले के लिये जरूरी नहीं है वो आप नहीं करेंगे, भले ही आपकी हालत कितनी भी critical हो जाये।

यही बात प्यार के साथ भी है। हम सिर्फ इसीलिए दुसरो का ख्याल नहीं रखते क्योंकि सामने वाले की जरूरत है, बल्कि हमारे लिये जरूरी है ऐसा करना।

Unconditional love तब होता जब कोई अपना आपको पचास जूते रोज मारे, आपको 3rd डिग्री टार्चर दे ,आपकी जिंदगी में डंडा किये रहे लेकिन तब भी आप उसी दृढ़ता से उससे प्यार करते रहें; अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो इस फालतू कॉन्सेप्ट को भूल जाइये और अपनी वैल्यू create करना सीखिए।

आज गृहणियां कितना भी कर दे, उनकी वैल्यू अक्सर कमाऊं पति से कम होती है परिवार में, क्योंकि ये हर काम जिम्मेदारी समझ कर करती है बेवकूफों की तरफ( yes, they are not निस्वार्थ, they are बेवकूफ)। वो कभी अपने काम का वैल्यू नहीं लेती क्योंकि हमारे सामाजिक ताने - बाने ने यह बात दिमाग में फिट कर दी है कि valuable काम वही है जिसकी कोई कीमत हो नोटों में।

मुझे समाज को देखते हुए यह लगता है कि आपमें से ज्यादातर लोग granted हैं, किसी ना किसी के लिये। तो एहसान ना जताये, घमण्ड ना दिखाये पर अपनी value create करना शुरू करें; क्योंकि दुनिया में कोई नहीं है जो आपसे unconditional love करता है।  love से ज्यादा महत्वपूर्ण desires है, दिमाग के लिये। आप जब तक जरूरत हैं, तभी तक प्यारे हैं। ना तो आपकी गलती है ना आपके उपेक्षा करने वालों की, पर इस नालायक दिमाग के काम करने का तरीका ही  यही है। ☺

Wednesday, October 18, 2017

अलविदा ताज भाई ..बहुत याद आओगे तुम

शशांक द्विवेदी
पिछले दो दिनों से मन बहुत ख़राब और उदास है ,ताज भाई की असमय ,अस्वाभाविक और संदिग्ध परिस्तिथियों में हुई मृत्यु ने मुझे व्यक्तिगत तौर पर बुरी तरह से झकझोर दिया है ..ताजबाबू मेरें सबसे अच्छे मित्रों में से एक था और दिल के बेहद करीब था .अभी भी ताज के आगे “था “ लिखनें में हाथ कॉप जातें है . बचपन से ही(सरस्वती शिशु मंदिर ), शिशु से हमारा साथ और याराना रहा , दिल्ली –एनसीआर में भी ताज एक मात्र मेरा ऐसा मित्र था जिसको मै कभी भी पूरे हक़ से साथ बुला सकता था ,हम दोनों अक्सर मिलते थे ,जब भी मिलनें का मन होता तो सीधे बिना उसको बताये नोयडा के आईटी स्टीलर पार्क में उसकी कंपनी इनोडेटा पहुँच जाता या फिर वो मेरे घर आ जाता ,सबसे बड़ी बात हमारें रिश्तों में जो थी वो ये कि हम हमेशा बिना किसी प्रोफेशनल काम के ही मिलते थे .ताज भाई मेरी जिन्दगी में एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन पर मै आँख बंद कर भरोसा करता था .कहते है ना कि एक लॉयल मित्र हजार रिश्तेदारों से हमेशा बेहतर होता है . वो मेरा ऐसा पारिवारिक मित्र था जिस पर मुझे और प्रियंका दोनों को सबसे ज्यादा भरोसा था .
आज के इस बुरे दौर में भी ताज भाई की वजह से इंसानियत और आदमियत पर भरोसा कायम था . मेरी किसी भी परेशानी में वो मुझसे ज्यादा ही परेशान होता...अपने घर की बहुत सारी आर्थिक समस्याओं और जिम्मेदारी के होते हुए भी हमेशा मुस्कुराते हुए ही मिलता ,पिछले दिनों ३ अक्टूबर को घर आया तो बोला भाई २१ नवंबर को बहन की शादी फिक्स हो गयी है ,अब उसकी तैयारी करनी है .अपने घर और माता –पिता की जिम्मेदारी निभाते निभाते वो अपने सारे सपने ही भुल चुका था .इस बेरहम दुनियाँ के सैकड़ों कडवे अनुभव उसके पास थे फिर भी इंसानियत उसमें सबसे ज्यादा ही थी .  धर्म और राजनीती को सबसे बेकार की चीज मानता था वो , उसका स्पष्ट मानना था कि दुनियाँ में धर्म के नाम पर ही सबसे ज्यादा हिंसा की जा रही है .मुस्लिम होने की वजह से कई बार वो सामाजिक कटुता का शिकार भी हुआ लेकिन फिर भी बोलता था कि भाई हमारे धर्म के  लोगों ने जिस तरह जेहाद के नाम पर पुरी दुनियाँ में कत्लेआम मचा रखा है उसकी कुछ कीमत तो हमें भी चुकानी होगी ही .. बोलता था कि दुनियाँ में अगर कही जन्नत है तो वो अपना देश भारत ही है ,अपना देश और इस देश की मिट्टी ही हमारा सब कुछ है . ताज भाई आस्तिकता और नास्तिकता के बीच में हमेशा इंसानियत को लेकर खड़ा रहें  . जिन समस्याओं और संघर्षो को ताज भाई जी रहें थे उतना तो मै इस जिन्दगी में नहीं जी पाता ..बहुत  बार घर ,समाज और मित्रों के बीच भी ताज भाई उपेक्षा का शिकार रहें लेकिन कभी अपनी जिजीविषा को मरने नहीं दिया . हम दोनों की मित्रता धार्मिक आधार पर हिंदू –मुस्लिम से बहुत ज्यादा ऊपर थी,उसके साथ रहते हुए मुझे हमेशा लगता कि यार इस देश में जो भी हिंदू –मुस्लिम हो रहा है वो बेकार की बात है ..धन प्रधान इस आधुनिक युग में ताज भाई जैसा निस्वार्थ भाव मैंने अपने किसी भी मित्र में नहीं देखा . पैसे के पीछे मैंने आज तक ताज भाई को भागते हुए नहीं देखा ..मै अक्सर जब उससे मिलता तो बोलता चल भाई आज बाहर पार्टी करते है ,तो बोलता यार बेवजह से पैसे खर्च मत कर चल तुझे अरहर की बेहतरीन दाल चावल बना कर खिलाता हूँ (दाल चावल हम दोनों का ही फेवरेट था ),बोलता यार घर के बाहर कितना भी पैसा खर्च कर ले लेकिन संतुष्टि नहीं मिलती. उसकी खूबियों की जितनी बात करू उतनी ही कम है लेकिन लोगों की निस्वार्थ सेवा भावना उसमें सबसे बड़ी थी .पिछले दो दिनों से हर पल उसकी याद आती है ,आँख बंद करते ही उसका चेहरा याद आता है ,मुझे यकीन ही नही हो रहा कि अब वो इस दुनियाँ में नही रहा . इस तरह से उसकी असमय मृत्यु की मैंने कभी कल्पना भी नहीं थी . वो मेडिकली भी फिट था ,किसी भी तरह के नशे और व्यसन से भी दूर था फिर भी अचानक उसका  कमरें में मृत पाया जाना मुझे किसी साजिश की आशंका से भर देता है .लेकिन दुसरे पल यह भी सोचता हूँ कि उसकी कभी किसी से कोई दुश्मनी /मारपीट /लड़ाई /विवाद/अफेयर  आदि कुछ नहीं था ऐसे में कोई उसे क्यों मारेगा .खैर इन सब सवालों के जवाब अभी भविष्य की गर्त में छिपें है लेकिन ताज भाई के इस तरह जाने ने मुझे इस एनसीआर में बिलकुल अकेला छोड़ दिया .क्योंकि वो एकमात्र मेरा ऐसा मित्र था जिससे मै हमेशा बिना किसी काम के मिलता था . उसने यह भी साबित किया कि  प्रपंच ,झूठ और दिखावे के बिना भी मित्रता  सहज तरीके से निभाई जा सकती है . खैर ताज भाई तुम हमेशा मेरी यादों में रहोगो और तुम्हे भुला पाना संभव ही नहीं है ..ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति दे ..भावभीनी श्रधांजली  

(ताज बाबु की ये अंतिम फ़ोटो मैंने अपने मोबाइल से पिछले ३ अक्टूबर को खींची थी ,अफ़सोस कि उस दिन मै उसके साथ एक सेल्फी नहीं ले सका ..बेहद व्यस्तता की वजह से उस दिन ज्यादा बात भी नहीं हो पाई )

Wednesday, July 29, 2015

"मसान" विद मोदी विद वामपंथ

कई सालों बद कल अकेले कोई फिल्म देखने गया था .फेसबुक पर कुछ लोगोने ने तारीफ़ करी तो मसान देखने चला गया ..जैसा कि उम्मीद थी सुबह के शो में ज्यादा दर्शक नहीं थे पीछे से चौथी पंक्ति में बैठा था ,फिल्म शुरू होने के १० मिनट तक तो हॉल में शांति का महाल था लेकिन १० मिनट के बाद मेरे पीछे की पंक्ति में बैठे ३-४ लड़कों ने मोदी के बारे में जोर जोर से बात करनी शुरू कर दी ..कोई बोला ये मोदी बिहार में कुछ नहीं कर पायेगा तो कोई बोलाइसकी ताबूत में आख़िरी कील है ये चुनाव .,नीतिशवा इन्हें मजा चखा देगा ...कुलमिलाकर उनके इस वार्तालाप से मै बहुत परेशान हो रहा था तो मैंने उनसे कहा कि वो लोग मोदी के बारें में बाहर बात कर लें ..खैर मेरे २-३ बार कहने पर भी वो लोग नहीं माने तो मैं अपनी सीट  चेंज करके शांति से फिल्म देखने लगा ....फिल्म के इंटरवल में उन ३-४ लडको से फिर बातचीत हुई तो पता चला कि वो सब जे एन यू  से थे और वामपंथी थे .मुझे पहली बार प्रत्यक्ष तौर पर अहसास हुआ कि मोदी ,वामपंथियों की रग रग  में कैसे समाये हुए है, जिन्हें ये लोग सोते जागते ,नहाते ,धोते ,खाते ,पिक्चर देखते समय भी ये मोदी की चर्चा ,परिचर्चा और आलोचना में दिल से लगे रहते है ..ये कभी अपनी पार्टी के बारें में नहीं सोचते है न ही उसके लिए कुछ कहते या करते है ..हनुमान जी की तरह अगर किसी वामपंथी का हृदय चीर कर देखा जाए तो उसमे सिर्फ मोदी ही  दिखेंगे ...इनकी इसी मानसिक बीमारी से आज इन लोगों का पतन हो गया ..पूरे देश में कोई नामलेवा भी नहीं बच रहा है इनका ..यार अब तो इन धूर्तों को देखकर बिलकुल भी गुस्सा नहीं आता बल्कि बहुत ज्यादा दया आती है देखो इन्हें मोदी ने क्या से क्या बना दिया ...सच में असली भक्त तो यही लोग है जो दिन रात तल्लीनता से मोदी विरोध में लगे रहते है  ..फिल्म का टिकट लेकर भी मोदी भक्ति  ....मान गया इन वामपंथियों को भाई ... खैर फिल्म तो बहुत ही ज्यादा अच्छी थी ,जितनी तारीफ़ करू उतनी कम ...फिल्म का अहसास तो अभी तक है दिल दिमाग में ...

Wednesday, July 1, 2015

अन्त में हम दोनों ही होंगे !!!.

पति-पत्नी के रिश्तों पर एक बहुत ही मानवीय संवेदनशील कविता ,(मूल लेखक पता नही ..)

अन्त में हम दोनों ही होंगे !!!.
" भले ही झगड़े, गुस्सा करें एक दूसरे पर
 टूट पड़ें एक दूसरे पर दादागिरि करने के लिये,
अन्त में हम दोनों ही होंगे
जो कहना है, वह कह लें जो करना है, वह कर लें
एक दुसरे के चश्मे और लकड़ी ढूँढने में,
अन्त में हम दोनों ही होंगे
मैं रूठूं तो तुम मना लेना, तुम रूठो ताे मै मना लूँगा
एक दुसरे को लाड़ लड़ाने के लिये,
अन्त में हम दोनों ही होंगे
आँखें जब धुँधला जायेंगी, याददाश्त जब कमजोर होंगी
तब एक दूसरे को एक दूसरे मे ढूँढने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे
घुटने जब दुखने लगेंगे, कमर भी झुकना बंद करेगी
तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे
घुटने जब दुखने लगेंगे, कमर भी झुकना बंद करेगी
तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे साथ जब छूटने वाला होगा,
बिदाई की घड़ी जब आ जायेगी तब एक दूसरे को माफ करने के लिए, .
अन्त में हम दोनों ही होंगे...."

Wednesday, May 13, 2015

अलविदा सेंट मार्गेट ...अलविदा नीमराना



शशांक द्विवेदी 
पिछले 10 दिनों से अपने भीतर खुशी और उदासी दोनों को एक साथ महसूस कर रहा हूँ .खुशी इसलिए कि मेवाड़ यूनिवर्सिटी (मेवाड़ इंस्टीट्यूट,वसुंधरा गाजियाबाद कैम्पस ) में As a Deputy Director (Research ) ज्वाइन करने वाला हूँ और मेरे साथ मेरी श्रीमती जी Assistant Professor in Mass Comm..Deptt ज्वाइन कर रही है .एक बेहतर आफर और मनपसंद काम के साथ जॉब की ये एक नयी शुरुआत है .इसलिए काफी खुश हूँ लेकिन 10 साल सेंट मार्गेट में काम करने के बाद उसे छोड़ने को लेकर एक अजीब सी उदासी है मेरे मन में क्योकि यहाँ पढ़ाते हुए मुझे बहुत कुछ हासिल हुआ ,सबसे बड़ी बात एक शानदार माहौल, कभी लगा ही नहीं कि जॉब कर रहा हूँ .सुबह आठ से दोपहर 2 बजे की जॉब के बाद जिंदगी के बहुत सारे काम यूं ही हो जाते थे .अरावली हिल्स के नीचे रहते हुए हमेशा प्रकृति को अपने पास ही महसूस किया जो अब शायद नहीं कर पाऊंगा लेकिन हर अच्छी चीज , जगह और लोग भी कभी न कभी ,किसी न किसी वजह से बिछड़ते जरुर है शायद वही अलविदा वाली फीलिंग्स आ रही है मुझे ....फिलहाल 31 मई तक यही हूँ उसके बाद 1 जून को मेवाड़ यूनिवर्सिटी के वसुंधरा कैम्पस में नई जॉब ज्वाइन करूँगा .दिल्ली के नजदीक या यूं कहें दिल्ली में ही आ गया हूँ .... अब दिल्ली वाले मित्रों से मुलाक़ात हो पाएगी ...सेंट मार्गेट के मेरे सहयोगियों और इसके प्रबंधन को मेरा ह्रदय से आभार कि इन्होने हमेशा मुझे बेहतर काम करने के लिए एक अच्छा माहौल दिया और हमेशा मेरा साथ दिया,अपने स्टूडेंट्स को बहुत मिस करूँगा जिन्हें सालों पढ़ाया ...Love u all ,love u Neemrana .....

Friday, February 20, 2015

हमारी भी लड़ाई होती है ...


शशांक द्विवेदी 
कल किसी ने मेरी मैरिज एनिवर्सरी की पोस्ट पढ़ने के बाद एक सवाल किया कि क्या आपके और आपकी पत्नी के बीच भी लड़ाई होती है तो मैंने जवाब में कहा कि दुनियाँ में पति –पत्नी की शायद ही ऐसी कोई जोड़ी होती होगी जिनके बीच कभी भी लड़ाई –झगड़ा ,नोक झोंक ना होती हो .खैर मेरे और प्रिया के बीच भी कभी कभार यह सब हो जाता है . आखिर हम दोनों भी इंसान है ,आदर्श स्तिथि तो सिर्फ देवी –देवताओं में ही होती होगी .
हम दोनों के विचार बहुत भिन्न है कई मुद्दों पर मतभेद भी रहता है लेकिन विचारों की यही भिन्नता मुझे कई बार बहुत ठीक लगती है इससे किसी भी चीज के हर पहलू को समझने में मदत मिलती है .वैसे भी मेरा मानना है कि पति –पत्नी होने का मतलब यह नहीं है कि एक दूसरे की जी –हुजूरी करने लग जाएँ या गुलामी जैसा महसूस करें .सीधी सी बात है व्यक्तित्व भिन्न है तो विचार भी भिन्न ही होंगे .इसलिए बेहतर आपसी समझ बनाने की जरुरत होती है .

खाने के मामले में प्रियंका जहाँ बेहद सात्विक है मतलब वो लहसुन और प्याज बिल्कुल नहीं खाती ना ही उसके परिवार में कोई खाता वहीं मुझे ये बेहद पसंद है .प्रियंका के होते हुए घर में सभी सब्जियां बिना लहसुन और प्याज के ही बनती है ,सबसे खास बात यह है कि सब्जियां बेहद शानदार और टेस्टी बनती है और अब तो मुझे भी खूब पसंद आने लगी ..हाँ अब मै अलग से प्याज सलाद के साथ  में खा लेता हूँ . कई मामले ऐसे भी है जहाँ वो मेरी बात मानती है .करियर के मामले में जहाँ मै पूर्णकालिक तौर पर मीडिया में जाना चाहता था /चाहता हूँ लेकिन प्रियंका ने कभी जाने नहीं दिया उसने कहा पढाने के साथ लेखन करो वही ठीक है मीडिया में जाने की जरुरत नहीं है.. प्रिया ने अमर उजाला में कई साल काम किया इसलिए उसे मीडिया का अनुभव मुझसे कहीं ज्यादा है फिलहाल उसकी बात मानना ही मुझे ठीक लगा .मेरे अंदर ड्रेसिंग सेंस नहीं है प्रिया में है और आज की डेट में मेरे ८० फीसदी कपड़े प्रियंका ही खरीदती है .प्रियंका आम ठेठ भारतीय पत्नियों की तरह सिर्फ “यस मैन “ नहीं है बल्कि मेरे  अंदर या फिर मेरे किसी काम में उसे जो ठीक नहीं लगता उस पर वो बिना झिझक कर बोलती है .चाहे वो मुझे बुरा ही क्यों ना लगे ..बहुत मामलों में मेरी पहली आलोचक मेरी पत्नी ही है ..एक बात जरुर है कि मुझे कई बार शादी एक बंधन के रूप में भी दिखती है क्योंकि शादी के पहले भी मै ५ साल प्रिया के साथ रहा वहाँ मुझे बड़ी स्वतंत्रता महसूस होती थी लेकिन शादी के बाद बिना वजह बहुत सारे झंझट आ जाते है मसलन परिवार ,समाज ,रिश्तेदार..इन्हें खुश करो ,उन्हें खुश करो ...ज्यादातर नोंकझोक भी इन्ही बातों से होती है ..बेवजह के ढकोसलों से भी बहुत खीज और परेशानी होती है ...लेकिन फिर भी ये सब तो झेलना ही पड़ेगा भाई क्योंकि प्रेम विवाह की  कुछ कीमत तो चुकानी ही पड़ती है. लेकिन विचारों में थोड़ा बहुत मतभेद होते हुए भी हमारे बीच “प्रेम “ का गहरा अहसास है जो हमें हमेशा जोड़े रहता है और सच्चाई है कि सिर्फ “प्रेम “ में ही इतना सामर्थ्य है जो आपको जिंदगी भर जोड़े रख सकता है .

Thursday, February 19, 2015

तुम्हे देखा है बहुत ,फिर भी बहुत कम देखा ..

शशांक द्विवेदी 
6 year of togetherness ... आज शादी को 6 साल पूरे हो गये ,लेकिन प्रियंका से दोस्ती -प्रेम को तो 11 साल हो गये ..इतना वक्त गुजर गया पता ही नहीं चला ..आगरा आया था इंजीनियरिंग की पढाई करने उसी दौरान पहले "प्रेम" हुआ फिर "विवाह " मतलब प्रेम -विवाह हो गया...काफी मुश्किलें आई लेकिन हो गया ...वैसे मेरा स्पष्ट मानना है कि संघर्ष के ,प्रेम के ,रोमांस के वे 5 साल काफी जबर्दस्त थे...काश वो दिन फिर से वापस आ जाए ... मेरी जिंदगी की कहानी पूरी फ़िल्मी है फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ के सभी पात्र वास्तविक है ....प्रियंका के प्रेम ने ही मुझे "लेखक "भी बना दिया ..सच कहूँ तो मै पत्थर था उसने ही मुझे तराश कर किसी काम का बना दिया ...मै जो कुछ भी हूँ उसमें उसका बहुत ज्यादा योगदान है .. .अमर उजाला ,आगरा से चली ये प्रेम कहानी तो फिलहाल जबर्दस्त तरीके से चल रही है ,उम्मीद करता हूँ कि आगे भी चलती रहेगी ..क्योंकि मुझे हमेशा से यही लगता है कि सिर्फ "प्रेम "ही आपको जोड़े रख सकता है ,विवाह तो एक पड़ाव भर है ..
प्रिया के लिए तो यही पंक्तियाँ याद आ रहीं है कि 

"तुमसा ना कोई हमदम देखा ,उड़ गये होश जवानी का वो आलम देखा ,तुम्हे देखकर जी भरता ही नहीं ,तुम्हे देखा है बहुत ,फिर भी बहुत कम देखा ..."

मै बहुत खुश नसीब हूँ कि मुझे प्रिया जैसी प्रेमिका और जीवन संगिनी मिली ,उसने मुझे बहुत खुशी और प्यार दिया ,हर कदम पर मेरा साथ देते हुए मेरा हौसला भी बढ़ाया ...प्रियंका को शादी की सालगिरह पर ढेरों शुभकामनाएँ.....ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारे संबंधों की मजबूत डोर ऐसे ही बंधी रहें ...












हमारी भी लड़ाई होती है ...

कल किसी ने मेरी मैरिज एनिवर्सरी की पोस्ट पढ़ने के बाद एक सवाल किया कि क्या आपके और आपकी पत्नी के बीच भी लड़ाई होती है तो मैंने जवाब में कहा कि दुनियाँ में पति –पत्नी की शायद ही ऐसी कोई जोड़ी होती होगी जिनके बीच कभी भी लड़ाई –झगड़ा ,नोक झोंक ना होती हो .खैर मेरे और प्रिया के बीच भी कभी कभार यह सब हो जाता है . आखिर हम दोनों भी इंसान है ,आदर्श स्तिथि तो सिर्फ देवी –देवताओं में ही होती होगी .
हम दोनों के विचार बहुत भिन्न है कई मुद्दों पर मतभेद भी रहता है लेकिन विचारों की यही भिन्नता मुझे कई बार बहुत ठीक लगती है इससे किसी भी चीज के हर पहलू को समझने में मदत मिलती है .वैसे भी मेरा मानना है कि पति –पत्नी होने का मतलब यह नहीं है कि एक दूसरे की जी –हुजूरी करने लग जाएँ या गुलामी जैसा महसूस करें .सीधी सी बात है व्यक्तित्व भिन्न है तो विचार भी भिन्न ही होंगे .इसलिए बेहतर आपसी समझ बनाने की जरुरत होती है .
खाने के मामले में प्रियंका जहाँ बेहद सात्विक है मतलब वो लहसुन और प्याज बिल्कुल नहीं खाती ना ही उसके परिवार में कोई खाता वहीं मुझे ये बेहद पसंद है .प्रियंका के होते हुए घर में सभी सब्जियां बिना लहसुन और प्याज के ही बनती है ,सबसे खास बात यह है कि सब्जियां बेहद शानदार और टेस्टी बनती है और अब तो मुझे भी खूब पसंद आने लगी ..हाँ अब मै अलग से प्याज सलाद के साथ  में खा लेता हूँ . कई मामले ऐसे भी है जहाँ वो मेरी बात मानती है .करियर के मामले में जहाँ मै पूर्णकालिक तौर पर मीडिया में जाना चाहता था /चाहता हूँ लेकिन प्रियंका ने कभी जाने नहीं दिया उसने कहा पढाने के साथ लेखन करो वही ठीक है मीडिया में जाने की जरुरत नहीं है.. प्रिया ने अमर उजाला में कई साल काम किया इसलिए उसे मीडिया का अनुभव मुझसे कहीं ज्यादा है फिलहाल उसकी बात मानना ही मुझे ठीक लगा .मेरे अंदर ड्रेसिंग सेंस नहीं है प्रिया में है और आज की डेट में मेरे ८० फीसदी कपड़े प्रियंका ही खरीदती है .प्रियंका आम ठेठ भारतीय पत्नियों की तरह सिर्फ “यस मैन “ नहीं है बल्कि मेरे  अंदर या फिर मेरे किसी काम में उसे जो ठीक नहीं लगता उस पर वो बिना झिझक कर बोलती है .चाहे वो मुझे बुरा ही क्यों ना लगे ..बहुत मामलों में मेरी पहली आलोचक मेरी पत्नी ही है ..एक बात जरुर है कि मुझे कई बार शादी एक बंधन के रूप में भी दिखती है क्योंकि शादी के पहले भी मै ५ साल प्रिया के साथ रहा वहाँ मुझे बड़ी स्वतंत्रता महसूस होती थी लेकिन शादी के बाद बिना वजह बहुत सारे झंझट आ जाते है मसलन परिवार ,समाज ,रिश्तेदार..इन्हें खुश करो ,उन्हें खुश करो ...ज्यादातर नोंकझोक भी इन्ही बातों से होती है ..बेवजह के ढकोसलों से भी बहुत खीज और परेशानी होती है ...लेकिन फिर भी ये सब तो झेलना ही पड़ेगा भाई क्योंकि प्रेम विवाह की  कुछ कीमत तो चुकानी ही पड़ती है. लेकिन विचारों में थोड़ा बहुत मतभेद होते हुए भी हमारे बीच “प्रेम “ का गहरा अहसास है जो हमें हमेशा जोड़े रहता है और सच्चाई है कि सिर्फ “प्रेम “ में ही इतना सामर्थ्य है जो आपको जिंदगी भर जोड़े रख सकता है ...

Thursday, September 18, 2014

शशांक को सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान


  देश के विभिन्न अखबारों में शशांक द्विवेदी को सर्वश्रेष्ठ ब्लाँगर सम्मान दिए जाने पर ख़बरें प्रकाशित हुई
 
जनसंदेश टाइम्स
राजस्थान पत्रिका 
अमर उजाला आगरा से अपने एक कॉलम “साइबर बाइट्स “ से तकनीकी लेखन की शुरुआत करने वाले शशांक द्विवेदी को हिन्दी दिवस पर नई दिल्ली में एबीपी न्यूज  के एक खास कार्यक्रम में विज्ञान और तकनीकी लेखन के क्षेत्र में उनकी प्रसिद्ध वेबसाइट विज्ञानपीडिया के लिए के लिए सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का पुरस्कार दिया गया . शशांक द्विवेदी सेंट मार्गरेट इंजीनियरिंग कॉलेज,नीमराना में प्रोफ़ेसर और प्रसिद्ध वेबसाइट विज्ञानपीडिया डॉट कॉम के संपादक है .एबीपी न्यूज़ ने एक भव्य कार्यक्रम में देश भर के चुनिंदा 10 ब्लॉगरों को  सम्मानित किया. पुरस्कार के लिए ब्लॉगरों का चयन प्रसिद्ध साहित्यकार और आलोचक सुधीश पचौरी, कवि डॉ. कुमार विश्वास, गीतकार प्रसून जोशी और नीलेश मिश्र ने किया.
दैनिक जागरण 
विज्ञानपीडिया डॉट कॉम (विज्ञान और तकनीक की दुनियाँ ) आम आदमी 
,छात्रों और प्रोफेशनल्स को हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित नवीनतम जानकारी ,खोज ,लेख उपलब्ध कराती है .इस वेबसाईट के संपादक शशांक द्विवेदी के अनुसार आम आदमी और छात्रों की विज्ञान में रूचि बढानें के उद्देश्य से दो साल पहले इसकी शुरुवात की गई थी जो काफी सफल रही .हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित गुणवत्तापूर्ण कंटेंट की काफी कमी है .जबकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उनकी  भाषा में ही विज्ञान कंटेंट देकर उनकी रूचि बढ़ाई जा सकती है .इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ही विज्ञानपीडिया .कॉम जैसा प्रयोग किया गया ,जिसको आशातीत सफलता मिल रही है .
दैनिक जागरण ,चित्रकूट 
द सी एक्सप्रेस 
दुनियाँ के कई देशों से इस साईट को देखा जा रहा है और इसकी सामग्री पर हजारों हिट्स मिल रहें है ,वर्ड वाइड अब तक वेबसाईट के 64200 पेज व्यू हो चुके है. विज्ञानपीडिया अपनी विशिष्ट सामग्री  की वजह  से  युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसमें अंतरिक्ष उर्जा संकट ,जल संकट ,ग्लोबल वार्मिग ,उच्च शिक्षा ,तकनीकी शिक्षा ,मंगल अभियान पर कई विशेष लेख है . वेबसाइट के संपादक शशांक द्विवेदी देश के प्रमुख हिन्दी अख़बारों के लिए विज्ञान और तकनीकी विषयों पर नियमित स्तंभ लिखते है . विज्ञान संचार  से जुडी   देश की कई संस्थाओं द्वारा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है . अख़बारों में उनके प्रकाशितअधिकांश लेख आपको यहीं मिल जायेंगे .इस वेबसाइट का उद्देश्य आम आदमी को विज्ञान और तकनीक से जोड़ना है .इस वेबसाइट पर विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित अच्छी से अच्छी जानकारी  उपलब्ध है .नियमित अपडेट होने से यह पाठकों को नई जानकारी उपलब्ध कराती है.
द सी एक्सप्रेस 



शशांक द्विवेदी को सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान

ABP News द्वारा सम्मान  

कभी सोचा नहीं था कि ब्लाँगिंग /वेबसाइट के लिए मुझे कोई पुरस्कार मिलेगा .लेकिन कल जब ABP News ने इसके लिए सम्मानित किया तो बहुत खुशी हुई .दो साल पहले जब ब्लागिंग शुरू की तो इसके बारे में कुछ खास नहीं पता था आज भी ज्यादा कुछ नहीं पता है ...मेरा ब्लाँग/ वेबसाइट अतिसाधारण है लेकिन मुझे विज्ञान लेखन से प्यार है और इसे मैंने इसी उद्देश्य से बनाया कि रोज कुछ न कुछ अच्छी जानकारी इसमें अपडेट करके आप लोगों से शेयर कर सकू ..आम आदमी को विज्ञान और तकनीक के बारे में जानकारी उसकी अपनी भाषा में दे सकू .. हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित गुणवत्तापूर्ण कंटेंट की काफी कमी है .जबकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उनकी  भाषा में ही विज्ञान कंटेंट देकर उनकी रूचि बढ़ाई जा सकती है .इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ही विज्ञानपीडिया .कॉम जैसा प्रयोग किया गया ,जिसको आशातीत सफलता मिल भी रही है .आगे भी इसे और अच्छा बनाने की कोशिश करूँगा जिसमें आप लोगों का भी सहयोग अपेक्षित है .अगर आप मित्रों के पास विज्ञान /तकनीक से जुड़ी कोई खबर ,लेख हो तो वो आप मेरी वेबसाइट के लिए सहर्ष भेज सकते है .मेरे इस पुरस्कार में आप सभी मित्रों/पाठकों का भी  ही बहुत योगदान है क्योंकि आप लोगों के प्रोत्साहन ,तारीफ़ और आलोचना की वजह से ही मै कुछ अच्छा कर पा रहा हूँ इसलिए आप सभी के सहयोग और प्यार के लिए मै सदैव आपका आभारी रहूँगा .