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Monday, April 21, 2014

एक औरत के दिल छू देने वाले प्रश्न -एक शानदार कविता

देह मेरी ,
हल्दी तुम्हारे नाम की ।
हथेली मेरी ,
मेहंदी तुम्हारे नाम की ।
सिर मेरा ,
चुनरी तुम्हारे नाम की ।
मांग मेरी ,
सिन्दूर तुम्हारे नाम का ।
माथा मेरा ,
बिंदिया तुम्हारे नाम की ।
नाक मेरी ,
नथनी तुम्हारे नाम की ।
गला मेरा ,
मंगलसूत्र तुम्हारे नाम का ।
कलाई मेरी ,
चूड़ियाँ तुम्हारे नाम की ।
पाँव मेरे ,
महावर तुम्हारे नाम की ।
उंगलियाँ मेरी ,
बिछुए तुम्हारे नाम के ।
बड़ों की चरण-वंदना
मै करूँ ,
और 'सदा-सुहागन' का आशीष
तुम्हारे नाम का ।
और तो और -
करवाचौथ/बड़मावस के व्रत भी
तुम्हारे नाम के ।
यहाँ तक कि
कोख मेरी/ खून मेरा/ दूध मेरा,
और बच्चा ?
बच्चा तुम्हारे नाम का ।
घर के दरवाज़े पर लगी
'नेम-प्लेट' तुम्हारे नाम की ।
और तो और -
मेरे अपने नाम के सम्मुख
लिखा गोत्र भी मेरा नहीं,
तुम्हारे नाम का ।
सब कुछ तो
तुम्हारे नाम का... नम्रता से पूछती हूँ :
आखिर तुम्हारे पास...
क्या है मेरे नाम का?
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देव भारती

सुंदरता का कोई रंग नहीं होता


(28 फरवरी 2014 को ऑस्कर नोमिनेशन के बाद लुपिता योंगओ द्वारा दिए गए ‘ब्लैक ब्यूटी’ वक्तव्य का एक अंश)

मैं इस अवसर पर सुंदरता के बारे में कुछ कहना चाहूंगी. मुख्यतः ब्लैक ब्यूटी पर. अवार्ड मिलने से ठीक पहले मुझे एक मेल मिला है जिसकी कुछ पंक्तियां मैं आप सबसे शेयर कर रही हूं. ‘डीयर लुपिता, हॉलीवुड में रातोंरात सफलतम स्टार बन जाने वाली तुम एक ब्लैक लकी हो. मैं अपनी काली त्वचा को सुंदर बनाने के लिए गोरेपन वाली एक क्रीम खरीदने ही जा रही थी कि तभी तुम्हारे नाम की घोषणा हुई और तुमने मुझे कालेपन की हीनता से बचा लिया.’ इसे पढ़ते ही मेरा मन लहूलुहान हो गया. मैनें कभी नहीं सोचा था कि स्कूल की बाहरी दुनिया में किया गया मेरा पहला काम इतना प्रभावी होगा, जिसकी छवि न सिर्फ मेरे लिए बल्कि उन सभी स्त्रियों के लिए उम्मीद की किरण बन जाएगी जो मेरी तरह काली हैं.