Sunday, July 28, 2019

सेहत का लिवर , लिवर के बारें में पूरी जानकारी

सेहत का लिवर
Health Guide For Liver on Hepatitis Day Today

हेपटाइटिस का नाम लेते कुछ डर-सा लगता है, लेकिन सच यह है कि अगर हम होशियार रहें तो यह उतना खतरनाक नहीं है। विशेषज्ञों से बात कर जानकारी दे रहे हैं लोकेश के. भारती

क्या है हेपटाइटिस
सामान्य शब्दों में इसे लिवर में हेपटाइटिस वाइरस (HBV) का इन्फेक्शन कह सकते हैं। यह वाइरस खून, असुरक्षित सेक्स, दूसरों के इस्तेमाल की गई सूई से फैलता है और हां, मां से उसके नवजात बच्चे में भी। चूंकि यह वाइरस सीधे लिवर पर हमला करता है और इस वजह से लिवर में सूजन आ जाती है, इसलिए बीमारी को हेपटाइटिस नाम दिया गया।

कितनी तरह का हेपेटाइटिस
-A, B, C, D, E और G
-इनमें A और B सबसे कॉमन हैं।
-A और E ज्यादा खतरनाक नहीं होते।
-B और C सबसे खतरनाक होते हैं और इन्हें क्रॉनिक हेपटाइटिस माना जाता है।
-D कभी भी अकेला नहीं रहता। यह हमेशा B के साथ ही ऐक्टिव होता है।
- हेपटाइटिस A और B के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन हेपटाइटिस C के लिए नहीं।
-हेपटाइटिस E और G के मामले बहुत कम होते हैं।

हेपटाइटिस के लक्षण
-जोड़ों और पेट में दर्द, उलटी और कमजोरी
-हमेशा थकान रहना
-बुखार आ जाना और यूरिन का रंग गाढ़ा होना
-भूख कम लगना
-त्वचा पीली पड़ना और आंखों का सफेद हिस्सा भी पीला पड़ना
-पेशाब का रंग पीला होना

नोट: सामान्य फीवर और हेपटाइटिस के लक्षणों में कुछ खास फर्क होता है। मसलन, सामान्य बुखार में पेट दर्द, पेशाब का पीला होना जैसे लक्षण नहीं आते जबकि हेपेटाइटिस में ये खास लक्षण होते हैं। ऐसे लक्षण किसी दूसरी बीमारी में भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

हेपटाइटिस के टेस्ट
अगर ऊपर के लक्षण हैं तो सबसे पहले लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि लिवर सही ढंग से काम कर रहा है या नहीं। अगर लिवर फंक्शन में कोई समस्या दिखती है तो फिर वाइरस की पहचान के लिए टेस्ट करवाया जाता है।
LFT का खर्च 500-1200 रुपये
रिपोर्ट: ब्लड सैंपल सुबह देने पर शाम तक या दूसरे दिन रिपोर्ट मिल जाती है।

इतना खतरनाक क्यों
इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इसका इन्फेक्शन साइलेंट होता है। कई बार लोगों को इन्फेक्शन होता है, लेकिन उन्हें साल, दो साल तक पता नहीं चलता। इस वाइरस की वजह से कभी-कभी लिवर कैंसर भी हो सकता है।

कितनी तरह के हेपटाइटिस B
1. एक्यूट हेपटाइटिस बी: इसका इन्फेक्शन 6 महीने तक रह सकता है। हेपटाइटिस B पैनल टेस्ट से इसके बारे में पता चल जाता है।
2. क्रॉनिक हेपटाइटिस B: अगर ब्लड में हेपटाइटिस बी का वाइरस 6 महीने से ज्यादा समय से हो तो उसका इलाज क्रॉनिक हेपटाइटिस बी के रूप में किया जाता है। यह ज्यादा खतरनाक है।

कैसे फैलता है
-संक्रमित ब्लड दूसरे शख्स के शरीर के ब्लड से संपर्क होने पर
-संक्रमित शख्स के साथ असुरक्षित सहवास करने से
-सूई जैसी चीजें जिन पर खून लगने का अंदेशा हो, उसे दोबारा इस्तेमाल करने पर अगर पहला शख्स संक्रमित हो
-मां से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को
-ऐसे हॉस्पिटल या ब्लड बैंक से ही खून लें, जहां तरीके से चेक करने के बाद ही खून लिया जाता हो
-टैटू लगवाने के दौरान
-दांत का इलाज कराने के दौरान इन्फेक्टेड इक्वेपमेंट्स इस्तेमाल करने से
नोट: यह छूने से नहीं फैलता और न ही हवा, छींकने से, खांसी या टॉयलेट की सीट इस्तेमाल करने से।

वैक्सीन लगाने की जरूरत
-वैक्सीन सभी बड़ों को लगवाने की जरूरत नहीं, हालांकि कुछ डॉक्टर सभी को वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं।
-सभी नवजात (1 साल तक के बच्चे) को लगवाना जरूरी
-मेडिकल फील्ड और पब्लिक सेफ्टी के लिए काम करने वाले लोगों को
-जिनकी किडनी खराब हो और डाइलिसिस होता हो
-जिन्हें बार-बार अपना खून बदलवाना पड़ता हो
-शरीर पर टैटू बनवाने वाले लोग असुरक्षित सेक्स किया हो तो
-जिनकी फैमिली में हेपटाइटिस बी किसी को पहले या अभी हुआ हो
-अगर किसी को यह वैक्सीन पहले लग चुका है तो उसे नहीं लगवाना चाहिए।

कितना सुरक्षित है वैक्सीन
हेपटाइटिस B वैक्सीन असरदार है। दरअसल, यह वैक्सीन कैंसररोधी है। यह बीमार शख्स में लिवर कैंसर होने से रोकता है। दुनिया में 80 फीसदी से ज्यादा लिवर कैंसर के मामले हेपटाइटिस B की वजह से ही होते हैं।

नोट: अगर किसी को पहले यह वैक्सीन लग चुका है, लेकिन उसे ठीक से याद नहीं तो सबसे पहले उसे डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट (anti-HBs) करवाना चाहिए। वैसे दोबारा लेने से कोई नुकसान नहीं होता।

हेपटाइटिस A
हेपटाइटिस A क्रॉनिक (जो बीमारी लंबे समय तक रहे) नहीं, एक्यूट (ऐसी बीमारी जो कम समय तक रहे यानी कम खतरनाक) है। यह लिवर को अमूमन नुकसान नहीं पहुंचाता।
वैक्सीन
बच्चों में: 18 से 20 महीने की उम्र में
खर्च: ₹2000 से 2500 (पेनलेस), सामान्य: ₹400 से 600

बड़ों में: शरीर में हेपेटाइटिस A के लिए एंटीबॉडी कम होने पर डॉक्टर के कहने पर। खर्च: ₹2000 से 2500 (पेनलेस), सामान्य: ₹400 से 600

टेस्ट : Hepatitis A IgM  खर्च: ₹200-300

बचाव:  हेपटाइटिस A गंदे खानपान से फैलता है, इसलिए साफ खानपान जरूरी है।

हेपटाइटिस C
सी वायरस का इन्फेक्शन होने के करीब डेढ़ से दो महीने बाद लक्षण नजर आते हैं। जिन मामलों में एक महीने से चार महीने में लक्षण नजर आ जाते हैं, उन्हें एक्यूट कहा जाता है। इन्फेक्शन को छह महीने से ज्यादा हो जाए तो वह क्रॉनिक कहलाता है। ऐसा होने पर मरीज के पूरी तरह ठीक होने के आसार कम हो जाते हैं। हालांकि क्रॉनिक के मामले कम ही होते हैं। जिनको बचपन में यह इन्फेक्शन होता है, ज्यादातर उन्हीं में बड़े होने पर क्रॉनिक हेपटाइटिस होता है।
टेस्ट: HCV RNA खर्च: ₹5000-6000
नोट: हेपटाइटिस सी का वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
( खर्च में कमी-बेशी मुमकिन है।)

प्रेग्नेंसी और हेपटाइटिस
मां को अगर हेपटाइटिस है तो बच्चे के भी इससे पीड़ित होने की आशंका रहती है। प्रेग्नेंसी के दौरान सही इलाज न हो तो महिला को ब्लीडिंग हो सकती है और बच्चे व महिला, दोनों की जान जा सकती है। अगर मां को पहले से मालूम है कि उसे हेपटाइटिस है तो उसे डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। जिन महिलाओं को हेपटाइटिस बी का टीका लगा है, उन्हें भी प्रेग्नेंसी के दौरान जांच करानी चाहिए। जन्म के बाद भी बच्चे को टीका लगाकर बीमारी से बचाया जा सकता है।

क्या है पीलिया
मां को अगर हेपटाइटिस है तो बच्चे के भी इससे पीड़ित होने की आशंका रहती है। प्रेग्नेंसी के दौरान सही इलाज न हो तो महिला को ब्लीडिंग हो सकती है और बच्चे व महिला, दोनों की जान जा सकती है। अगर मां को पहले से मालूम है कि उसे हेपटाइटिस है तो उसे डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। जिन महिलाओं को हेपटाइटिस बी का टीका लगा है, उन्हें भी प्रेग्नेंसी के दौरान जांच करानी चाहिए। जन्म के बाद भी बच्चे को टीका लगाकर बीमारी से बचाया जा सकता है।

टैटू से कैसे फैलता है हेपटाइटिस
टैटू बनवाते समय पतली नीडल से इंक स्किन के अंदर डाली जाती है। वह ब्लड के संपर्क में आती है। अगर वह नीडल पहले से ही किसी हेपेटाइटिस इन्फेक्टेड शख्स की स्किन के अंदर पहुंचकर उसके ब्लड के संपर्क में आ चुकी है तो उसके आगे जो लोग टैटू गुदवाएंगे, उन्हें हेपटाइटिस बी या सी के इन्फेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा रहेगा। इससे एचआईवी का खतरा भी है।

कैसे बचें टैटू वाले इन्फेक्शन से
-अगर कोई टैटू बनाने वाला आर्टिस्ट नीडल को नहीं बदलता या सही तरीके से साफ नहीं करता तो यह सेफ्टी के खिलाफ है।
-ऐसे किसी भी पार्लर से टैटू नहीं गुदवाएं, जिसे लाइसेंस न मिला हो। सड़क किनारे गुदवाने में यह खतरा बढ़ जाता है।
-वैसे तो ज्यादातर आर्टिस्ट्स ग्ल्वस पहनते हैं। सिर्फ ग्लव्स पहनना काफी नहीं है। उसे ग्लव्स पहनने से पहले हाथ को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। यह भी ध्यान रहे कि आर्टिस्ट हर बार नए ग्लव्स पहनकर ही टैटू गोदे।
-सिर्फ टैटू मशीन को साफ करने से काम नहीं चलेगा। मशीन को हर बार स्टरलाइज करना भी जरूरी है। कई बार किसी टॉवेल से पोंछकर मशीन को साफ कर दिया जाता है। यह हेपटाइटिस से बचने के लिए पर्याप्त सफाई नहीं है।
-स्टरलाइजेशन प्रक्रिया में केमिकल के इस्तेमाल से या गर्मी से बैक्टीरिया या वाइरस को मारा जाता है।
-जहां पर टैटू गुदवाना हो, शरीर के उस हिस्से की सफाई भी जरूरी है। उसे भी केमकिल की मदद से स्टरलाइज किया जाना चाहिए।

हेल्दी लिवर के 7 टिप्स
-सुबह एक गिलास गुनगुना पानी और दिन में कम से कम 2 लीटर गुनगुना या सामान्य साफ पानी पिएं।
-शराब न पिएं। सेल्फ मेडिकेशन (डॉक्टर से बिना पूछे, खुद से दवाई लेना) न करें।
-नीबू, ग्रीन टी, फलों का जूस (स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी) आदि पिएं।
-सात या पंद्रह दिनों पर किसी दिन जूस उपवास रखने से लिवर को फायदा होगा।
-प्रोसेस्ड फूड जिनमें बहुत ज्यादा प्रिजर्वेटिव, फैट्स और कॉलेस्ट्रॉल हों, खाने से बचें। मसलन, फास्ट फूड, डीप फ्राइड फूड आदि न खाएं।
-हरी साग-सब्जियां (करेला, सरसों का साग, पालक) आदि को खाने में शामिल करें।
-लहसुन और अखरोट को भी डाइट में शामिल करें।

एक्सपर्ट पैनल
-डॉ. एस. के. सरीन डायरेक्टर, द इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलयरी साइंस
-डॉ. के. एन. सिंगला, एचओडी एंड सीनियर कंसल्टेंट, गेस्ट्रोइंटेरॉलजी, मैक्स
-डॉ. (कर्नल) वी. के. गुप्ता, स्पेशलिस्ट, गेस्ट्रोइंटेरॉलजी एंड हेपटॉलजी
डॉ. संदीप गर्ग, डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज

साभार नवभारत टाइम्स 

Friday, July 26, 2019

सेंधा नमक के ये हैं बड़े गुण

*सेंधा नमक के ये गुण शर्तिया आपको नहीं पता होंगे, जरूर पढ़ें*
 शशांक द्विवेदी
1 सेंधा नमक में लगभग 65 प्रकार के खनिज लवण पाए जाते हैं, जो कई तरह की बीमारियों से बचाने में मददगार होते हैं। वहीं इसका एक बढ़ि‍या फायदा यह है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद है। चूंकि यह पाचक रसों का निर्माण करता है, इसलिए कब्ज भी दूर करने में सहायक है।
2 यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है, जिससे दिल के दौरे की संभावना को भी कम करता है। इसके अलावा हाई ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में भी सेंधा नमक फायदेमंद होता है।
3 तनाव अधिक होने पर सेंधा नमक का सेवन करना लाभकारी होगा, यह सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन्स का स्तर शरीर में बनाए रखता है, जो तनाव से लड़ने में आपकी मदद करते हैं।
4 मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन हो, या फिर हड्ड‍ियों से जुड़ी कोई समस्या, सेंधा नमक का सेवन करने से आपकी यह समस्या धीरे-धीरे पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगी।
5 पथरी यानि स्टोन हो जाने पर, सेंधा नमक और नींबू को पानी में मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों में पथरी गलने लगती है। वहीं साइनस के दर्द को कम करने में ही सेंधा नमक फायदेमंद है।
6 डाइबिटीज और अस्थमा व आर्थराइटिस के मरीजों के लिए सेंधा नमक का सेवन काफी लाभदायक होता है। यह शरीर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में भी फायदेमंद है।
7 अनिद्रा होने पर सेंधा नमक असरकारी है, वहीं त्वचा रोगों एवं दंत रोगों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। मोटापा कम करने के लिए भी सेंधा नमक का प्रयोग करना बेहतर तरीका है।

Tuesday, July 23, 2019

जोड़ों में अकड़न हो तो ,प्रोटीन की कमी हो सकती है

*जोड़ों में होने लगे अकड़न, तो हो सकती है प्रोटीन की कमी*
 शशांक द्विवेदी
1 पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं लेने से जोड़ों में मौजूद तरल पदार्थ का निर्माण कम होता है, जिससे लचीलापन कम हो जाता है और जोड़ों में अकड़न के साथ मांसपेशि‍यों में भी दर्द की समस्या बढ़ने लगती है।
2 शरीर में प्रोटीन की कमी से सफेद रक्त कोशि‍काओं की संख्या कम होती जाती है और हीमाग्लोबिन भी कम हो सकता है। इन कारणों से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।
3 प्रोटीन की कमी से रक्त में शर्करा का स्तर कम होता है, जिससे शारीरिक कमजोरी महसूस होने के साथ ही थकावट जैसी परेशानियां पैदा होती है। इसके अलावा आपको बार-बार भूख लगने का कारण भी प्रोटीन की कमी हो सकती है।
4 आपके सौंदर्य के लिहाज से भी प्रोटीन बेहद जरूरी है। अगर सही मात्रा में प्रोटीन नहीं लिया गया, तो इसका असर आपके बाल और नाखूनों पर भी नकारात्मक होता है।
5 अगर आप बार-बार बीमार पड़ रहे हैं और शारीरिक दर्द की समस्या से गुजर रहे हैं, तो इसका कारण भी प्रोटीन की कमी हो सकती है, क्योंकि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने का एक बड़ा कारण यह भी है।

उपवास रखने में परहेज करें ,अगर ये 5 बीमारी हो तो

*इन 5 में से कोई 1 भी बीमारी हो, तो व्रत रखने से करें परहेज*
 शशांक द्विवेदी
1 अगर आपके शरीर में शर्करा का स्तर असंतुलित है या आप डायबिटीज के मरीज हैं, तो आपको उपवास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह शर्करा के स्तर को असंतुलित कर आपकी सेहत को काफी हद तक बिगाड़ सकता है।
2 अगर हाल ही में आपका कोई ऑपरेशन या सर्जरी हुई है, तो आपको उपवास करने से बचना चाहिए क्योंकि उसके पुन: संरक्षण में आपको पर्याप्त पोषण और ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
3 अगर आपके शरीर में खून की कमी है, तो व्रत-उपवास करने से बचें और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। खून की कमी होने पर उपवास करना सेहत से खिलवाड़ हो सकता है।
4 अगर आप हार्ट, किडनी, फेफड़े या लिवर संबंधित बीमारी से ग्रस्त हैं, तो उपवास करने से बचें, क्योंकि इससे आपकी आंतरिक शारीरिक व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएंगी और सेहत को इसका खामियाजा चुकाना होगा।
5 गर्भावस्था या मां बनने पर भी आापका व्रत-उपवास रखना न केवल आपकी सेहत को, बल्कि शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर इस समय व्रत करना ही पड़े, तो भरपूर पोषण युक्त आहार लें।

Sunday, July 21, 2019

रात में भिगों कर खाएंगे तो फायदा होगा .

*अगर इन 6 चीजों को रातभर भिगोकर खाएंगे, तो बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर*
 शशांक द्विवेदी
1. मुनक्का -इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन काफी मात्रा में होते हैं। मुनक्के का नियमित सेवन कैंसर कोशिकाओं में बढ़ोतरी को रोकता है। इससे हमारी स्किन भी हेल्दी और चमकदार रहती है। एनीमिया और किडनी स्टोन के मरीजों के लिए भी मुनक्का फायदेमंद है।
2. काले चने -इनमें फाइबर्स और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती हैं जो कब्ज दूर करने में सहायक होते है।
3. बादाम -इसमें मैग्नीशियम होता है जो हाई बीपी के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से भीगी हुई बादाम खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है।
4. किशमिश -किशमिश में आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। भीगी हुई किशमिश को नियमित रूप से खाने से स्किन हेल्दी और चमकदार बनती है। साथ ही शरीर में आयरन की कमी भी दूर होती है।
5. खड़े मूंग -इनमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी भरपूर मात्रा में होता है। इनका नियमित सेवन कब्ज दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है। इसमें पोटेशियम और मैग्नेशियम भी भरपूर मात्रा में होने की वजह से डॉक्टरस हाई बीपी के मरीजों को इसे रेगुलर खाने की सलाह देते है।
6.  मेथीदाना -इनमें फाइबर्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो कब्ज को दूर कर आंतों को साफ रखने में मदद करते हैं। डायबिटीज के रोगियों के लिए भी मेथीदाने फायदेमंद हैं। साथ ही इनका सेवन महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता हैं।

बहुत फायदेमंद है मूँग दाल का पानी

*वजन घटाना है, तो घबराएं नहीं.. रोजाना पिएं मूंग दाल का पानी*
 शशांक द्विवेदी
मूंग की दाल अधिकांश घरों में बनाई जाती है और काफी पसंद भी की जाती है। वैसे तो सभी तरह की दालों में पौष्टिक तत्व होते हैं, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि मूंग की दाल खाने से आपको कौन से फायदे मिलेंगे -
1 मूंग की दाल में भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है। साथ ही इसे खाने से विटमिन-सी, कार्ब्स, प्रोटीन और डायटरी फाइबर भी मिलता है।
2 मूंग की दाल खाने से एनीमिया की समस्या में राहत मिलती है और वजन कम करने में भी ये सहायक होती है।
3 मूंग की दाल का पानी पिने से फाफी देर तक पेट भरा रहता है और आप एनर्जेटिक भी फील करते हैं।
4 मूंग की दाल का पानी छोटे बच्चों के लिए भी फायदेमंद होता है, बच्चे इसे आसानी से पचा पाते हैं। ये बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
5 अगर किसी को दस्त या डायरिया की समस्या हो गई हो, तो उन्हें 1 कटोरी मूंग दाल पिलाएं। इससे उनके शरीर में पानी की कमी पूरी होगी साथ ही दस्त रूकने में मदद मिलेगी।

स्वस्थ रहनें के कुछ आसान उपाय

💐💐पहला सुख निरोगी काया💐💐अपने डॉक्टर खुद बने(वैद्यकीय डॉक्टर से सलाह भी ले)
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शशांक द्विवेदी
1 =  केवल सेंधा नमक प्रयोग करे!थायराईड बी पी और पेट ठीक होगा!
2 = केवल स्टील का कुकर ही प्रयोग करें!अल्युमिनियम में मिले हुए लेड से होने वाले नुकसानों से बचेंगे!
3 = कोई भी रिफाइंड तेल ना खाकर केवल तिल! मूंगफली सरसों और नारियल का प्रयोग करें!रिफाइंड में बहुत केमिकल होते है!जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते है!
4 = सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करे!
5 = रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है!प्रदूषित हवा बाहर करे!
6 = काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में भी अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी!
7 = देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता!
8 = ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा!
9 = ज्यादा से ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं! आयरन की कमी किसी को नहीं होगी!
10 = भोजन का समय निश्चित करे!पेट ठीक रहेगा! भोजन के बीच बात न करें!भोजन ज्यादा पोषण देगा!
11 = नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें!पोषक विटामिन और फाइबर मिलेंगे!
12 = सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें पेट ठीक रहेगा!
13 = चीनी कम से कम प्रयोग करें!ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी!
14 = चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर ले!
15 = छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करे! फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते!
16 = चाय के समय आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे!
17 = एक डस्टबिन रसोई में और एक बाहर रखें!सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें!
18 = रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों का तेल लगाएं सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें!
19 = करेले मैथी और मूली यानि कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा!
20 = पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे!
21 = प्लास्टिक और अल्युमिनियम रसोई से हटाएं दोनों केन्सर कारक है!
22‌ = माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग कैंसर कारक है!
23 = खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ पेट और दांत को खराब करती हैं!
24 = बाहर का खाना बहुत हानिकारक है!खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं!
25 = तली चीजें छोड़ें वजन पेट एसिडिटी ठीक रहेंगी!
26 = मैदा बेसन छौले राजमां और उड़द कम खाएँ गैस की समस्या से बचेंगे!
27 = अदरक अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं गैस और शरीर के दर्द कम होंगे!
28 = बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है!
29 = पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है!-U V वाला ही प्रयोग करे!सस्ता भी और बढ़िया भी!
30 = रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं!इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें!
31 = रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें!सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छानने के बाद जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें!रात को पी जाएं!पेट साफ होगा कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा
32 = सुबह रसोई में चप्पल न पहनें शुद्धता भी एक्यू प्रेशर भी!
33 = रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं एसिडिटी खतम!
34 = एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारियां शरीर से निकल जायेंगी!
35 = चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी!
36 = रसोई के मसालों से बनी चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है!
37 = सर्दियों में नाखून के बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा!
38 = सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए सर्दी से नुकसान नहीं होगा!
39 = रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी! नमक फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा!
40 = कभी - कभी नमक - हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता!
41 = बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा!
42 = सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय का ताजा दही जरूर शामिल करें! प्रोबायोटिक का काम करेगा!
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     हृदय की बीमारी के आयुर्वेदिक इलाज!
हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे!उनका नाम था महाऋषि वागवट जी!!

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी!जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!-(Astang Hridayam)

इस पुस्तक मे उन्होने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे!
              यह उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है!कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है!मतलब दिल की नलियों मे Blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त (Blood) मे Acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है!

अम्लता आप समझते है!जिसको अँग्रेजी में Acidity भी कहते हैं और यह अम्लता दो तरह की होती है !

एक होती है पेट कि अम्लता !
और
एक होती है रक्त (Blood) की अम्लता !

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है!खट्टी खट्टी डकार आ रही है!मुंह से पानी निकल रहा है!और अगर ये अम्लता (Acidity) और बढ़ जाये तो इसे Hyperacidity कहते हैं!

फिर यही पेट की अम्लता बढ़ते - बढ़ते जब रक्त मे आती है!तो रक्त अम्लता-(Blood Acidity) होती है!और जब Blood मे Acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता और नलियों में Blockage कर देता है और तभी Heart Attack होता है!इसके बिना Heart Attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है!जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं!क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!
           एसीडिटी का इलाज क्या है!
वागबट जी आगे लिखते है कि जब रक्त (Blood) में अम्लता (Acidity) बढ़ गई है!तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करें जो क्षारीय है!

आप जानते है!दो तरह की चीजे होती है!

अम्लीय (Acidic)
और
क्षारीय (Alkaline)

अब अम्ल और क्षार (Acid and Alkaline) को मिला दें तो क्या होता है!

हम सब जानते है!Neutral होता है!

तो वागबट जी लिखते है!कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है! तो क्षारीय (Alkaline) चीजे खाओ!तो रक्त की अम्लता (Acidity) Neutral हो जाएगी और जब रक्त मे अम्लता Neutral हो गई तो Heart Attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं होगी!

ये है सारी कहानी!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है! और हम खाये!

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है! जिन्हें अगर आप खायें तो कभी Heart Attack न आयेगा और अगर आ गया तो दुबारा नहीं आएगा!

आपके घर में जो सबसे ज्यादा क्षारीय चीज है वह है! लौकी जिसे हम दुधी भी कहते है!और English मे इसे Bottle Gourd भी कहते हैं जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है!

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है!इसलिये आप हर रोज़ लौकी का रस निकाल कर पियें या अगर खा सकते है!तो कच्ची लौकी खायें!

वागवतट जी के अनुसार रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है!इसलिए आप लौकी के रस का सेवन करें!

कितना मात्रा में सेवन करें!

रोज 200 से 300 ग्राम लौकी का रस ग्राम पियें!

कब पिये!

सुबह खाली पेट (Toilet) शौच जाने के बाद पी सकते है!या फिर नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं!

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय भी बना सकते हैं!जिसके लिए इसमें 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लें क्योंकि तुलसी बहुत क्षारीय है!

इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते भी मिला सकते है!क्योंकि पुदीना भी बहुत क्षारीय होता है!

इसके साथ आप इसमें काला नमक या सेंधा नमक भी जरूर डाले!ये भी बहुत क्षारीय है!याद रखे नमक काला या सेंधा ही डालें दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डालें!

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है!

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी Heart की Blockage ठीक कर देगा!-21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा और फिर आपको कोई आपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी!

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे और जो पैसे बच जायें उसे अगर इच्छा हो किसी गौशाला मे दान कर दें क्योंकि डाक्टर को देने से अच्छा है किसी गौशाला दान दे!

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा....!!
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हल्दी का पानी
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पानी में हल्दी मिलाकर पीने से यह 7 फायदें होते है...!!

1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है! सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है!

2.‌ आप यदि रोज़ हल्दी का पानी पीते हैं!तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है!और खून जमता भी नहीं है!यह खून साफ करता है!और दिल को बीमारियों से भी बचाता है!

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है!क्योंकि हल्दी का पानी टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है! इसके अलावा हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं!

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए क्योंकि हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है...!!

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है!तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है!जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है!हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते है...!!

6. शरीर में किसी भी तरह की सूजन हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें!हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है!जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है! सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी!

7. कैंसर खत्म करती है हल्दी!हल्दी कैंसर से लड़ती है! और उसे बढ़ने से भी रोक देती है!क्योंकि हल्दी एंटी - कैंसर युक्त होती है!और यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगे!
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हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम हैं...!!

१ - खाना खाने के १.३० घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए!

२ - पानी घूँट घूँट करके पीना है!जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके पेट में Acid बनता है और मुँह में छार दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा!

३ - पानी कभी भी ठंडा (फ़्रिज़ का) नहीं पीना है!

४ - सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना चाहिए!रात भर जो अपने मुँह में लार है!वो अमूल्य है! उसको पेट में ही जाना ही  चाहिए!

५ - खाना जितने आपके मुँह में दाँत है!उतनी बार ही चबाना है!

६ - खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा में बैठकर या उखड़ूँ बैठकर ही खाना चाहिए!

७ - खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही प्याज़ के साथ दूध दही के साथ उड़द की दlल!

८ - समुद्री नमक की जगह सेंधा नमक या काला नमक खाना चाहिए!

९ - रीफ़ाइन तेल डालडा ज़हर है!इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों तिल मूँगफली या नारियल का तेल उपयोग में लाए!सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है! आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते हैं!

१० - दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए!

११ - घर में चीनी (शुगर) का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर (केमिकल ) मिलाने पड़ते है!इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आज कल गुड़ बनाने में कॉस्टिक सोडा (ज़हर) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है!इसलिए सफ़ेद गुड़ ना खाए!प्राकृतिक गुड़ ही खाये!प्राकृतिक गुड़ चाकलेट कलर का होता है!

१२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए!

१३ - घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन या कुकर नहीं होना चाहिए!हमारे बर्तन मिट्टी पीतल लोहा और काँसा के होने चाहिए!

१४ - दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवश्य और शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए!

१५ - सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंधl नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए!

यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी!यदि आप बीमार है!तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग (BP, शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे!
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सर्दियों में उठायें मेथी दानों से भरपूर लाभ
     ➡ मेथीदाना उष्ण वात व कफनाशक पित्तवर्धक पाचनशक्ति व बलवर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है! यह पुष्टिकारक शक्ति स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है!सुबह–शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है!कब्ज व गैस को दूर करता है!इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं!यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी है!

➡ अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं!उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे–धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होने वाली व्याधियों जैसे घुटनों व जोड़ों का दर्द भूख न लगना हाथों का सुन्न पड़ जाना सायटिका मांसपेशियों का खिंचाव बार -बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है!गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भुने मेथी दानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है!
        मेथी दाने से शक्तिवर्धक पेय
दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४ – ५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें!
      औषधीय प्रयोग

1. कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें. ५-६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है!भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है!

2. जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें!इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें!-२ चम्मच यह मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों कमर व घुटनों का दर्द आमवात (गठिया) का दर्द आदि में लाभ होता है!इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी!

3. पेट के रोगों में :१ से ३ ग्राम मेथी दानों का चूर्ण सुबह दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच दस्त भूख न लगना अफरा दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है!

4. दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह - शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है!

5. मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें!आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म–गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है!

6. अंगों की जकड़न :भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें-१–१ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ–पैरों में होने वाला दर्द भी दूर होता है!

7. विशेष : सर्दियों में मेथीपाक मेथी के लड्डू मेथीदानों व मूँग–दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं!
                 IMPORTANT
HEART ATTACK और गर्म पानी पीना!

यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं Heart Attack के बारे में भी एक अच्छा लेख है!

चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं!ठंडा पानी नहीं!अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए!जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं!यह लेख उनके लिए ही है!

भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है!क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं!ठोस रूप में बदल देता है!

इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है!जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है!तो यह टूट जाता है!और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है!यह आँतों में एकत्र हो जाता है!फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है!और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है!

इसलिए सबसे अच्छा यह है!कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये!एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले पीना चाहिए!इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे!💐💐अपने वेद जी की सलाह जरूर ले💐डॉक्टर से भी पूछे💐💐