मै कांग्रेस का कट्टर विरोधी हूँ या यू कहिये
कि जन्मजात विरोधी हूँ .."आप " और केजरीवाल मुझे बहुत पसंद है लेकिन
आजकल एक धर्मसंकट से गुजर रहा हू कि "केजरीवाल " के अभ्युदय से "ठाकुर तो गयो "(मोदी
) वाली स्तिथि हो गयी है जिसका सीधा -सीधा
फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है .."आप "से लाखों लोग जुड रहें है और
लोकसभा में भले ही "आप " कोई बड़ा कमाल ना दिखा पाए लेकिन बीजेपी का खेल
३० -४० सीटों में तो बिगाड़ ही सकती है जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को ही मिलेगा
..हो सकता है फिर से कांग्रेस की सरकार केंद्र में फिर बन जाए जो मै किसी भी कीमत पर नहीं चाहता ...एक
तरफ केजरीवाल के प्रति मेरा मोह है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रति कट्टर विरोध
...समझ में नहीं आ रहा कि ऐसी परिस्थितियों में किसका समर्थन किया जाए ..क्योंकि
हर हाल में "कांग्रेस मुक्त भारत का सपना" काफी दिनों से देख रहा हूँ
..जो धर्मसंकट मेरे सामने है लगभग वही बहुत सारे "आप " समर्थकों में भी
है (योगेन्द्र यादव के एक सर्वे के अनुसार भी )..क्या किया जाए कुछ आप लोग सुझाव
दे(लोकसभा चुनाव के लिए ) "विकल्पहीनता की स्तिथि में भाजपा का समर्थन"
या फिर "आप " के साथ
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