Thursday, November 14, 2013

शैतानी करना अच्छा लगता है ...

शशांक द्विवेदी
मेरी बेटी आन्या जबर्दस्त शैतान है ,तोड़ -फोड़ उथल पुथल मचाये रहती है .कल रात में मैंने उससे कहा कि इतनी शैतानी क्यों करती हो तो उसने कहा शैतानी करना अच्छा लगता है ...फिर बोली कि पापा आप गंदे हो आप मुझे मारते हो (जबकि मैं रेयर ही उसे मारता हूँ ) ,उसकी बात सुनकर मै चौक गया क्योंकि मैंने उस समय या कई  दिन पहले तक तो उसे मारा भी नहीं था ..उसकी बात मुझे दिल में लग गयी ,कल रात में ठीक से नींद नहीं आयी ,बेचैनी बनी रही ,उसके शब्द मेरे दिमाग में चलते रहें फिर मैंने इन्ही पर एक कविता लिख डाली ...
मेरी प्यारी सी बेटी आन्या को समर्पित
शैतानी करोगी ?
हाँ करूंगी
क्यों करोगी
क्योंकि शैतानी करना अच्छा लगता है ,
खेलना -कूदना ,गिरना और उठना अच्छा लगता है ,
पानी में भीगना ,पानी से खेलना अच्छा लगता है ,
मिट्टी खाना ,मिट्टी से खेलना और मिट्टी के घर बनाना अच्छा लगता है,
रोज नयें कपडें पहनना ,फिर उन्हें गंदा करना
उन पर खूब धूल मिट्टी लगाना अच्छा लगता है,
सामान तोडना ,फोड़ना,गिराना अच्छा लगता है ,
किसी भी काम के लिए ,किसी भी चीज के लिए जिद करना और उसे मनवाना अच्छा लगता है,
रोना और खूब रोना ,जम कर रोना ,हंगामा करना अच्छा लगता है,
खाने से ज्यादा दूध ,आइसक्रीम ,टॉफी,चॉकलेट ,चिप्स ,कुरकुरे अच्छा लगता है,
ठंडी में भी आइसक्रीम की जिद करना अच्छा लगता है ,
खिलौनों के साथ थोड़ी देर खेलना फिर उन्हें तोड़ -फोड़ देना अच्छा लगता है,
मम्मी -पापा को खूब छकाना ,चिढ़ाना और परेशान करना अच्छा लगता है ,
पड़ोस के बच्चों के साथ खेलना और हुडदंग मचाना अच्छा लगता है ,
हर समय ,हर हाल में खुश रहना अच्छा लगता है ,
नई चीज को छूना ,उसके बारे में जानने की जिज्ञासा रखना अच्छा लगता है ,
हँसना भी अच्छा लगता है और रोना भी अच्छा लगता है ,
मम्मी -पापा की पिटाई के बाद भी शैतानी करना अच्छा लगता है ,
ये दुनियाँ बच्चों को जो कुछ भी नहीं करने देना चाहती
वो सब कुछ करना अच्छा लगता है ,
हजारों बंदिशों के बाद भी शैतानी करना अच्छा लगता है...





Saturday, November 9, 2013

राहुल गाँधी और वरुण गाँधी में फर्क

राहुल, गाँधी परिवार से है । वरुण भी गाँधी परिवार से है। राहुल गाँधी की दादी मरी वरुण गाँधी की भी दादी मरी राहुल गाँधी के पापा मरे। वरुण गाँधी के भी पापा मरे। राहुल की माँ अपने सास के साथ रही। वरुण की माँ को घर से निकाल दिया गया! राहुल और सोनिया के मुकाबले के मुकाबले ,वरुण और मेनका गाँधी को बहुत ज्यादा कष्ट सहना पड़ा लेकिन फर्क देखिये राहुल और उसकी माँ हमेशा अपना दुखदा रोते रहते है और वरुण और उसकी माँ अपने दुःख का प्रचार प्रसार नहीं करते। ये फर्क है भारतीय महिला और विदेशी महिला में

तथाकथित बुद्धिजीवी लोगों से सवाल

मंगल यान का सफल प्रक्षेपण देश के लिए बहुत ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्द्धि है ,इसके लिए वैज्ञानिकों को हार्दिक बधाई .कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग इस अभियान पर ४५० करोड़ के खर्च को फिजूल खर्च बता रहें है ,ऐसे लोग लाखों करोड़ के घोटालों पर क्यों नहीं कुछ कहते .उन्हें शायद ये भी पता नहीं कि इस अभियान में लगा खर्च बाकी देशों के इसी अभियान में हुए खर्च का मात्र एक तिहाई है .कुछ ऐसे भी प्रगतिशील लोग है जो इसरो अध्यक्ष के तिरुपति में पूजा पर उंगली उठा रहें है ,मै उन लोगों से पूछना चाहता हू कि क्या आस्तिक होना ,पूजा करना अवैज्ञानिक है ? प्रगतिशील लोगों से निवेदन है कि मेरे इस प्रश्न का जवाब जरुर दे ...

सुरक्षा पर राजनीति करना बिल्कुल गलत ..

इंडियन मुजाहिद्दीन मोदी को मारना चाहता है.... आइएसआइ मोदी को मारना चाहती है.... लश्कर-ए-तय्यबा मोदी को मारना चाहते है.... नक्सली मोदी को मारना चाहते है.... अल क़ायदा मोदी को मारना चाहते है..... तथाकथित सेक्युलर दल मोदी को मारना चाहते है.... उनकी रैली में विस्फोट किया जाता है ,आतंकवादी पकड़े जाते है ,होटलों से जिंदा बम बरामद होते है ,उनको मारने को लेकर गृह मंत्रालय ,आई बी ,इंटेलीजेंस लगातार इनपुट देता रहा है फिर भी सेकुलर सरकारें उन्हें मरने के लिए छोड़ देती है,रैली तक में कोई इंतजाम नहीं किये जाते . ...क्या वाकई नरेन्द्र मोदी के मरने से ही तथाकथित सेकुलर लोगों के कलेजे को ठंडक मिलेगी ...क्या मोदी की हत्या से ही लोकतंत्र मजबूत होगा ,क्या यही लोकतंत्र है ...लोकतंत्र में किसी का विरोध करना ठीक है लेकिन सुरक्षा पर राजनीति करना बिल्कुल गलत है ..

मायावती का भ्रष्टाचार


पहली खबर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी कंपनियों के 400 करोड़ रुपये के फिक्स डिपॉजिट को रिलीज कर दिया है। दूसरी खबर केंद्र सरकार ने मायावती को दिल्ली में जो 3 बंगले अलाट किये थे उन्हें प्रेरणा स्थल के नाम पर मायावती ने अंदर से तोड़ कर 30000 वर्ग फूट का एक बंगला बना दिया .दिल्ली में किसी के पास भी इतना बड़ा बंगला नहीं है .लुटियन जोन स्तिथ इन बंगलों में अंदर कोई भी निर्माण नहीं किया जा सकता फिर ऐसा क्यों किया गया ?केंद्र सरकार मायावती पर इतनी मेहरबान क्यों है ? नोयडा में एक मामूली से क्लर्क रहें मायावती के भाई के पास इतने कम समय में 700 करोड़ की संपत्ति कैसे आयी ..क्या कोई बताएगा या यहाँ पर भी सब गोलमाल है मतलब कांग्रेस के साथ मिलकर पूरा देश लूट लो ,कांग्रेस को समर्थन के बदले में जितना मर्जी आये उतना भ्रष्टाचार करों ..

नेशनल दुनियाँ के संपादकीय पेज पर आज प्रकाशित मेरी कविता .

नेशनल दुनियाँ के संपादकीय पेज पर आज मेरी कविता ...जब भी मेरी कवियायें प्रकाशित होती है बहुत ज्यादा खुशी महसूस होती है क्योंकि कवितायेँ मेरे दिल के ज्यादा करीब लगती है ....
1 "जीवन "

न खुद को जान सका 
न पहचान सका                     
बस बहता ही रहा 
जीवन की इस अविरल धारा में 
जीवन को देखा बहुत 
समझा बहुत 
पर बदल न सका 
अपने आप को 
बहता ही रहा 
पर किनारा न मिला 
पर मिलता भी कैसे ?
जब कोई किनारा ही न था 
बहते हुए भी 
सँभल न सका 
बस डूबता ही गया 
जीवन के इस अंतर्मन में 
पर ,जब डूबा तो ऐसा डूबा 
इस अंतर्मन में 
इस चेतना में कि 
फिर लगा कि 
डूबना ही जीवन है 
क्योंकि फिर कोई ,
आस नहीं ,साँस नहीं 
बस जीवन ही जीवन 
जो अनंत है 
अविकार है 
वहाँ न तुम हो 
न "मैं "हूँ 
सब एक है ....

2 अकेलापन 

दो पाटों के बीच
पिसता है आदमी
एक तरफ है
उसका परिवार यानि वो और उसकी पत्नी
दुसरी तरफ है
बूढ़े माँ –बाप का परिवार
उम्मीदें बहुत है दोनों तरफ
आवश्यकताएं बहुत है दोनों तरफ
आदमी सिर्फ एक है
बीच में
अंतर्द्वंद है मन में क्या करें
और क्या न करें
कैसे संतुलन बैठाएं
पत्नी और माता –पिता के बीच
क्योंकि एक के साथ
होनें का मतलब
दूसरें के साथ न होना है
वो बेटा बनें या पति
दोनों भूमिकाएं विपरीत है
एक दूसरे के
परिवारों के साथ इस द्वन्द में
उसकी भावनाओं को
उसकी सोच को
कौन समझेगा ?
वो तो सिर्फ बेचारा है
अकेला है
और लगता है कि
अकेला ही रहेगा ..

@शशांक द्विवेदी 
Poem Link







Tuesday, October 22, 2013

मेरी बेटी यूं ही हमेशा खुश रहे

आन्या के तीसरे जन्मदिन27फरवरी 2013 पर प्रियंका 
तीन साल पहले जब माँ बनी थी ,उस दर्द के एहसास की खुशी तो ताउम्र रहेगी। मां बनकर मैने अपनी बेटियों में अपना अक्स को अनुभव किया उनका बोलना,खेलना और न जाने क्या क्या। अब लगता है कि दो जिंदगियां ऐसी हैं जो सिफ मेरे और मेरे लिए है। उनके दूर होने के एहसास से मुझे तो डर लगता है। कभी डाटने पर मैं उनसे कहती हूं मैं चली जाउगी आप मुझे परेशान मत करो तो वे तुरंत मान जाती है क्योंकि  मेरे जाने का कहने से  मेरी बेटियों को भी मेरे दूर होने का एहसास सालता है। उनकी तोतली जुबान कहती है मम्मी आप नहीं जाओ नही तो मैं रो जाउगी और मुझे आपकी याद आएंगी। ऐसा लगता है कि कोई है जिसे मेरे दूर होने से या जाने से दर्द होता है। शायद यही रिश्ता है मां का बेटी का जो भगवान का दिया हुआ है जिसे हम दोनो महसूस करते हैं .अभी मेरी बेटी को दुनियाँ की समझ नहीं है, हमारे रिश्तों में शब्द नहीं है लेकिन एक एहसास है जिसे मैं नहीं भुलना चाहती। आज उसकी तीसरी बर्थ डे पर जब मैं उसकी प्लानिंग कर रही थी तो लग रहा था न जाने मैं उन्हें क्या क्या दे दू कि वो खुश रहे, उसकी मुस्कुराहट उसकी आंखों की चमक हमेशा यूं ही खिलती रहे। इसी उम्मीद से आज उसकी बर्थ डे सेलीब्रेट की, बहुत एंज्वाय किया इन यादगार पलों को  । मैं बहुत खुश हूँ और  सोच रही हूँ  कि समय ठहर जाए और मेरी बेटी यूं हमेशा खुश रहे।