Saturday, March 9, 2019

हाई बीपी की समस्या से ग्रसित लोगों का आहार

*अगर आपका कोई अपना हो हाई बीपी का शिकार तो ऐसा हो उनका आहार, जानिए 13 काम की बातें...*

1 उच्च रक्तचाप के रोगी को नमक का सेवन कम करना चाहिए।
2 उच्च रक्तचाप के रोगी को ज्यादा मात्रा में भोजन नहीं करना चाहिए, साथ ही गरिष्ठ भोजन से भी परहेज करना चाहिए।
3 भोजन में फलों और सब्जियों के सेवन ज्यादा करना चाहिए।
4 लहसुन, प्याज, साबुत अन्न, सोयाबीन का सेवन करना चाहिए।
5 सब्जियों में लौकी, नींबू, तोरई, पुदीना, परवल, सहिजना, कद्दू, टिण्डा, करेला आदि का सेवन करना चाहिए।
6 भोजन में पोटेशियम की मात्रा ज्यादा हो और सोडियम की मात्रा कम होनी चाहिए।
7 अजवायन, मुनक्का व अदरक का सेवन रोगी को फायदा पहुंचाता है।
8 फलों में मौसमी, अंगूर, अनार, पपीता, सेब, संतरा, अमरूद, अन्नानस आदि सेवन कर सकते हैं।
9 बादाम बिना मलाई का दूध, छाछ सोयाबीन का तेल, गाय का घी,गुड़, चीनी, शहद, मुरब्बा आदि का सेवन कर सकते हैं।
10 डेयरी उत्पादों, चीनी, रिफाइन्ड खाद्य पदार्थों, तली-भुनी चीजों, कैफीन और जंक फूड से नाता नहीं रखना चाहिए।
11 दिन में कम से कम 10-12 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए।
12 कम मात्रा में बाजरा, गेहूं का आटा, ज्वार, मूंग साबुत तथा अंकुरित दालों का सेवन करना चाहिए।
13 पालक, गोभी, बथुआ जैसी हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।


सेहत के लिए 15 सुपर फूड

15 SuperFoods for Health

हेल्दी फूड की बात तो हम सभी करते हैं, लेकिन हेल्दी फूड्स की लंबी लिस्ट के बीच कुछ फूड आइटम ऐसे भी हैं, जो हमारे लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। इनमें दूसरों के मुकाबले ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। इन्हें हम सुपर फूड भी कह सकते हैं। हालांकि सुपर फूड्स का फायदा भी तभी है, जब हम बैलेंस्ड डाइट लें और सुपर फूड्स को भी बदल-बदल कर लें क्योंकि हर फूड आइटम के अपने फायदे होते हैं। ऐसे ही चंद सुपर फूड्स के बारे में एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं मधुरेन्द्र सिन्हा और प्रियंका सिंह

1. बादाम.......................
फायदे
- ढेर सारे न्यूट्रिशंस से भरपूर बादाम में विटामिन ई, कैल्शियम, गुड फैट, फाइबर, प्लांट प्रोटीन, आयरन, जिंक आदि अच्छी मात्रा में होते हैं।
- यह कॉलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम शुगर लेवल को मेंटेन रखता है।
- इसमें मौजूद जिंक ब्रेन को मजबूती देता है और बुढ़ापे में पार्किंसंस जैसी बीमारी को रोकने में मदद करता है। इसके माइक्रो-न्यूट्रिएंट बालों को अच्छा बनाते हैं।
- ज्यादा मात्रा में खाने से वजन बढ़ सकता है। कड़वे बादाम में मौजूद हाइड्रोसायनिक एसिड नर्वस सिस्टम स्लो करता है।

कितना खाएं: रोजाना कम-से-कम 11-12 बादाम जरूर खाएं। इससे कम खाने का फायदा नहीं है। इससे ज्यादा भी न खाएं। अगर दूसरे ड्राई फ्रूट्स भी लेते हैं तो बादाम की मात्रा इसी हिसाब से कम कर दें।

किस रूप में खाएं: बादाम को स्नैक्स की तरह सीधे खा सकते हैं। पीसकर दूध में डालकर भी खा सकते हैं। इससे छिलका न उतारें, वरना फाइबर निकल जाएगा। गर्मियों में भिगोकर खाएं। इससे तासीर ठंडी होती है।

2. अखरोट....................................
फायदे
- अखरोट में ओमेगा 6, फॉलिक एसिड, मैग्नीज, कॉपर, फॉस्फोरस, विटामिन बी 6 और विटामिन ई होता है।
- यह हड्डियों के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को बेहतर करने में मदद करता है।
- कॉपर दिल के लिए भी अच्छा है तो ओमेगा 6 दिमाग के लिए। स्किन को भी यह बेहतर बनाता है।
- कैंसर की रोकथाम में भी मददगार पाया गया है अखरोट को।

कितना खाएं: रोजाना 2-3 अखरोट (4-6 टुकड़े) खाएं। गर्मियों में भिगोकर खाना बेहतर है।

कैसे खाएं: स्नैक्स की तरह सीधे खाना बेहतर है। सलाद आदि में भी मिक्स कर सकते हैं। गर्मियंो में भिगोकर खाना फायदेमंद है।

3. फ्लैक्स सीड्स..........................
फायदे
- फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी के बीजों में ओमेगा-थ्री, कैल्शियम और फाइबर अच्छी मात्रा में होते हैं।
- ये गुड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करते हैं और दिल की सेहत को सुधारते हैं।
- हड्डियों और बालों के लिए भी काफी फायदेमंद हैं। एंटी-एजिंग के साथ-साथ इम्युनिटी भी बढ़ाते हैं।
- हॉर्मोन को बैलेंस कर महिलाओं में पीरियड्स और मिनोपॉज की समस्या से निपटने में मदद करते हैं।

कितना खाएं: रोजाना 10-15 ग्राम यानी 1-2 चम्मच तक ले सकते हैं। दूसरे सीड्स जैसे कि चियासीड्स या तरबूज, खरबूज और सीताफल के बीजों में भी करीब-करीब यही फायदे हैं। सारे बीज मिलाकर भी ले सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर 15 ग्राम से ज्यादा न लें।

कैसे खाएं: हल्का भूनकर खा सकते हैं। हालांकि कच्चा खाना बेहतर है। पाउडर बनाकर आटे में डालकर या फिर बीज के रूप में दही या सलाद में डालकर खा सकते हैं।

4. केला..........................
- केले में फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी 6 और विटामिन सी आदि अच्छी मात्रा में होता है।
- केला खाने से पाचन ठीक रहता है। साथ ही, यह शरीर में होने वाले छोटे-मोटे दर्द से भी राहत दिलाता है।
- केला डिप्रेशन के मरीजों के लिए फायदेमंद है। इसे खाने से मन दुरुस्त रहता है। बढ़ते बच्चों के लिए काफी फायदेमंद है यह।
- केला खून को पतला रखने में मदद करता है। इसका पोटैशियम बीपी को दुरुस्त रखता है, तो मैग्नीशियम कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।

कितना खाएं: रोजाना 1 या 2 केले खा सकते हैं। हालांकि वैरायटी के िलए दूसरे फल भी खुराक में शामिल करें। शुगर के मरीज कम खाएं।

कैसे खाएं: सुबह उठकर खाना सबसे फायदेमंद है। जरूरी लगे तो दिन में भी खा सकते हैं।

5. दालचीनी..........................
फायदे
- दालचीनी में एंटी-ऑक्सिडेंट, ओमेगा 6, फाइबर, मैग्नीज, पोटैशियम और कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है।
- यह मेटाबॉलिजम तेज कर मोटापा घटाने में मदद करती है तो शुगर भी कंट्रोल में रखती है।
- रोजाना दालचीनी का 3 ग्राम पाउडर (करीब आधा छोटा चम्मच) खाने से हार्ट अटैक, मोटापा, ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल के आसार कम हो जाते हैं।
- इससे पेट की चर्बी 20 फीसदी तक कम हो सकती है, हार्ट अटैक के चांस 10 फीसदी कम हो सकते हैं और ब्लड प्रेशर में 5 फीसदी कमी आ सकती है।

कितना खाएं: रोजाना 3 ग्राम तक लेना फायदेमंद। 5 ग्राम से ज्यादा न लें वरना बीपी लो हो सकता है।

कैसे खाएं: दालचीनी को पीसकर सब्जी या फ्रूट चाट में मिलाकर खा सकते हैं। बेहतर है कि इसे ज्यादा गर्म न करें। दालचीनी को मिक्सी में न पीसें क्योंकि उससे उसके गुण कम होते हैं। सिलबट्टे या इमामदस्ते में कूटें। फोर्टिस सी-डॉक हॉस्पिटल ने अपनी हालिया रिसर्च में दालचीनी को बीपी और शुगर, दोनों को कंट्रोल करने में फायदेमंद पाया।

6. आंवला..........................
फायदे
- विटामिन सी से भरपूर आंवला स्किन और बालों के लिए अच्छा है। यह एसिडिटी के अलावा सर्दी-जुकाम से भी राहत दिलाता है।
- इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। शुगर के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद है।
- यह जख्म भरने में भी मददगार है। जॉन्डिस के मरीजों के लिए खासतौर पर फायदेमंद।

कितना खाएं: रोजाना 1-2 आंवला तक खा सकते हैं।

कैसे खाएं: आंवले का जूस ले सकते हैं। अचार, चटनी या कच्चा आंवला थोड़ी काली मिर्च या नमक के साथ खा सकते हैं। सब्जी में डाल कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मुरब्बे का खास फायदा नहीं क्योंकि इसमें चीनी काफी ज्यादा होती है।

7. बेरी..........................
- हमारे देश में पाई जाने वाली बेरीज में खास हैं: जामुन, स्ट्रॉबरी, मलबरी (शहतूत), अंगूर, रसभरी, करौंदा आदि। वैसे, आजकल ब्लूबरी, क्रैनबरी आदि भी मिलने लगी हैं।
- ज्यादातर बेरीज में मैग्नीज, विटामिन सी, विटामिन के और फाइबर भरपूर होता है।
- अंगूर को छोड़ बाकी बेरीज़ को डायबीटीज के मरीजों के लिए काफी अच्छा माना जाता है।
- इनमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट से स्किन में चमक आती है। कैंसर से बचाने और दिल की बीमारियों से लड़ने में भी मददगार।

कितनी खाएं: हमें दिन भर में 200 ग्राम तक फल खाने चाहिए। ऐसे में तय मात्रा में दूसरे फलों के साथ एक छोटी कटोरी तक बेरी खा सकते हैं।

कैसे खाएं: दिन में कभी भी खा सकते हैं। हां, किसी भी फल को खाने और खाना खाने के बीच करीब घंटे भर का फासला जरूर होना चाहिए।

8. स्प्राउट्स..........................
- फल और कच्ची सब्जियों से 100 गुना ज्यादा एंजाइम्स दालों (मूंग, चना, लोबिया, राजमा, गेहूं आदि) को अंकुरित करने पर मिलते हैं। साथ ही, इनमें फाइबर, विटामिन सी आदि की मात्रा भी बढ़ जाती है।
- दालों को अंकुरित करने से विटामिन बी, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और विटामिन ई की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है।
- इनमें एंटी-ऑक्सिडेंट ज्यादा होते हैं, जोकि हमारे डीएनए को होने वाले नुकसान को कम करते हैं। यह हमारे खून को साफ कर शरीर को डीटॉक्स करता है।
- ये मेटाबॉलिज़म को बढ़ाते हैं और एक बार खाने पर काफी देर तक पेट भरा होने का अहसास कराते हैं।

कितना खाएं: दिन में 1 छोटी कटोरी (लगभग 150 ग्राम) तक खा सकते हैं।

कैसे खाएं: स्टीम कर सकते हैं। स्नैक्स की तरह चाट बनाकर खा सकते हैं। सलाद, सैंडविच, पोहा आदि में भी मिला सकते हैं।

9. मखाना..........................
- मखाने में प्रोटीन, मैग्नीज, पोटैशियम, जिंक, मैग्नीशियम, फाइबर और आयरन अच्छी मात्रा में होता है और फैट बिल्कुल नहीं होता।
- ज्यादा पोटैशियम और कम सोडियम की वजह से यह हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। मन को शांत कर नींद लाने में यह मदद करता है।
- इसमें मौजूद मैग्नीशियम और फोलेट खून के दौरे को बेहतर बनाकर दिल की बीमारियों का खतरा कम करता है।
-ज्यादा फाइबर और कम फैट होने से यह वजन कम करने में मददगार है। कैल्शियम ज्यादा होने से यह हड्डियों के लिए भी फायदेमंद है।

कितना खाएं: 1 सर्विंग यानी 12-15 मखाने ले सकते हैं।

कैसे खाएं: स्नैक्स की तरह खा सकते हैं। चाहें तो आधा चम्मच देसी घी में भूनकर खा सकते हैं। लेकिन तले नहीं और न ही नमक ज्यादा डालें।

10. लहसुन..........................
फायदे
- मैग्नीज, विटामिन सी, बी6, फाइबर, कैल्शियम, आयरन अच्छी मात्रा में होता है लहसुन में।
- इसमें मौजूद एलिसिन कंपाउंड कॉलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है।
- यह जोड़ों के दर्द को कम करने और खून साफ करने में मदद करता है। स्किन और बालों को भी बेहतर बनाता है।
- बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन कम करता है। यह कैंसर से भी बचाता है।

कितना खाएं: रोजाना 3-4 कली खा सकते हैं। 4 से ज्यादा खाने से शरीर में गर्मी हो सकती है।

कैसे खाएं: कूटकर या कच्चा चबाकर खाएं। लहसुन को काटकर कुछ मिनट छोड़ने से इसके एंजाइम ज्यादा ऐक्टिव हो जाते हैं। फिर खाएं। मुंह की बदबू से राहत के लिए खाने के बाद इलायची या सौंफ खा सकते हैं।

11. हल्दी..........................
फायदे
- विटामिन ए व सी के अलावा मैग्नीज भी काफी मात्रा में होता है हल्दी में।
- यह कैंसर से लड़ने और ट्यूमर सेल्स को ठीक करने के अलावा दिमाग से जुड़ी बीमारियों में भी फायदेमंद है।
- हल्दी में मौजूद कर्कुमिन एंटी-बायोटिक और एंटी-इन्फ्लेमेटरी है इसलिए यह सूजन, दर्द और चोट में राहत पहुंचाती है।
- शुगर लेवल कंट्रोल करने के अलावा यह जोड़ों का दर्द और गैस भी कम करती है।

कितनी खाएं: रोजाना करीब आधा छोटा चम्मच तक ले सकते हैं।

कैसे खाएं: पाउडर या गांठ, कोई भी ले सकते हैं। वैसे कच्ची (अंबा) हल्दी लेना बेहतर है। हल्दी चिकनाई में अच्छी तरह जज्ब होती है इसलिए दूध में डालकर लेना बेहतर है।

12. दही..........................
फायदे
- दही में कुदरती प्रोबायोटिक्स (गुड बैक्टीरिया)प्रोटीन, विटामिन बी 12, कैल्शियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस होता है।
- यह एंटी-फंगल होता है। यह हमारी हड्डियों और बालों के लिए अच्छा है।
- यह पाचन में मदद करता है और एसिडिटी में भी राहत दिलाता है।
- यह इम्युनिटी बढ़ाकर बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। दिल के लिए भी अच्छा है।

कितना खाएं: हमें दिन भर में आधा किलो तक दूध या दूध से बनी चीजें लेनी चाहिए। ऐसे में लगभग 1-2 कटोरी दही रोजाना खा सकते हैं।

कैसे खाएं: खाने के साथ खा सकते हैं। छाछ या लस्सी बनाकर भी ले सकते हैं। चीनी डालकर न खाएं।

13. चौलाई..........................
फायदे
- व्रत के दौरान चौलाई के लड्डू या खीर खाई जाती है लेकिन चौलाई को हमें अपने रुटीन फूड में शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन, कैल्शियम, एंटी-ऑक्सिडेंट भरपूर होते हैं।
- चौलाई में विटामिन ए काफी ज्यादा होता है, जो हमारी आंखों की रोशनी को बेहतर बनाता है। इसमें मौजूद लाइसिन नामक अमीनो एसिड बालों को बेहतर बनाता है।
- यह कॉलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। साथ ही कैल्शियम अच्छी मात्रा में होने से यह हड्डियों को मजबूत बनाता है।
- इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी शरीर की सूजन को कम करता है। यह खून की कमी को भी दूर करने में मदद करता है।

कितना खाएं: दिन भर में एक कटोरी चौलाई का साग या एक छोटी कटोरी खीर या एक-दो लड्डू खा सकते है।

कैसे खाएं: चौलाई का साग खा सकते हैं। चौलाई के दानों की खीर या लड्डू बनाकर भी खा सकते हैं। हां, उनमें मीठा कम रखें।

14. ग्रीन टी/हर्बल टी..........................
फायदे
- ग्रीन टी में बेस्ट एंटी-ऑक्सिडेंट होते हैं जो बढ़ती उम्र के नुकसान को कम करते हैं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर कई बीमारियों से बचाव करते हैं।
- यह कॉलेस्ट्रॉल घटाने में मदद करती है। इमें मौजूद एल-थियेनाइन नामक कंपाउंड दिमाग को ज्यादा अलर्ट, लेकिन शांत रखता है यानी ब्रेन बेहतर काम करता है।
- इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण इन्फेक्शन का खतरा कम करते हैं। ग्रीन टी मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाकर वजन कम करने में मदद करती है।
- तुलसी, अदरक, लौंग, दालचीनी आदि को मिलाकर पानी में उबालकर हर्बल टी तैयार कर सकते हैं। वह भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।

कितनी पिएं: दिन में 2-3 कप तक पी सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा न पिएं क्योंकि ज्यादा मात्रा में कैफीन लेने से इसकी लत तो लगती ही है, शरीर में कैल्शियम ज्यादा जज्ब नहीं हो पाता। वैसे, हर्बल टी के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं हैं।

कैसे पिएं: बिना दूध और चीनी के पीना बेहतर है। खाने से साथ न पिएं।

15. ब्रोकली..........................
फायदे
- ब्रोकली यानी हरी गोभी में एंटी-ऑक्सिडेंट्स के साथ पोटैशियम, फाइबर, विटामिन ए, बी और सी होते हैं।
- इसमें मौजूद सेलिनियम कैंसर से लड़ने में मददगार है तो फोलिक एसिड खून की कमी दूर करता है।
- बालों और हड्डी के साथ-साथ पाचन के लिए भी अच्छी है ब्रोकली।
- शुगर कंट्रोल करने और दिल को दुरुस्त रखने में करती है मदद।

कितनी खाएं: हमें दिन भर में 400-500 ग्राम तक सब्जियां खानी चाहिए। वैरायटी का ध्यान रखते हुए बाकी सब्जियों के साथ एक छोटी कटोरी तक ब्रोकली ले सकते हैं।

कैसे खाएं: कच्चा, स्टीम करके या उबाल कर सलाद, सब्जी या ग्रीन कबाब/कटलेट आदि के रूप में खा सकते हैं। हां, गुनगुने पानी में हल्का नमक डालकर पहले अच्छी तरह इसे धो जरूर लें। थायरॉयड के मरीजों को यह कम मात्रा में खानी चाहिए।

नोट: इनके अलावा और भी सुपर फूड्स हैं। सुपर फूड का फायदा तभी है, जब हम इन्हें बैलेंस्ड डाइट के साथ लें। ऐसा न हो कि इनके चक्कर में हम बैलेंस्ड डाइट न लें। साथ ही, आपके इलाके में जो फूड आइटम आसानी से उपलब्ध हैं, उन्हें ज्यादा लें। सुपर फूड भी बदल-बदल कर खाएं ताकि सभी का फायदा शरीर को मिल सके।

एक्सपर्ट पैनल
डॉ. अनूप मिश्रा, चेयरमैन, फोर्टिस सी-डॉक
डॉ. शिखा शर्मा, न्यूट्री-डाइट एक्सपर्ट
परमीत कौर, चीफ डाइटीशन, एम्स
नीलांजना सिंह, सीनियर डाइट एक्सपर्ट
साभार NBT

Wednesday, March 6, 2019

कैंसर मरीजों के भगवान हैं डॉ येशी

कैंसर मरीजों के भगवान हैं 'शरणार्थी' डॉ. येशी, तिब्बती पद्धति से करते हैं इलाज, देश-विदेश से जुटती है भीड़ #टटकाखबर

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में डॉ. येशी धोंडेन जानलेवा कैंसर का तिब्बती चिकित्सा पद्धति से इलाज करते हैं। शहर में स्थित उनके तिब्बती हर्बल क्लिनिक पर कैंसर मरीजों की भारी भीड़ जुटती है। यहां कैंसर से पीड़ित लोगों को बहुत ही कम खर्च में दवाइयां दी जाती हैं। इस वजह से तिब्बती हर्बल क्लिनिक पर हर रोज सुबह 5 बजे से ही ट्रीटमेंट कराने आए मरीजों की लंबी लाइन लगती है। डॉ. येशी की इस क्लिनिक में देश ही नहीं विदेशों से भी मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। येशी बहुत ही कम पैसे में मरीजों को एक महीने की दवा उपलब्ध कराते हैं।

डॉ. येशी तिब्बत के लोका क्षेत्र के मूलनिवासी हैं। उनका परिवार तिब्बत की बहुप्रचलित चिकित्सा के लिए जाना जाता है। उन्होंने 20 साल की उम्र में ही इस चिकित्सा का प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया था। भारत में निर्वासन का जीवन व्यतीत कर रहे येशी 14वें दलाई लामा के निजी चिकित्सक भी रह चुके हैं। उन्होंने साल 1961 से 1980 तक दलाई लामा की निजी चिकित्सा की थी। उन्हीं की देख-रेख में इन्होंने धर्मशाला में तिब्बतियन मेडिकल ऐंड ऐस्ट्रो इंस्टिट्यूट की स्थापना कर इस पद्धति को आगे बढ़ाया। दलाई लामा के साथ रहते हुए येशी ने तिब्बती चिकित्सा पद्धति में शोध करने के अलावा कैंसर जैसे असाध्य रोग के उपचार में भी प्रवीणता हासिल की।

तिब्बतियन मेडिकल ऐंड ऐस्ट्रो इंस्टिट्यूट से रिटायर होने के बाद डॉ. येशी धोंडेन ने साल 1980 में मैक्लोडगंज में तिब्बतियन हर्बल क्लिनिक से निजी क्लिनिक की शुरूआत की। यहां वह रोगी के पेशाब और नब्ज का अध्ययन कर उनके रोगों की जांच कर तिब्बती आयुर्वेदिक दवाइयां देते हैं। वह 23 मार्च 1961 को तिब्बत से भारत में शरणार्थी बनकर आए थे। उनके क्लिनिक में ट्रीटमेंट कराने के लिए आए मरीज टोकन लेने के लिए सुबह 5 बजे से ही लाइन लगाते हैं। टोकन मिलने के तीन दिन बाद डॉक्टर येशी मरीज से मिलते हैं। वह एक दिन में केवल 45 मरीजों की ही जांच करते हैं।

93 वर्षीय डॉ. येशी धोंडेन द्वारा किए गए शोधपत्रों को दुनिया की सबसे बेहतर मॉर्डन मेडिकल साइंस, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने भी मान्यता दी है। बौद्ध भिक्षु डॉ. येशी को भारत सरकार ने उनकी तिब्बती आयुर्वेद पद्धति में हासिल की गई उपलब्धियों के चलते पदमश्री पुरस्कार सम्मानित किया गया है।

Tuesday, March 5, 2019

अच्छे और कथित बुद्दिजीवियों का ढोंग

राहुल राज
"अच्छे लोग हिंसा या हिंसा के किसी भी संवाद से दूर रहते हैं| अच्छे लोग आतंकवादी हमलों पर दुःख व्यक्त करते हैं, गाँधी के सन्देश लिखते हैं, फैज़ की नज़्म पढ़ते हैं, चैनल बदल कर गुस्सा कम करते हैं, और फिर सो जाते हैं| अच्छे लोग मोदी की हंसी में भी युद्ध के विषैले गीत सुन लेते हैं और अच्छे लोग जैश-ए-मोहम्मद को पनाह देने वाले इमरान खान में statesmanship देख लेते हैं| अच्छे लोगों में अच्छा दिखने की इतनी होड़ लगी रहती है कि हिन्दुस्तान के सौ लोगों का पोस्ट पढ़कर उन्हें पूरा हिन्दुस्तान खून का प्यासा दिखने लगता है और पकिस्तान के दो पोस्ट पढ़कर पूरा पाकिस्तान उन्हें शान्ति की जन्म भूमि दिखने लगती है|

अच्छे लोगों का मानना है कि भारत को आतंकवादी कैम्पों पर हमला करने के बाद जश्न नहीं मनाना चाहिए था क्यूंकि इससे शान्ति की प्रक्रिया भंग होती है| अच्छे लोग अच्छा सच सुनना चाहते हैं, उन्हें बुरा सच उचित नहीं लगता| हर रोज़ जब हम शांति की अच्छी बातें लिखकर सो रहे होते हैं तो सीमा पर आतंकवादी हमलों में कोई न कोई जवान शहीद होता रहता है| हर रोज़ जब हम फैज़ और नेरुदा की कविताएं पढ़कर ख़ुद को अच्छा इंसान मानते रहते हैं तो उस समय कुछ निर्दोष लोग हमेशा के लिए शांत कर दिए जाते हैं| शान्ति और कविताएँ उन्हें भी पसंद होती हैं, लेकिन जब उनके सामने आतंकवादी बन्दूक लेकर खड़ा रहता है, तब उनके पास बड़ी बड़ी philosophical बातें करने का convenience नहीं होता|

अच्छे लोग कहते हैं कि केवल प्रेम और संवाद से हिंसा रोकी जा सकती है| अच्छे लोग आपको ये नहीं सुनना चाहते हैं कि कश्मीर को per-capita के मुताबिक़ सबसे ज्यादा फण्ड मिलता है| इसमें education और medical facilities पर बहुत ध्यान दिया जाता है| अच्छे लोग ये नहीं सुनना चाहते हैं कि जब कोई जवान आतंकवादी को घेरने जाता है तो उसपर पत्थर बरसाए जाते हैं| अच्छे लोग अच्छी बातें लिख कर समस्या हल कर लेते हैं| जी बिलकुल युद्ध से गरीबी और तबाही फैलती है| उससे आम आदमी परेशान होता है| आम आदमी के पास पहले से कम परेशानियाँ नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि आतंकवादी हमलों में सेना को शांति से मर जाना चाहिए ताकि आम आदमी शान्ति की कविता लिख पाए| एक गंभीर समस्या को बस इसलिए तो नहीं भूल जाना चाहिए क्यूंकि कुछ गंभीर समस्याएं है और भी हैं|

अच्छे लोग ये तो बोल देते हैं कि सेना की इतनी फ़िक्र है तो सीमा पर लड़ने क्यों नहीं चले जाते, लेकिन कभी ये नहीं बोलते कि मैं सीमा पर शान्ति का सन्देश लेकर जाऊंगा|

प्रश्न पूछना अच्छा है| आप पूछते रहिये, लेकिन जवाब यदि कड़वा हो तो कान बंद मत कीजियेगा|"


Thursday, September 6, 2018

SC/ST एक्ट पर अध्यादेश !! - मोदी सरकार की ताबूत में आखिरी कील


मै सामान्यतया राजनीतिक भविष्यवाणी नहीं करता लेकिन आज सीधे तौर पर कह रहा हूँ कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर SC/ST एक्ट पर अध्यादेश लानें का फैसला मोदी सरकार की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा .. इतिहास गवाह है कि जब शाहबानो प्रकरण पर 
राजीव गाँधी ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा था उसके बाद कांग्रेस देश में कभी उबर नहीं पाई . वीपी सिंह ने भी मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करके पिछड़ों और दलितों का मसीहा बनने की कोशिश की थी ,लेकिन उनका राजनीतिक क्या हश्र हुआ सब जानतें है  ,मंडल के बाद वीपी सिंह और उनकी राजनीती दोनों मिट गए.
कुछ चीजों के लिए मोदी सरकार को माफ़ नहीं किया जा सकता है ,न कभी माफ करना चाहिए,
पिछले दिनों अटल जी के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था तो वहाँ पर मेरे बगल में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह , अश्विनी चौबे और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बैठे थे, SC/ST एक्ट पर अध्यादेश पर मेरे मन में काफ़ी गुस्सा पहले से था इसलिए मैंने इसका जिक्र गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे जी से करते हुए कहा कि सरकार ने ये जो किया है ठीक नही है , इसका बड़ा खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ेगा , मेरा ऐसा कहते ही अचानक पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हमलावर होते हुए मुझसे बोले कि तुम्हें पता ही क्या है , मोदी दलितों के मसीहा है , बोलें कि मैं हरिजन हूँ और देश मे हमारी संख्या ज्यादा है ऐसे में हमारे हित में फैसला होगा, मैंने प्रतिवाद करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट पर सिर्फ यही कहा था कि निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए , बिना जाँच के गिरफ्तारी गलत है आदि तो धर्मेंद्र प्रधान बोलें कि सुप्रीम कोर्ट को कुछ पता नही , वो ऐसे ही फैसले देती है !! मैंने कहा कि सिर्फ आरोप के आधार पर आप किसी को कैसे गिरफ्तार कर सकतें है ,ये तो न्याय की बुनियादी अवधारणा के भी खिलाफ है, मैं उनसे लगातार प्रतिवाद करता रहा और वो काफी गुस्से में बोलतें रहें , जबकि इस दौरान गिरिराज और चौबे जी कुछ नही बोले , माहौल बड़ा अजीब हो गया ,कुछ लोगो के समझाने पर मैं थोड़ी देर के लिए चुप तो हो गया लेकिन मेरे अंदर गुस्से की ज्वाला धधक रही थी , कुछ समय बाद पता नहीं मुझे क्या सूझा और मैं अपने सीट से उठकर धर्मेंद्र प्रधान के पास जाकर उनके कान में बोला कि आप कुछ भी कर लीजिए यूपी में दलितों के वोट बीजेपी को नहीं मिलेंगे और ये फैसला बीजेपी की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा..मैंने उसी दिन इस विषय पर उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय को कहा था कि SC/ST एक्ट पर आप लोग आग से खेल रहें है ये समूची भाजपा को जला देगा ..
पिछले सिर्फ १ महीनें में मोदी सरकार ने SC/ST एक्ट पर अध्यादेश लाने के अलावा , SC/ST को पदोन्नति में आरक्षण ,और क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए केंद्र सरकार कह रही है कि सिर्फ “जाति “ ही पिछड़ेपन का आधार है (नीचे न्यूज पढ़ लीजिये ) मतलब आप चाहे कितने भी अमीर हो ,प्रभावशाली हो अगर SC/ST हैं तो आपको आरक्षण की सुविधा के साथ पदोन्नति में भी आरक्षण मिलेगा ,केंद्र की इसी सरकार ने अब विश्वविद्यालयों में विभागों के स्तर पर भी आरक्षण देनें के फैसला किया है जबकि पहले यूनिवर्सिटी स्तर पर आरक्षण लागू था (न्यूज पढ़ें )..
मतलब इस सरकार नें मानवीयता और नैतिकता की सारी हदें पार कर दी SC/ST को फायदा पहुँचाने के लिए ,उनके तुष्टीकरण के लिए (इतना तो इतिहास में किसी दल ने आजतक नहीं किया )..लेकिन आप डायरी में लिख लीजिये इतना करने के बाद भी इन्हें SC/ST का वोट कतई नहीं मिलने वाला ,ये अगला लोकसभा चुनाव बुरी तरह से हारने वालें हैं ..सवर्णों के वोट से तो ये पूरी तरह से हाथ धो चुके है .
देश की जनता ने इस मोदी /बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया ,ग्राम प्रधान ,विधायक सांसद ,मुख्यमंत्री ,प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति सब के सब बीजेपी के होते हुए भी इन्होने कुछ नहीं किया .. काश इस सरकार ने राम मंदिर निर्माण ,धारा ३७० ,कॉमन सिविल कोर्ट के  अपने अजेंडे के लिए आध्यादेश लाया होता.
यह इस देश की मिट्टी ,इस इन्द्रप्रस्थ का दुर्भाग्य है कि सत्ता में आतें ही लोग अपनी जड़ें भूल जातें है .इस देश का समूचा हिंदू जनमानस ठगा महसूस कर रहा है .कथित सेकुलरिज्म से त्रस्त इस देश की बहुसंख्यक जनता ने मोदी को मसीहा माना लेकिन ये भी वही करने लगे जो कांग्रेस या बाकी दल करतें आयें है ..बीजेपी और मोदी जी आप ये याद रखना कि आने वाली सदियाँ और इतिहास आपको कभी माफ़ नहीं करेगा .. 


Tuesday, February 27, 2018

श्रीमती जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

शशांक द्विवेदी 
आज हमारी श्रीमती जी का जन्मदिन है ,सबसे पहले तो उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ,आप हमेशा ऐसे ही डायनामिक और ख़ुशहाल बनी रहो यही प्रार्थना है ईश्वर से ..सामान्यतया हम दोनों का मिज़ाज बिल्कुल अलग है फिर भी लगभग 15 साल से साथ है (9 साल शादी के बाद और 6 साल शादी के पहले ), मिज़ाज के साथ साथ खाने -पीने की पसंद भी बिल्कुल अलग है . ,प्रियंका मुझसे ज्यादा डायनामिक और दुनियादारी के मामलों में समझदार है ,मै ज्यादा लिबरल हूँ जबकि ये उतनी नही है, तर्क और बहस तो खैर हमारी जिंदगी का हिस्सा ही है ,मुझसे खूब लड़ने के बाद अक्सर कवितायेँ लिखने बैठ जाती है , इन्होने सभी कवितायेँ मुझसे लड़ने के बाद ही लिखी है ..लेकिन सच्चाई यह है कि पूरे घर और बच्चों को इन्होने ही संभाल रखा है ..सबसे खास बात यह है कि देश के कई नामी ज्योतिषियों के मना करने के बाद भी हमने शादी की (प्रेम काल में शादी को लेकर परेशान थे तो उस समय ज्योतिषियों के यहाँ भी चक्कर लगा आये थे ) , प्रियंका विशुद्ध पत्रकार है जबकि मै उनके साथ रहकर इंजीनियर कम पत्रकार हूँ ...मेरे लेखो की आलोचनात्क स्क्रूटनी कर देती है , वर्कप्लेस और टेक्निकल टूडे मैगज़ीन में भी हम साथ है ऐसे में हमेशा इनका नया आइडिया देखने को मिलता है , इनकी वजह से काफ़ी हद तक निश्चिंत रहता हूँ , मोटामोटी मिज़ाज और पसंद अलग होते हुए भी हम एक दुसरे को प्यार करते है ,सम्मान करते है यही वजह है कि हम साथ साथ है ,खुश है ...और हां जब तक रहेंगे खुश ही रहेंगे ....एक बार फिर से प्रियंका को ढेरों बधाइयाँ ....

Wednesday, October 25, 2017

love से ज्यादा महत्वपूर्ण desires है, दिमाग के लिये

मेघा मैत्रैयी
कभी करीब 60 की उम्र के एक आदमी से मुलाकात हुई थी, अस्पताल में इंटर्नशिप के दौरान। बुरी तरह डिप्रेशन में था। काफी सीधा-साधा किस्म का इंसान था जो जिंदगी भर कोई ना कोई जिम्मेदारी उठाता रहा परिवार की, पर अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके सारे रिश्ते खराब क्यों हो गए।

बीवी लड़ती रहती थी, बच्चे उपेक्षा करते थे, रिश्तेदारों में भी कोई वैल्यू नहीं थी। कुल मिला कर वह पनीर की सब्जी में आलू की तरह हो गया, जिसको लोग चुन-बिछ कर अपनी प्लेट में नहीं डालते। बस इसीलिए दुःखी था।

बार -बार बोलता कि मैंने unconditional प्यार किया सबसे पर अब नफरत हो गयी है।

समस्या इस unconditional love के concept में ही है। ये exist ही नहीं करता। पर हम इस बात को समझते ही नहीं है।

एक माँ अपने बच्चे से प्यार करती है क्यूंकि ऐसा करने से उसकी maternal instinct को सन्तुष्टि मिलती है। एक  सैनिक अपने देश के लिये जान दे देता है खुशी-खुशी क्योंकि उसका दिमाग उसे बताता है कि वो अगर ऐसा नहीं करेगा तो सन्तुष्ट नहीं होगा। एक इंसान पूरे जीवन दूसरो की सेवा में लगाता है क्यूंकि उसे ऐसा करने से खुशी और सन्तुष्टि मिलती है।

हमें लगता है कि इनका unconditional प्यार और निस्वार्थ भाव है,  इनके कर्मो के पीछे। लेकिन नहीं। दिमाग स्वार्थी होता है, वो आपसे तब तक कोई काम नहीं कराएगा जब तक उसको उस से किसी प्रकार की सन्तुष्टि ना मिले।

उदाहरण के लिए एक ऐसा मरीज जिसके hypothalamus में feeding centre को कोई ऐसी क्षति पहुंच गयी हो कि वह काम करना बंद कर दे, तो उस इंसान को भूख लगेगी ही नहीं। उसका शरीर कमजोर होता जाएगा, वह मरने की कगार पर पहुंच जाएगा पर खायेगा नहीं, क्योंकि दिमाग ने उसे यह बताना बन्द कर दिया है कि खाना उसकी जरूरत है, और जो चीज  आप के दिमाग के हिसाब से आपके भले के लिये जरूरी नहीं है वो आप नहीं करेंगे, भले ही आपकी हालत कितनी भी critical हो जाये।

यही बात प्यार के साथ भी है। हम सिर्फ इसीलिए दुसरो का ख्याल नहीं रखते क्योंकि सामने वाले की जरूरत है, बल्कि हमारे लिये जरूरी है ऐसा करना।

Unconditional love तब होता जब कोई अपना आपको पचास जूते रोज मारे, आपको 3rd डिग्री टार्चर दे ,आपकी जिंदगी में डंडा किये रहे लेकिन तब भी आप उसी दृढ़ता से उससे प्यार करते रहें; अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो इस फालतू कॉन्सेप्ट को भूल जाइये और अपनी वैल्यू create करना सीखिए।

आज गृहणियां कितना भी कर दे, उनकी वैल्यू अक्सर कमाऊं पति से कम होती है परिवार में, क्योंकि ये हर काम जिम्मेदारी समझ कर करती है बेवकूफों की तरफ( yes, they are not निस्वार्थ, they are बेवकूफ)। वो कभी अपने काम का वैल्यू नहीं लेती क्योंकि हमारे सामाजिक ताने - बाने ने यह बात दिमाग में फिट कर दी है कि valuable काम वही है जिसकी कोई कीमत हो नोटों में।

मुझे समाज को देखते हुए यह लगता है कि आपमें से ज्यादातर लोग granted हैं, किसी ना किसी के लिये। तो एहसान ना जताये, घमण्ड ना दिखाये पर अपनी value create करना शुरू करें; क्योंकि दुनिया में कोई नहीं है जो आपसे unconditional love करता है।  love से ज्यादा महत्वपूर्ण desires है, दिमाग के लिये। आप जब तक जरूरत हैं, तभी तक प्यारे हैं। ना तो आपकी गलती है ना आपके उपेक्षा करने वालों की, पर इस नालायक दिमाग के काम करने का तरीका ही  यही है। ☺