Wednesday, April 30, 2014

देश के साथ गद्दारी करने से बेहतर है अपनी कौम के साथ गद्दारी करना

मेरे एक मुस्लिम मित्र है ,बेहद सज्जन व्यक्ति है राजनीतिक विषयों पर उनसे कभी ज्यादा चर्चा नहीं हुई ,न वो करना पसंद करते लेकिन इस बार उन्होंने अपने मतदान के विषय में दिलचस्प वाकया बताया ..

उन्होंने कहा कि मतदान की पूर्व संध्या पर हमारे मुस्लिम बहुल मोहल्ले में  और घर में यह निश्चित हो गया था कि भाजपा को हराने के लिए वोट करना है ,जो प्रत्याशी भाजपा को मजबूत टक्कर दे रहा है सिर्फ उसी को वोट देना है चाहे वो किसी भी दल का हो ,मतलब हर हाल में भाजपा को हराने के लिए वोट देना है इसलिए काँग्रेस को वोट देना तय हुआ लेकिन घर /समाज के इस निर्णय से मेरे मन में पूरी रात भारी उथल पुथल रही कि हम किसी को जिताने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ भाजपा को हराने के लिए वोट करने वाले है .बचपन से यह देखता आ रहा हूँ कि मुस्लिम कौम (95  फीसदी) भाजपा के हमेशा खिलाफ रही है कभी  90 के दशक में मंदिर -मस्जिद के नाम पर मुस्लिम खौफजदा थे /या किये जा रहें थे  और अब  2002 के बाद गुजरात दंगो के नाम पर ..कुल मिलाकर दूसरी पार्टी के नेताओं ने अपनी चुनावी कैम्पेन में हमेशा मुस्लिमों को भाजपा से जम कर डराया ... खैर माहौल का असर मुझ पर भी था और मै भी भाजपा को पसंद नहीं करता था ..इन सब के बीच मतदान करने की बारी आयी तो पिछले कई घंटो से मेरे मन ने काँग्रेस को लेकर भारी उथल -पुथल भी थी ,मै "काँग्रेस "को किसी भी हालत में दिल से स्वीकार नहीं कर पा रहा था ,मेरी नजर में काँग्रेस को वोट देने का मतलब अपनी आत्मा और अपने देश के साथ गद्दारी करना था क्योंकि कांग्रेस ने अपने महा भ्रष्टाचार से इस देश को लूट लिया था  ,काँग्रेस ने सिवाए वादों के हमारी कौम को भी क्या दिया है ?सभी पार्टियों ने हमें सिर एक ही चीज दी है वो है सिर्फ  भाजपा से डर /भाजपा से नफरत ,नोटा का बटन मै दबाना नहीं चाहता था ..इसी उहापोह में मैंने सोचा कि हर बार भाजपा के खिलाफ वोट देते है चलो  इस बार भाजपा को वोट दे कर देखते है ,मोदी को भी आजमा कर देखते है ,मोदी हमें देश से थोड़ी निकाल देगा ,देखते है वो क्या करता है ?क्या करेगा ..इसी बात को सोचते सोचते मैंने ईवीएम मशीन में कमल का बटन दबा दिया ..वोट देने के बाद भी सोचता रहा/समझता रहा /खुद को समझाता रहा कि क्या कर दिया लेकिन बाद में मैंने अपने आप को दृढ करते हुए सोचा कि देश के साथ गद्दारी करने से बेहतर है अपनी कौम के साथ गद्दारी करना ..मैंने तो अपना वोट दे दिया अब जिसे जो सोचना है सोचे या कहे ...vote for change

Monday, April 21, 2014

एक औरत के दिल छू देने वाले प्रश्न -एक शानदार कविता

देह मेरी ,
हल्दी तुम्हारे नाम की ।
हथेली मेरी ,
मेहंदी तुम्हारे नाम की ।
सिर मेरा ,
चुनरी तुम्हारे नाम की ।
मांग मेरी ,
सिन्दूर तुम्हारे नाम का ।
माथा मेरा ,
बिंदिया तुम्हारे नाम की ।
नाक मेरी ,
नथनी तुम्हारे नाम की ।
गला मेरा ,
मंगलसूत्र तुम्हारे नाम का ।
कलाई मेरी ,
चूड़ियाँ तुम्हारे नाम की ।
पाँव मेरे ,
महावर तुम्हारे नाम की ।
उंगलियाँ मेरी ,
बिछुए तुम्हारे नाम के ।
बड़ों की चरण-वंदना
मै करूँ ,
और 'सदा-सुहागन' का आशीष
तुम्हारे नाम का ।
और तो और -
करवाचौथ/बड़मावस के व्रत भी
तुम्हारे नाम के ।
यहाँ तक कि
कोख मेरी/ खून मेरा/ दूध मेरा,
और बच्चा ?
बच्चा तुम्हारे नाम का ।
घर के दरवाज़े पर लगी
'नेम-प्लेट' तुम्हारे नाम की ।
और तो और -
मेरे अपने नाम के सम्मुख
लिखा गोत्र भी मेरा नहीं,
तुम्हारे नाम का ।
सब कुछ तो
तुम्हारे नाम का... नम्रता से पूछती हूँ :
आखिर तुम्हारे पास...
क्या है मेरे नाम का?
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देव भारती

सुंदरता का कोई रंग नहीं होता


(28 फरवरी 2014 को ऑस्कर नोमिनेशन के बाद लुपिता योंगओ द्वारा दिए गए ‘ब्लैक ब्यूटी’ वक्तव्य का एक अंश)

मैं इस अवसर पर सुंदरता के बारे में कुछ कहना चाहूंगी. मुख्यतः ब्लैक ब्यूटी पर. अवार्ड मिलने से ठीक पहले मुझे एक मेल मिला है जिसकी कुछ पंक्तियां मैं आप सबसे शेयर कर रही हूं. ‘डीयर लुपिता, हॉलीवुड में रातोंरात सफलतम स्टार बन जाने वाली तुम एक ब्लैक लकी हो. मैं अपनी काली त्वचा को सुंदर बनाने के लिए गोरेपन वाली एक क्रीम खरीदने ही जा रही थी कि तभी तुम्हारे नाम की घोषणा हुई और तुमने मुझे कालेपन की हीनता से बचा लिया.’ इसे पढ़ते ही मेरा मन लहूलुहान हो गया. मैनें कभी नहीं सोचा था कि स्कूल की बाहरी दुनिया में किया गया मेरा पहला काम इतना प्रभावी होगा, जिसकी छवि न सिर्फ मेरे लिए बल्कि उन सभी स्त्रियों के लिए उम्मीद की किरण बन जाएगी जो मेरी तरह काली हैं.

Tuesday, March 11, 2014

दलित चिंतन का ढोंग

शशांक द्विवेदी 
भाई ये दलित चिंतन ,दलित चिंतक ,दलित लेखक कौन लोग होते है ?क्या दलित ही दलित चिंतन और सवर्ण ,सवर्ण चिंतन कर सकता है मतलब जो जिस जाति का है वो उसी जाति का चिंतन कर सकता है .. अधिकांश जगह दलित चिंतक (नेताओं में ),दलित लेखक (साहित्य में ) देखने को मिलता है . फिर ये सवाल इसलिए दिमाग में आया कि क्या कोई सवर्ण दलित चिंतन नहीं कर सकता क्या ?क्योंकि आजकल जितने भी दलित चिंतक मीडिया या राजनीति में दिख रहें है वो तो सबसे फर्जी है और दलितों को मुर्ख बना रहें है ..इन लोगों से बड़ा अवसरवादी और ब्राह्मणवादी तो मैंने कभी देखा ही नहीं ..मायावती तो पहले ही महाभ्रष्ट ,सवर्णों और ब्राह्मणवाद की बाँहों में है ,रामविलास को को दलितों से कोई मतलब नहीं बल्कि सिर्फ कुर्सी चाहिए ,उदितराज जैसे सैकड़ों कथित दलित नेता पहले ही पूंजीवादी व्यवस्था का अंग बन चुके है  ...इतने सब फर्जी,दलबदलुओं ,महाभ्रष्ट लोगों को देखकर भी दलित समाज इन्हें दलित चिंतक ,दलित नेता कहता है ...कमाल है ... 

Monday, February 24, 2014

मनोविज्ञान की किताब में पत्नी ,प्रेमिका ...

किसी ने अपनी मनोविज्ञान की किताब में लिखा है की हर आदमी की जिंदगी में एक पत्नी आती है ,,दो प्रेमिकायें आती है और तीन औरतो से वो बाजार में पैसा देकर सबंध बनाता है ।(कहीं पढ़ा )

Wednesday, February 19, 2014

शादी की पाँचवी सालगिरह..

शशांक -प्रियंका 
आज मेरी और प्रियंका की शादी की पाँचवी सालगिरह है .ये पाँच साल हँसते –खेलते ,लड़ते –झगड़ते ,तारीफों-शिकायतों के बीच ऐसे गुजरे की पता ही नहीं चला .सालगिरह तो पाँचवी है लेकिन प्रियंका का साथ पिछले 10 साल से है .प्रेमी से पति बनने का सफर काफी रोमांचक ,मजेदार ,चुनौतीपूर्ण ,प्रेम भरा और मस्ती भरा रहा अब सोचता हूँ कि अच्छा हुआ जो इसमें 5 साल लग गये . हमारी कहानी पूरी फ़िल्मी ही थी सोचा नहीं था कि लेखन/पत्रकारिता के शौक से ही जीवनसाथी मिलेगा ,इस तरह से प्रेम –विवाह होगा. लेकिन जो होता है अच्छे के लिए ही होता है ईश्वर के पास हमारे लिए बेहतर प्लान होता है. वास्तव में पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही खूबसरत होता है .एक दूसरे के सहयोग से दुनियाँ बदली जा सकती है ,कुछ भी हासिल किया जा सकता है ..
ऐसा नहीं कि मुझे चाँद चाहिए 
मुझको तुम्हारे प्यार में विश्वास चाहिए 
न की कभी भी ख्वाहिश मैंने सितारों की
मुझे तो बस ख्वाबों में तुम्हारा दीदार चाहिए
ईश्वर करे हमारा ये रिश्ता हमेशा यू ही मजबूत बना रहें ..आप सभी मित्रों की /बड़ों के आशीर्वाद /शुभकामनायों की आकांक्षा हमेशा बनी रहेगी ...

Tuesday, February 18, 2014

कश्मीर में भारत विरोध का स्वर

शशांक द्विवेदी
पिछले हफ्ते जम्मू -कश्मीर प्रवास के दौरान मैंने कई हिंदू -मुस्लिम युवाओं से विभिन्न मुद्दों पर लंबी  बात की ,उनसे बात करके कई बातें ऐसी आई जो मै पहली बार सुन रहा था .एक मुस्लिम नवयुवक(काफी पढ़ा -लिखा और ३ सरकारी नौकरी छोड़कर अब एक स्कूल का मालिक ) ने बातचीत के दौरान कहा कि कश्मीर के अधिकांश लोग अपना अलग देश चाहते है ,भारत और यहाँ की आर्मी के बारे में उसकी राय काफी खराब थी , भारत को हिंदू बहुल देश मानने की वजह से उसने कहा कि इस्लामिक  आधार पर पाकिस्तान हमारे दिल के ज्यादा नजदीक है..उस युवा ने बिना किसी लागलपेट के मेरे हर सवाल का जवाब बिना कोई झूठ बोले बहुत संजीदगी से  दिया मसलन उसने कहा कि अधिकांश कश्मीरी आर्मी से बेहद नफरत करते है और अलगाववादी आतंकवादियों का समर्थन करते है उन्हें खाना देते है ,पनाह देते है यहाँ तक कि मरने के बाद उनसे सहानुभूति भी जताते है ,अधिकांश कश्मीरी हमेशा पाकिस्तान से लगाव महसूस करते हुए उसे हर जगह जीतते हुए देखना चाहते है ,उसने खुद कहा कि खेल के मैदान में भी हम पाकिस्तान को ही जीतते देखना चाहते है .उस युवा ने अपने दिल की हर बात बहुत ईमानदारी से रखी ,उसने ये नहीं सोचा कि मुझे उसकी बात अच्छी लगेगी या बुरी बल्कि उसने वही कहा जो उसे सच लग रहा था .देश के नेताओं पर उसकी पसंद के बारे में पूछने पर उसने कहा कि अरविंद केजरीवाल उसे बहुत पसंद है .मैंने चौक्तें हुए इसका कारण पुछा तो उसने कहा कि केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनते ही हमारा अलग देश बन जाएगा या हम पाकिस्तान में मिल जायेगें क्योंकि उनकी पार्टी के नेता जनमत संग्रह का समर्थन करते है .इस बात पर मैंने उससे कहा कि ऐसा नहीं है केजरीवाल ऐसा नहीं सोचते है और ये संभव नहीं है ,ये कभी नहीं होगा तो उसने कहा कि जरुर होगा !! उसने कहा कि अधिकांश कश्मीरी नरेंद्र मोदी से सख्त नफरत करते है क्योंकि वो हिंदू वादी नेता है ..नवयुवकों से बातचीत के दौरान मुझे जम्मू –कश्मीर में हिंदू –मुस्लिम खाई साफ़ तौर पर नजर आई जम्मू का लगभग हर हिंदू नरेंद्र मोदी के पक्ष में लामबंद दिख वहीं मुस्लिम इसके जबर्दस्त विरोध में दिखे ...

खैर बातचीत के दौरान जिसने जो भी कहा लेकिन सबने हम जैसे टूरिस्ट को भगवान कहा ,सब लोगों ने कहा कि आप लोगों की वजह से ही हम जिंदा है ..लगभग सभी लोगों ने तहेदिल से मेरा स्वागत किया ,अच्छे से बात की ,सम्मान किया ,यात्रा के दौरान खूब मदत की ...लेकिन जम्मू –कश्मीर यात्रा के दौरान की गई बातचीत ने मेरे मन –मष्तिष्क में काफी गहरा असर डाला ,सोचता रहा कि क्यों कश्मीर के लोग आज भी भारत को अपना नहीं पाए ,क्यों आज तक भारत को अपना देश नहीं मान पायें ...