Thursday, September 18, 2014

शशांक द्विवेदी को सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान

ABP News द्वारा सम्मान  

कभी सोचा नहीं था कि ब्लाँगिंग /वेबसाइट के लिए मुझे कोई पुरस्कार मिलेगा .लेकिन कल जब ABP News ने इसके लिए सम्मानित किया तो बहुत खुशी हुई .दो साल पहले जब ब्लागिंग शुरू की तो इसके बारे में कुछ खास नहीं पता था आज भी ज्यादा कुछ नहीं पता है ...मेरा ब्लाँग/ वेबसाइट अतिसाधारण है लेकिन मुझे विज्ञान लेखन से प्यार है और इसे मैंने इसी उद्देश्य से बनाया कि रोज कुछ न कुछ अच्छी जानकारी इसमें अपडेट करके आप लोगों से शेयर कर सकू ..आम आदमी को विज्ञान और तकनीक के बारे में जानकारी उसकी अपनी भाषा में दे सकू .. हिंदी में विज्ञान और तकनीक से सम्बंधित गुणवत्तापूर्ण कंटेंट की काफी कमी है .जबकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को उनकी  भाषा में ही विज्ञान कंटेंट देकर उनकी रूचि बढ़ाई जा सकती है .इस समस्या को ध्यान में रखते हुए ही विज्ञानपीडिया .कॉम जैसा प्रयोग किया गया ,जिसको आशातीत सफलता मिल भी रही है .आगे भी इसे और अच्छा बनाने की कोशिश करूँगा जिसमें आप लोगों का भी सहयोग अपेक्षित है .अगर आप मित्रों के पास विज्ञान /तकनीक से जुड़ी कोई खबर ,लेख हो तो वो आप मेरी वेबसाइट के लिए सहर्ष भेज सकते है .मेरे इस पुरस्कार में आप सभी मित्रों/पाठकों का भी  ही बहुत योगदान है क्योंकि आप लोगों के प्रोत्साहन ,तारीफ़ और आलोचना की वजह से ही मै कुछ अच्छा कर पा रहा हूँ इसलिए आप सभी के सहयोग और प्यार के लिए मै सदैव आपका आभारी रहूँगा .




 

सम्मानित हुए देश के 10 ब्लॉगर

हिन्दी दिवस पर ABP NEWS के खास कार्यक्रम में सम्मानित हुए देश के 10 ब्लॉगर
हिन्दी दिवस पर एबीपी न्यूज़ ने एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें देश भर के चुनिंदा 10 ब्लॉगरों का सम्मानित किया गया. पुरस्कार के लिए ब्लॉगरों का चयन हमारे चार खास मेहमान सुधीश पचौरी, डॉ. कुमार विश्वास, गीतकार प्रसून जोशी और नीलेश मिश्र ने किया.
दिल्ली के पंकज चतुर्वेदी को पर्यावरण के मुद्दों पर लिखने के लिए सम्मानित किया गया. पंकज पर्यावरण से जुड़े मुद्दे पर लगातार लिखते रहे हैं
http://pankajbooks.blogspot.in  पर आप इनके ब्लॉग को देख सकते हैं.

# दिल्ली के पंकज तिवारी को राजनीतिक मुद्दों पर लिखने के लिए सम्मानित किया गया.

सेंट मार्गरेट इंजीनियरिंग कॉलेज ,नीमराना ,अलवर राजस्थान के शशांक द्विवेदी को विज्ञान के मुद्दे पर लिखने के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉग http://www.vigyanpedia.com  पर पढ़े जा सकते हैं

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 दिल्ली की रचना को महिलाओं के मुद्दे पर लिखने के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉग http://indianwomanhasarrived.blogspot.in
पर पढ़े जा सकते हैं.
मुंबई के अजय ब्रह्मात्मज को सिनेमा और लाइफ स्टाइल पर लिखने के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉग http://chavannichap.blogspot.in
पर पढ़े जा सकते हैं.
इंदौर के प्रकाश हिंदुस्तानी को समसामयिकी विषयों पर लेखन के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉगhttp://prkashhindustani.blogspot.in पर पढ़े जा सकते हैं
लंदन की शिखा वार्ष्णेय को महिला और घरेलू विषयों पर लेखन के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉगhttp://www.shikhavarshney.com
 पर पढ़े जा सकते हैं.

फतेहपुर (यूपी) के प्रवीण त्रिवेदी को स्कूली शिक्षा और बच्चों के मुद्दों पर लेखन के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉग http://blog.primarykamaster.com
पर पढे जा सकते हैं
दिल्ली के प्रभात रंजन को हिंदी साहित्य और समाज पर लेखन के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉग को http://www.jankipul.com
पर पढ़ सकते हैं

दिल्ली की फिरदौस खान को साहित्य के मुद्दों पर लेखन के लिए सम्मानित किया गया. इनके ब्लॉगhttp://firdausdairy.blogspot.in

Thursday, September 11, 2014

पाकिस्तान में अल्पसंखयकों का उत्पीड़न

शशांक द्विवेदी 

नेशनल दुनियाँ में प्रकाशित 
नेशनल दुनियाँ के संपादकीय पेज पर प्रकाशित 
पाकिस्तान की एक संस्था पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर एजुकेशन एंड रिसर्च (पाइलर ) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले 20 सालों के दौरान पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरवाद बढ़ा है । जिसकी वजह से धार्मिक अल्पसंखयकों के साथ भेदभाव, उत्पीड़न एवं हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। वहां के हिंदुओं, सिखों और  ईसाइयों के साथ हो रहे भेदभाव के कारण वहां मानवाधिकारों के लिए खतरा पैदा हो गया है। वास्तविकता तो यह है कि धार्मिक अल्पसंखयकों के साथ भेदभाव का यह सिलसिला भारत पाकिस्तान के बँटवारे के बाद से ही शुरू हो गया था जो बाद के सालों में बढ़ता ही गया । उसके बाद भी न सिर्फ जारी है, बल्कि इसमें बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल पाकिस्तान के कराची में लगभग 100 साल पुराने मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और उसके आस-पास बसे करीब 40 हिन्दू परिवार के घरों को भी उजाड़ दिया गया । पकिस्तान में यह कोई पहला मौका नहीं है जब ऐसे मंदिर ध्वस्त किया गया हो या हिंदू परिवारों को उजाड़ा गया हो बल्कि यह घटनाएँ तो साल दर साल बढ़ रही रही है और वहाँ की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है । पाकिस्तान में हिन्दू होना एक अभिशाप के सिवा कुछ नही रह गया है । हिन्दू लडकियों का जबरन धर्म-परिवर्तन, मंदिरों को ध्वस्त कर देना वहाँ की बहुसंख्यक आबादी के लिए आम बात है । 1951 में पाकिस्तान में 75 लाख हिंदू थे और अब 18 लाख रह गए हैं।जबकि भारत में आजादी के समय लगभग २ करोड़ मुस्लिम थे जिनकी आबादी इस समय बढ़ कर लगभग ३२ करोड़ हो गई है ..इससे साफ़ है कि भारत मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए दुनियाँ का सबसे बेहतर देश है फिर भी यहाँ के कथित सेकुलर लोग सिर्फ मुस्लिम वोटबैक के लिए उनकी भावनाएं भडकाते रहते है. इनके लिए इस देश में धर्मनिरपेक्षता का सिर्फ एक मतलब है वो है सिर्फ मुस्लिम तुष्टीकरण जबकि भारत में मुस्लिम न तो अल्पसंख्यक है न ही कमजोर है बल्कि दुनियाँ के किसी और देश के मुकाबले मजबूत और बेहतर स्तिथि में है .लेकिन इन घटिया और दो कौड़ी के कथित सेकुलर लोगों को पाकिस्तान में हिंदुओं की स्तिथि नहीं दिखती ,न ही ये देखना चाहते ,इन्हें पाकिस्तान के हिंदू शरणार्थी नही दिखते ,इन्हें कश्मीरी पंडित भी नहीं दिखते ...लानत है ऐसी घटिया धर्मनिरपेक्षता पर
 जनरल जियाउल हक के तानाशाही शासन के दौरान तो कट्टरवाद की सारी हदें ही पार हो गई थी । पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहे कट्टरवाद एवं धार्मिक पहचानवाद के कारण वहां के अल्पसंखयकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और वे वहां के मुख्य समाज से कटते जा रहे हैं। हिंसक भीड़ का शिकार होना, ईशनिंदा कानून का शिकार होना एवं लड़कियों के जबरन धर्मातरण के कारण इन समुदायों को वहां या तो भय के वातावरण में जीवन गुजारना पड़ रहा है या मौका पाते ही वे दूसरे देशों की ओर पलायन कर रहे हैं।
पिछले साल पाकिस्तान के कराची में लगभग 100 साल पुराने मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और उसके आस-पास बसे करीब 40 हिन्दू परिवार के घरों को भी उजाड़ दिया गया । पकिस्तान में यह कोई पहला मौका नहीं है जब ऐसे मंदिर ध्वस्त किया गया हो या हिंदू परिवारों को उजाड़ा गया हो बल्कि यह घटनाएँ तो साल दर साल बढ़ रही रही है और वहाँ की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है । पाकिस्तान में हिन्दू होना एक अभिशाप के सिवा कुछ नही रह गया है । हिन्दू लडकियों का जबरन धर्म-परिवर्तन, मंदिरों को ध्वस्त कर देना वहाँ की बहुसंख्यक आबादी के लिए आम बात है । 1951 में पाकिस्तान में 75 लाख हिंदू थे और अब 18 लाख रह गए हैं। वर्ष 2013 में वहां के मानवाधिकार आयोग ने कहा था कि वहां हर महीने 25 हिंदू  लड़कियों का अपहरण हो रहा है। इनका धर्मांतरण करके मुसलमान युवकों से निकाह  करवा दिया जाता है। लगातार बढ़ रहे कट्टरवाद और  ईश निंदा कानून के चलते यहाँ  अल्पसंख्यक हिंदुओं  का जीना मुश्किल  हो गया है। इसी वजह से पाकिस्तान से हिंदुओं  का पलायन जारी है । यहाँ शारीरिक और मानसिक शोषण  के अलावा उनके धर्मस्थलों को भी तबाह किया जा रहा है। साल 2012 में यहाँ हिंदुओं के 4 प्रसिद्ध धर्मस्थल नष्ट  किए गए । जो अपने आप में  ऐतिहासिक धरोहर भी थे । फरवरी 2012 में रावलपिंडी में राम मंदिर तोड़ा गया, फिर नवम्बर में कराची स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर और अधिकृत कश्मीर में मनेसरा स्थित विशाल शिवालय ध्वस्त किया गया है। कराची की एक अदालत में मामला लम्बित होने व अदालत की निषेधाज्ञा के बावजूद पिछले साल 100 साल पुराना श्री राम पीर मंदिर तथा इसके आसपास के कई मकान भी बुल्डोजरों की सहायता से तोड़ दिए जिससे लगभग  40  परिवार बेघर हो गए।
पाकिस्तान में रह रहें अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्तिथि काफी दयनीय होती जा रही है । अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों के पूजास्थल मंदिर और गुरुद्वारे बहुत बुरी हालत में हैं । इनके अधिकाँश पूजास्थल या तो ध्वस्त कर दिए गए या निकट भविष्य में ध्वस्त कर दिए जायेगें । सरकार सिर्फ मूकदर्शक बन कर हिंदुओं पर हो रहें अत्याचारों को देख रही है । साल दर साल हालात बिगड़ रहें है ,हिंदू पलायन को मजबूर हो रहें है लेकिन पाकिस्तानी सरकार कुछ नहीं कर रही है । अल्पसंख्यक हिंदू आबादी मंदिरों पर हमलों से परेशान है ।
पाकिस्तान में सरकार अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों मंदिरों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है । पाकिस्तान में मंदिर,गुरुद्वारा  या चर्च गिराने लगातार जारी है । देश में व्यावसायिक कारणों से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को गिराया जा चुका है । अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव किया जाता है । पिछले कुछ सालों में ये हमले कई गुना बढ़ गए हैं । पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय खासकर हिंदू काफी डरे हुए हैं और उन्हें सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है, यहाँ पर कुछ कट्टरपंथी संगठन यह सोचते हैं कि हिंदुओं पर और मंदिरों पर हमला कर के इन्हें जन्नत नसीब होगी । पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथ बढ़ता जा रहा है और समय के साथ साथ कट्टरपंथी और ताकतवर होते जा रहे हैं । जबकि सरकार अल्पसंख्यकों को और उनके धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है । पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेम्बली एवं राज्य असेम्बलियों में अल्पसंखयकों के लिए आरक्षित सीटों पर उनके सीधे नामांकन के बजाय उन्हें चुनाव में उतरने का कानून बनने के बाद वहां की संसद व विधानसभाओं में अल्पसंखयकों के पहुंचने का रास्ता भी करीब-करीब बंद हो गया है।
यहाँ के हिंदू-मुसलमान के बीच असली समस्या  1947 से चली आ रही है  जब मुस्लिम बहुल पाकिस्तान को धार्मिक आधार पर एक अलग राष्ट्र बनाया गया था । ज्यादातर  ऊंची जाति के हिंदू पाकिस्तान छोड़कर भारत चले गए जबकि दलित जाति के हिंदू पाकिस्तान में ही रह गए जो मुख्य रूप से गरीब और अनपढ़ हैं । 1980-1990  में इस्लामी कट्टरपंथ के  दौर में  असुरक्षित हिंदू समुदाय और ज्यादा असुरक्षित हो गया । पिछले कुछ वर्षों में हिंदुओं को सिलसिलेवार ढंग से महिलाओं के अपहरण और जबरन धर्मांतरण का सामना करना पड़ा है । इस तरह के कदमों को अकसर कट्टरपंथी गुटों का संरक्षण मिला होता है । इन गुटों का काम होता है, अल्पसंख्यक हिंदुओं पर दबाव बनाना । पाकिस्तान के कानून में अब भी औपनिवेशिक समय के कानून हैं जिनमें धार्मिक स्थानों और वस्तुओं का अपमान करने के लिए सजा निर्धारित है । लेकिन ये समाज पर निर्भर करता है कि समाज उन्हें लागू करने के लिए कितना प्रतिबद्ध है ।

पाकिस्तान में योजनाबद्ध रूप से अल्पसंख्यकों व उनके धर्म स्थलों को समाप्त किया जा रहा है।  पाकिस्तान में रह रहे लाखों  हिन्दुओं के साथ स्थानीय बहुसंख्यक  समुदायों के द्वारा काफी बदतर सुलूक किया जाता है। इतनी बदतर जिंदगी जीने के बाद भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय अपनी  रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है लेकिन विश्व समुदाय और  भारत सरकार इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रहा है । जबकि पाकिस्तान में लगभग हर दिन  अल्पसंखयकों की हत्यायें हो रही है और उनके धार्मिक स्थलों को तोडा जा रहा है । पाकिस्तान में इस शोषण से आजिज आकर अब  हजारों हिन्दू परिवार वहां से पलायन कर भारत में आ कर शरण ले रहे है। पाइलर की इस रिपोर्ट के आने के बाद विश्व समुदाय और खासकर भारत को इस दिशा में कुछ ठोस करना होगा जिससे पाकिस्तान में अल्पसंख्यको की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके ।

Tuesday, September 2, 2014

लिखना और छपना

शशांक द्विवेदी 

मै अच्छा लिखता हूँ इसलिए छपता हूँ ,,मै छपता हूँ इसलिए नहीं लिखता.....

मै पिछले कुछ सालों से देश के प्रमुख समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित रूप से स्तंभ लिख रहा हूँ , प्रिंट मीडिया में बिना किसी गाडफादर और सिफारिश के सिर्फ अपनी मेहनत और लगन के बूते मैंने अपना स्थान बनाया है ..(मै अच्छा लिखता हूँ इसलिए छपता हूँ ,,मै छपता हूँ इसलिए नहीं लिखता )आज से 10 साल पहले जब इंजीनियरिंग का छात्र था तब भी खूब लिखता था भले ही वो छपे या न छपे तब भी मेरे कई लेख जनसत्ता ,दैनिक जागरण ,अमर उजाला  आदि के संपादकीय पेज पर प्रकाशित हुए थे..कुलमिलाकर लेखन शुरू से ही मेरे लिए जूनून रहा है और आज भी है और आगे भी रहेगा .पिछले दिनों एक पत्रकार ने मेरी शिकायत करते हुए कहा कि मेरा एक ही लेख देश के कई अखबारों में प्रकाशित हुआ है .मै उनकी शिकायत से पूरी तरह से सहमत हूँ (इस देश के अधिकांश बड़े नाम वाले लेखक तो घोषित तौर पर यही करते है ) और मेरा स्पष्ट मानना है कि अगर आप का लेख लखनऊ,दिल्ली ,जयपुर ,भोपाल ,पुणे ,राँची आदि अलग अलग जगह पर छप रहा है तो ये अच्छी बात है विभिन्न पाठकों तक आपकी बात पहुँच रही है .आज के समय में हिंदी के लेखकों को अखबार वाले बहुत कम पारिश्रमिक देते है (मात्र कुछ सौ रुपये ,कई अखबार तो ऐसे भी है जो इतना भी नहीं देते ).. पारिश्रमिक भी छोड़िये उसे ठीक से सम्मान तक नहीं दिया जाता ,उसका लेख प्रयोग होगा कि नहीं अधिकांश संपादक यह जवाब देना तक जरूरी नहीं समझते .कुल मिलाकर लेखक को वो टेक एज अ ग्रांट की तरह लेते है .जरुरत हुई तो लेख प्रयोग कर लिया नहीं तो लेखक भाड़ में जाए .ऐसी परिस्थितियों में लेखक क्या करे ?कुछ सालों में मैंने मीडिया इंडस्ट्री को बहुत अच्छी तरह से देखा है ,समझा है ,आप भारत जैसे देश में आर्थिक रूप से मजबूत होने पर  ही “हिंदी में “ स्वतंत्र लेखन कर सकते है अगर आप बिना किसी जाब के या बिना मजबूत आधार के  फ्रीलांसिंग कर रहें है तो निश्चित तौर पर भूखे मर जायेगें.यहाँ स्तिथि  बहुत ज्यादा भयावह है ,जो दिखता है वो है नहीं ,और भी बहुत सारी बाते है फिर कभी बताऊँगा..

इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी ने मेरी चिंताओ को साझा करते हुए लिखा है
हाल के दिनों में एक नवेले हिंदी पत्रकार ने कुछ अखबारों के संपादकीय और ऑप एड पेज प्रभारियों को कुछ स्तंभ लेखकों के एक ही लेख के कई जगह प्रकाशित होने की जानकारी दी है...इससे कुछ लेखकों के कुछ संपादकों ने लेख छापने भी कम कर दिए हैं...इस बारे में मुझे याद आता है अपना एक संस्मरण..दैनिक भास्कर के रविवारीय परिशिष्ट रसरंग में मैं 1998 में काम कर रहा था...तब दैनिक भास्कर के प्रधान संपादक कमलेश्वर थे। उस समय भास्कर सिर्फ मध्य प्रदेश और राजस्थान में ही प्रकाशित होता था। उन दिनों मृणाल पांडे एनडीटीवी छोड़ चुकी थीं। तब रविवारीय भास्कर की कुछ कवर स्टोरियां अच्युतानंद मिश्र और मृणाल पांडे जी से लिखवाई गईं। संयोग से भास्कर में प्रकाशित मृणाल जी की एक स्टोरी किसी दूसरे अखबार में भी प्रकाशित हुई। रविवारीय में कार्यरत हमारे एक साथी ने कमलेश्वर जी से इसकी शिकायत की। कमलेश्वर जी ने शिकायत सुनी...फिर साथी से सवाल पूछा- आप एक लेख का मृणाल जी जैसे लेखक को कितना पारिश्रमिक देते हैं...उन दिनों मिलने वाली रकम कुछ सौ रूपए होती थी..मित्र ने वही जवाब दिया...कमलेश्वर जी का जवाब था--पहले एक लेख का पारिश्रमिक पांच हजार देने का इंतजाम करो..तब सोचना कि मृणाल जी या दूसरे लेखक एक ही लेख दूसरी जगह छपने को ना दें...फिर उन्होंने उसे समझाया कि अगर एक ही लेख दो अलग-अलग इलाकों के दो या चार अखबारों में छपें तो हर्ज क्या है..आखिर पाठक भी तो अलग-अलग इलाकों के हैं..

Saturday, August 23, 2014

मेरे दो अनमोल रत्न (आन्या और आद्या )

शशांक द्विवेदी 
मुझे ड्राइंग /पेंटिंग/स्केच बनानी बिल्कुल नहीं आती ,बचपन से लेकर स्कूल /कॉलेज के दिनों में भी कुछ बनाने में भारी समस्या आती थी. आजकल मेरी पौने चार साल की बेटी आन्या दिन भर ड्राइंग /पेंटिंग/स्केच बनाती रहती है और मुझसे भी जबरदस्ती कुछ न कुछ बनवाती रहती है .मै बड़ी मुश्किल से कुछ बेकार सा ही बना पाता हूँ लेकिन फिर भी वो मुझे उलझाये ही रहती है .कुछ नही तो मुझसे कलर ही करवाती है स्केच में ..इसके साथ ही सोते समय 2 कहानी भी हर हाल में जबर्दस्ती सुनती है ,कहानी भी हर दिन नई होनी चाहिए रिपीट नही चलेगा ..मै कहता हूँ मम्मी से ड्राइंग बनवा लो ,कहानी सुन लो लेकिन वो सिर्फ मेरी ही रैगिंग लेती है ..दूसरी बात मेरे लैपटॉप पर भी वो अपना अधिकार समझती है ,कार्टून फिल्मे ,फोटो देखने के लिए ...मै जब भी लैपटॉप पर काम करने की कोशिश करता हूँ तो मम्मी से शिकायत करते हुए कहती है मम्मी देखो पापा फिर से फेसबुक कर रहें है !! समझा दो इन्हें ...कुलमिलाकर जबर्दस्त शैतान है लेकिन पढ़ने -लिखने में बहुत ज्यादा इंटरेस्ट है अभी से ... फिजिकल खेलकूद में भी आगे है /अडवेंचरस है..आन्या की देखादेखी आद्या (कुनू ) जो अभी पौने २ साल की है उसे भी पढाई का शौक चढ़ गया है कुछ न कुछ लिखती रहती है ...लिखना तो अभी आता नहीं इसलिए कॉपी पर आड़ी -तिरछी रेखाएं बनाती रहती है ...











मंदिर और हम मुसलमान

मेहनाज खान 
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अगर कहीं मस्जिद का आधार था और भूलवश उसपर मंदिर बनी तो हिन्दुओं को चाहिए की वो मुसलामनों को उसका मस्ज़िद धरोहर की तरह दें और मंदिर अन्य जगह बना लें। मुसलमानों को चाहिए की हर उस मस्ज़िद को अन्यत्र बना लें जो ठीक मंदिर ऊपर बना हो। और सबसे बड़ी बात जिस 'बाबर' को पूरा हिन्दोस्तान आक्रमणकारी, आततायी, विध्वंसकारी, भारतीय सभ्यता को नष्ट करनेवाला और अपनी व्यवस्था थोपने वाला मानता हो .. हम मुसलमान कैसे फिर उसके विरासत और अवशेषों को सहेजने का काम कर सकते हैं .... ??? बाबरी का विध्वंस 'हिन्दुओं' ने किया यह बहुत ही दुखद है … यह काम तो हम मुसलमानों को ही कर देना चाहिए था।
सरकार और सुप्रीमकोर्ट
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सरकार कोई भी हो यदि इन मुद्दों से संवेदनशील कहकर बचना चाहती है तो तो शर्मनाक है साथ ही इसे ठंढे बस्ते में गुसेड़े रखना सुप्रीम कोर्ट का एक बहुत बड़ा भूल है। क्यों ? क्योंकि इसतरह वे और हम अपने आने वाले पीढ़ी को क्या दे रहे हैं --- एक विवाद ! जरा सोचिये क्या इस विवाद के रहते हमारा भारत स्थिर रह सकता है ??? क्या भाईचारे और संविधान के धार्मिक निष्पक्षता का पाठ बरक़रार रह सकता है ? जरा सोचिये …
ऐतिहासिक दृष्टिकोण
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मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, कालीबंगा, किलिमंजारो, लोथल और भी कई जगहों पर खुदाई हुई और दुनिया साक्षी है और हम मुसलमान भी मानते हैं की भारत मानवीय सभ्यता के विकास का प्रथम क्षेत्र है और साथ ही खुदाई के बाद इन जगहों से जो अवशेष मिले हैं वो हिन्दू देवी-देवताओं के ही मिले हैं। न तो कहीं इस मशीह की मूर्ती या क्रूस मिला न ही कोई इस्लामिक मजार या कब्रगाह .... इतिहास साफ कहता है भारत में मुसलमानों का आगमन ठीक उसी तरह हुआ जिसतरह पुर्तगाली और ब्रिटिस आये .... हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए हिन्दू सनातनियों का जिन्होंने हमें गले लगा लिया और हम भी हिंदुस्तानी सरजमीं में घुल गए।

Tuesday, May 6, 2014

कथित प्रगतिशील लोगों का संघ के प्रति पूर्वाग्रह !!

शशांक द्विवेदी 
अक्सर कथित प्रगतिशील लोगों को "संघी मानसिकता ",भगवा रंग से रंगे आदि शब्द कहते /लिखते सुना है परमुझे कभी समझ में नहीं आया कि "संघी मानसिकता "क्या है ?
मेरा बचपन की पूरी पढाई शिशु से लेकर अष्टम तक संघ स्वचालित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई ..ये मेरे जीवन का वो समय था जहाँ से मैंने सब कुछ अच्छा सीखा और आज भी वही संस्कार मेरे जीवन में है ..आज भी सोकर उठनेके बाद सुबह अपने आप हाथ करबद्ध हो जाते है "कराग्रे वस्ते लक्ष्मी " कहते हुए ,खाते समय भोजन मंत्र अपने आप दिमाग में आ जाता है ऐसी और भी बहुत सी चीजें है ..12 वी में ही ABVP से जुड़ा(तहसील अध्यक्ष रहा ) और 2 साल उसके लिए जम कर काम किया उसी दरम्यान आरएसएस की शाखाओं में भी नियमित रूप से गया , वहाँ भी बहुत कुछ सीखा लेकिन आज भी मुझे एक भी नकारात्मकता,सांप्रदायिक बात याद नहीं आती जो कभी संघ की शाखाओं ,बैठकों में कही गयी हो /सिखाई गयी हो ..मै यह बात पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि संघ की किसी भी शाखा में मुस्लिमों के विरुद्ध या कोई भी सांप्रदायिक बात नहीं कही जाती ..संघ ने हमेशा राष्ट्रवाद की बात की और उसी भावना का प्रचार किया ,,बचपन से ही संघ से जुड़ाव के साथ ही मेरे मन में कभी कट्टरपंथ की भावना नहीं आयी और आगे कभी आयेगी भी नहीं ,दूसरे धर्मो के प्रति आदर हमेशा बना रहा और यही संघ की शाखाओं ने सिखाया भी गया "वसुधैव कुटुम्बकम"की भावना .,2002 गोधरा /गुजरात दंगो के दौरान मुझे बहुत दुःख हुआ था और उस समय मैंने अपने जीवन की सबसे पहली कविता भी लिखी थी ..क्योंकि मेरा मानना तब भी था और अब भी है कि दंगे हिंदू -मुस्लिम के बीच ही नहीं होते बल्कि देश की आत्मा को चोट पहुंचाते है ..
कथित धर्मनिरपेक्ष लोगों /संगठनो द्वारा संघ के बारें में 100 प्रतिशत आधारहीन बातें कही जाती है ये सिर्फ उन लोगों का पूर्वाग्रह है जो संघ को बिना जाने समझे उस पर गलत टिप्पणी करते रहते है ..यहाँ एक बात जरुर स्पष्ट कर दू कि संघ और भाजपा की कार्यशैली अलग है ..संघ से जुड़ाव के बाद भी कई बार मुझे भाजपा के कामों से असहमति हुई ,गुस्सा भी आया ..जो गलत लगा उसका विरोध भी किया और आगे भी करूँगा ..लेकिन अपने कथित प्रगतिशील मित्रों से कहना चाहूँगा कि बिना संघ को जाने हुए संघ पर विषवमन न करें क्योंकि अंध विरोध आदमी का विवेक शून्य कर देता है