Tuesday, March 5, 2019

अच्छे और कथित बुद्दिजीवियों का ढोंग

राहुल राज
"अच्छे लोग हिंसा या हिंसा के किसी भी संवाद से दूर रहते हैं| अच्छे लोग आतंकवादी हमलों पर दुःख व्यक्त करते हैं, गाँधी के सन्देश लिखते हैं, फैज़ की नज़्म पढ़ते हैं, चैनल बदल कर गुस्सा कम करते हैं, और फिर सो जाते हैं| अच्छे लोग मोदी की हंसी में भी युद्ध के विषैले गीत सुन लेते हैं और अच्छे लोग जैश-ए-मोहम्मद को पनाह देने वाले इमरान खान में statesmanship देख लेते हैं| अच्छे लोगों में अच्छा दिखने की इतनी होड़ लगी रहती है कि हिन्दुस्तान के सौ लोगों का पोस्ट पढ़कर उन्हें पूरा हिन्दुस्तान खून का प्यासा दिखने लगता है और पकिस्तान के दो पोस्ट पढ़कर पूरा पाकिस्तान उन्हें शान्ति की जन्म भूमि दिखने लगती है|

अच्छे लोगों का मानना है कि भारत को आतंकवादी कैम्पों पर हमला करने के बाद जश्न नहीं मनाना चाहिए था क्यूंकि इससे शान्ति की प्रक्रिया भंग होती है| अच्छे लोग अच्छा सच सुनना चाहते हैं, उन्हें बुरा सच उचित नहीं लगता| हर रोज़ जब हम शांति की अच्छी बातें लिखकर सो रहे होते हैं तो सीमा पर आतंकवादी हमलों में कोई न कोई जवान शहीद होता रहता है| हर रोज़ जब हम फैज़ और नेरुदा की कविताएं पढ़कर ख़ुद को अच्छा इंसान मानते रहते हैं तो उस समय कुछ निर्दोष लोग हमेशा के लिए शांत कर दिए जाते हैं| शान्ति और कविताएँ उन्हें भी पसंद होती हैं, लेकिन जब उनके सामने आतंकवादी बन्दूक लेकर खड़ा रहता है, तब उनके पास बड़ी बड़ी philosophical बातें करने का convenience नहीं होता|

अच्छे लोग कहते हैं कि केवल प्रेम और संवाद से हिंसा रोकी जा सकती है| अच्छे लोग आपको ये नहीं सुनना चाहते हैं कि कश्मीर को per-capita के मुताबिक़ सबसे ज्यादा फण्ड मिलता है| इसमें education और medical facilities पर बहुत ध्यान दिया जाता है| अच्छे लोग ये नहीं सुनना चाहते हैं कि जब कोई जवान आतंकवादी को घेरने जाता है तो उसपर पत्थर बरसाए जाते हैं| अच्छे लोग अच्छी बातें लिख कर समस्या हल कर लेते हैं| जी बिलकुल युद्ध से गरीबी और तबाही फैलती है| उससे आम आदमी परेशान होता है| आम आदमी के पास पहले से कम परेशानियाँ नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि आतंकवादी हमलों में सेना को शांति से मर जाना चाहिए ताकि आम आदमी शान्ति की कविता लिख पाए| एक गंभीर समस्या को बस इसलिए तो नहीं भूल जाना चाहिए क्यूंकि कुछ गंभीर समस्याएं है और भी हैं|

अच्छे लोग ये तो बोल देते हैं कि सेना की इतनी फ़िक्र है तो सीमा पर लड़ने क्यों नहीं चले जाते, लेकिन कभी ये नहीं बोलते कि मैं सीमा पर शान्ति का सन्देश लेकर जाऊंगा|

प्रश्न पूछना अच्छा है| आप पूछते रहिये, लेकिन जवाब यदि कड़वा हो तो कान बंद मत कीजियेगा|"


Thursday, September 6, 2018

SC/ST एक्ट पर अध्यादेश !! - मोदी सरकार की ताबूत में आखिरी कील


मै सामान्यतया राजनीतिक भविष्यवाणी नहीं करता लेकिन आज सीधे तौर पर कह रहा हूँ कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलटकर SC/ST एक्ट पर अध्यादेश लानें का फैसला मोदी सरकार की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा .. इतिहास गवाह है कि जब शाहबानो प्रकरण पर 
राजीव गाँधी ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा था उसके बाद कांग्रेस देश में कभी उबर नहीं पाई . वीपी सिंह ने भी मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करके पिछड़ों और दलितों का मसीहा बनने की कोशिश की थी ,लेकिन उनका राजनीतिक क्या हश्र हुआ सब जानतें है  ,मंडल के बाद वीपी सिंह और उनकी राजनीती दोनों मिट गए.
कुछ चीजों के लिए मोदी सरकार को माफ़ नहीं किया जा सकता है ,न कभी माफ करना चाहिए,
पिछले दिनों अटल जी के अंतिम संस्कार में शामिल हुआ था तो वहाँ पर मेरे बगल में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह , अश्विनी चौबे और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बैठे थे, SC/ST एक्ट पर अध्यादेश पर मेरे मन में काफ़ी गुस्सा पहले से था इसलिए मैंने इसका जिक्र गिरिराज सिंह और अश्विनी चौबे जी से करते हुए कहा कि सरकार ने ये जो किया है ठीक नही है , इसका बड़ा खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ेगा , मेरा ऐसा कहते ही अचानक पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हमलावर होते हुए मुझसे बोले कि तुम्हें पता ही क्या है , मोदी दलितों के मसीहा है , बोलें कि मैं हरिजन हूँ और देश मे हमारी संख्या ज्यादा है ऐसे में हमारे हित में फैसला होगा, मैंने प्रतिवाद करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट पर सिर्फ यही कहा था कि निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए , बिना जाँच के गिरफ्तारी गलत है आदि तो धर्मेंद्र प्रधान बोलें कि सुप्रीम कोर्ट को कुछ पता नही , वो ऐसे ही फैसले देती है !! मैंने कहा कि सिर्फ आरोप के आधार पर आप किसी को कैसे गिरफ्तार कर सकतें है ,ये तो न्याय की बुनियादी अवधारणा के भी खिलाफ है, मैं उनसे लगातार प्रतिवाद करता रहा और वो काफी गुस्से में बोलतें रहें , जबकि इस दौरान गिरिराज और चौबे जी कुछ नही बोले , माहौल बड़ा अजीब हो गया ,कुछ लोगो के समझाने पर मैं थोड़ी देर के लिए चुप तो हो गया लेकिन मेरे अंदर गुस्से की ज्वाला धधक रही थी , कुछ समय बाद पता नहीं मुझे क्या सूझा और मैं अपने सीट से उठकर धर्मेंद्र प्रधान के पास जाकर उनके कान में बोला कि आप कुछ भी कर लीजिए यूपी में दलितों के वोट बीजेपी को नहीं मिलेंगे और ये फैसला बीजेपी की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा..मैंने उसी दिन इस विषय पर उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय को कहा था कि SC/ST एक्ट पर आप लोग आग से खेल रहें है ये समूची भाजपा को जला देगा ..
पिछले सिर्फ १ महीनें में मोदी सरकार ने SC/ST एक्ट पर अध्यादेश लाने के अलावा , SC/ST को पदोन्नति में आरक्षण ,और क्रीमीलेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए केंद्र सरकार कह रही है कि सिर्फ “जाति “ ही पिछड़ेपन का आधार है (नीचे न्यूज पढ़ लीजिये ) मतलब आप चाहे कितने भी अमीर हो ,प्रभावशाली हो अगर SC/ST हैं तो आपको आरक्षण की सुविधा के साथ पदोन्नति में भी आरक्षण मिलेगा ,केंद्र की इसी सरकार ने अब विश्वविद्यालयों में विभागों के स्तर पर भी आरक्षण देनें के फैसला किया है जबकि पहले यूनिवर्सिटी स्तर पर आरक्षण लागू था (न्यूज पढ़ें )..
मतलब इस सरकार नें मानवीयता और नैतिकता की सारी हदें पार कर दी SC/ST को फायदा पहुँचाने के लिए ,उनके तुष्टीकरण के लिए (इतना तो इतिहास में किसी दल ने आजतक नहीं किया )..लेकिन आप डायरी में लिख लीजिये इतना करने के बाद भी इन्हें SC/ST का वोट कतई नहीं मिलने वाला ,ये अगला लोकसभा चुनाव बुरी तरह से हारने वालें हैं ..सवर्णों के वोट से तो ये पूरी तरह से हाथ धो चुके है .
देश की जनता ने इस मोदी /बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया ,ग्राम प्रधान ,विधायक सांसद ,मुख्यमंत्री ,प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति सब के सब बीजेपी के होते हुए भी इन्होने कुछ नहीं किया .. काश इस सरकार ने राम मंदिर निर्माण ,धारा ३७० ,कॉमन सिविल कोर्ट के  अपने अजेंडे के लिए आध्यादेश लाया होता.
यह इस देश की मिट्टी ,इस इन्द्रप्रस्थ का दुर्भाग्य है कि सत्ता में आतें ही लोग अपनी जड़ें भूल जातें है .इस देश का समूचा हिंदू जनमानस ठगा महसूस कर रहा है .कथित सेकुलरिज्म से त्रस्त इस देश की बहुसंख्यक जनता ने मोदी को मसीहा माना लेकिन ये भी वही करने लगे जो कांग्रेस या बाकी दल करतें आयें है ..बीजेपी और मोदी जी आप ये याद रखना कि आने वाली सदियाँ और इतिहास आपको कभी माफ़ नहीं करेगा .. 


Tuesday, February 27, 2018

श्रीमती जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं

शशांक द्विवेदी 
आज हमारी श्रीमती जी का जन्मदिन है ,सबसे पहले तो उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ,आप हमेशा ऐसे ही डायनामिक और ख़ुशहाल बनी रहो यही प्रार्थना है ईश्वर से ..सामान्यतया हम दोनों का मिज़ाज बिल्कुल अलग है फिर भी लगभग 15 साल से साथ है (9 साल शादी के बाद और 6 साल शादी के पहले ), मिज़ाज के साथ साथ खाने -पीने की पसंद भी बिल्कुल अलग है . ,प्रियंका मुझसे ज्यादा डायनामिक और दुनियादारी के मामलों में समझदार है ,मै ज्यादा लिबरल हूँ जबकि ये उतनी नही है, तर्क और बहस तो खैर हमारी जिंदगी का हिस्सा ही है ,मुझसे खूब लड़ने के बाद अक्सर कवितायेँ लिखने बैठ जाती है , इन्होने सभी कवितायेँ मुझसे लड़ने के बाद ही लिखी है ..लेकिन सच्चाई यह है कि पूरे घर और बच्चों को इन्होने ही संभाल रखा है ..सबसे खास बात यह है कि देश के कई नामी ज्योतिषियों के मना करने के बाद भी हमने शादी की (प्रेम काल में शादी को लेकर परेशान थे तो उस समय ज्योतिषियों के यहाँ भी चक्कर लगा आये थे ) , प्रियंका विशुद्ध पत्रकार है जबकि मै उनके साथ रहकर इंजीनियर कम पत्रकार हूँ ...मेरे लेखो की आलोचनात्क स्क्रूटनी कर देती है , वर्कप्लेस और टेक्निकल टूडे मैगज़ीन में भी हम साथ है ऐसे में हमेशा इनका नया आइडिया देखने को मिलता है , इनकी वजह से काफ़ी हद तक निश्चिंत रहता हूँ , मोटामोटी मिज़ाज और पसंद अलग होते हुए भी हम एक दुसरे को प्यार करते है ,सम्मान करते है यही वजह है कि हम साथ साथ है ,खुश है ...और हां जब तक रहेंगे खुश ही रहेंगे ....एक बार फिर से प्रियंका को ढेरों बधाइयाँ ....

Wednesday, October 25, 2017

love से ज्यादा महत्वपूर्ण desires है, दिमाग के लिये

मेघा मैत्रैयी
कभी करीब 60 की उम्र के एक आदमी से मुलाकात हुई थी, अस्पताल में इंटर्नशिप के दौरान। बुरी तरह डिप्रेशन में था। काफी सीधा-साधा किस्म का इंसान था जो जिंदगी भर कोई ना कोई जिम्मेदारी उठाता रहा परिवार की, पर अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके सारे रिश्ते खराब क्यों हो गए।

बीवी लड़ती रहती थी, बच्चे उपेक्षा करते थे, रिश्तेदारों में भी कोई वैल्यू नहीं थी। कुल मिला कर वह पनीर की सब्जी में आलू की तरह हो गया, जिसको लोग चुन-बिछ कर अपनी प्लेट में नहीं डालते। बस इसीलिए दुःखी था।

बार -बार बोलता कि मैंने unconditional प्यार किया सबसे पर अब नफरत हो गयी है।

समस्या इस unconditional love के concept में ही है। ये exist ही नहीं करता। पर हम इस बात को समझते ही नहीं है।

एक माँ अपने बच्चे से प्यार करती है क्यूंकि ऐसा करने से उसकी maternal instinct को सन्तुष्टि मिलती है। एक  सैनिक अपने देश के लिये जान दे देता है खुशी-खुशी क्योंकि उसका दिमाग उसे बताता है कि वो अगर ऐसा नहीं करेगा तो सन्तुष्ट नहीं होगा। एक इंसान पूरे जीवन दूसरो की सेवा में लगाता है क्यूंकि उसे ऐसा करने से खुशी और सन्तुष्टि मिलती है।

हमें लगता है कि इनका unconditional प्यार और निस्वार्थ भाव है,  इनके कर्मो के पीछे। लेकिन नहीं। दिमाग स्वार्थी होता है, वो आपसे तब तक कोई काम नहीं कराएगा जब तक उसको उस से किसी प्रकार की सन्तुष्टि ना मिले।

उदाहरण के लिए एक ऐसा मरीज जिसके hypothalamus में feeding centre को कोई ऐसी क्षति पहुंच गयी हो कि वह काम करना बंद कर दे, तो उस इंसान को भूख लगेगी ही नहीं। उसका शरीर कमजोर होता जाएगा, वह मरने की कगार पर पहुंच जाएगा पर खायेगा नहीं, क्योंकि दिमाग ने उसे यह बताना बन्द कर दिया है कि खाना उसकी जरूरत है, और जो चीज  आप के दिमाग के हिसाब से आपके भले के लिये जरूरी नहीं है वो आप नहीं करेंगे, भले ही आपकी हालत कितनी भी critical हो जाये।

यही बात प्यार के साथ भी है। हम सिर्फ इसीलिए दुसरो का ख्याल नहीं रखते क्योंकि सामने वाले की जरूरत है, बल्कि हमारे लिये जरूरी है ऐसा करना।

Unconditional love तब होता जब कोई अपना आपको पचास जूते रोज मारे, आपको 3rd डिग्री टार्चर दे ,आपकी जिंदगी में डंडा किये रहे लेकिन तब भी आप उसी दृढ़ता से उससे प्यार करते रहें; अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो इस फालतू कॉन्सेप्ट को भूल जाइये और अपनी वैल्यू create करना सीखिए।

आज गृहणियां कितना भी कर दे, उनकी वैल्यू अक्सर कमाऊं पति से कम होती है परिवार में, क्योंकि ये हर काम जिम्मेदारी समझ कर करती है बेवकूफों की तरफ( yes, they are not निस्वार्थ, they are बेवकूफ)। वो कभी अपने काम का वैल्यू नहीं लेती क्योंकि हमारे सामाजिक ताने - बाने ने यह बात दिमाग में फिट कर दी है कि valuable काम वही है जिसकी कोई कीमत हो नोटों में।

मुझे समाज को देखते हुए यह लगता है कि आपमें से ज्यादातर लोग granted हैं, किसी ना किसी के लिये। तो एहसान ना जताये, घमण्ड ना दिखाये पर अपनी value create करना शुरू करें; क्योंकि दुनिया में कोई नहीं है जो आपसे unconditional love करता है।  love से ज्यादा महत्वपूर्ण desires है, दिमाग के लिये। आप जब तक जरूरत हैं, तभी तक प्यारे हैं। ना तो आपकी गलती है ना आपके उपेक्षा करने वालों की, पर इस नालायक दिमाग के काम करने का तरीका ही  यही है। ☺

Wednesday, October 18, 2017

अलविदा ताज भाई ..बहुत याद आओगे तुम

शशांक द्विवेदी
पिछले दो दिनों से मन बहुत ख़राब और उदास है ,ताज भाई की असमय ,अस्वाभाविक और संदिग्ध परिस्तिथियों में हुई मृत्यु ने मुझे व्यक्तिगत तौर पर बुरी तरह से झकझोर दिया है ..ताजबाबू मेरें सबसे अच्छे मित्रों में से एक था और दिल के बेहद करीब था .अभी भी ताज के आगे “था “ लिखनें में हाथ कॉप जातें है . बचपन से ही(सरस्वती शिशु मंदिर ), शिशु से हमारा साथ और याराना रहा , दिल्ली –एनसीआर में भी ताज एक मात्र मेरा ऐसा मित्र था जिसको मै कभी भी पूरे हक़ से साथ बुला सकता था ,हम दोनों अक्सर मिलते थे ,जब भी मिलनें का मन होता तो सीधे बिना उसको बताये नोयडा के आईटी स्टीलर पार्क में उसकी कंपनी इनोडेटा पहुँच जाता या फिर वो मेरे घर आ जाता ,सबसे बड़ी बात हमारें रिश्तों में जो थी वो ये कि हम हमेशा बिना किसी प्रोफेशनल काम के ही मिलते थे .ताज भाई मेरी जिन्दगी में एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन पर मै आँख बंद कर भरोसा करता था .कहते है ना कि एक लॉयल मित्र हजार रिश्तेदारों से हमेशा बेहतर होता है . वो मेरा ऐसा पारिवारिक मित्र था जिस पर मुझे और प्रियंका दोनों को सबसे ज्यादा भरोसा था .
आज के इस बुरे दौर में भी ताज भाई की वजह से इंसानियत और आदमियत पर भरोसा कायम था . मेरी किसी भी परेशानी में वो मुझसे ज्यादा ही परेशान होता...अपने घर की बहुत सारी आर्थिक समस्याओं और जिम्मेदारी के होते हुए भी हमेशा मुस्कुराते हुए ही मिलता ,पिछले दिनों ३ अक्टूबर को घर आया तो बोला भाई २१ नवंबर को बहन की शादी फिक्स हो गयी है ,अब उसकी तैयारी करनी है .अपने घर और माता –पिता की जिम्मेदारी निभाते निभाते वो अपने सारे सपने ही भुल चुका था .इस बेरहम दुनियाँ के सैकड़ों कडवे अनुभव उसके पास थे फिर भी इंसानियत उसमें सबसे ज्यादा ही थी .  धर्म और राजनीती को सबसे बेकार की चीज मानता था वो , उसका स्पष्ट मानना था कि दुनियाँ में धर्म के नाम पर ही सबसे ज्यादा हिंसा की जा रही है .मुस्लिम होने की वजह से कई बार वो सामाजिक कटुता का शिकार भी हुआ लेकिन फिर भी बोलता था कि भाई हमारे धर्म के  लोगों ने जिस तरह जेहाद के नाम पर पुरी दुनियाँ में कत्लेआम मचा रखा है उसकी कुछ कीमत तो हमें भी चुकानी होगी ही .. बोलता था कि दुनियाँ में अगर कही जन्नत है तो वो अपना देश भारत ही है ,अपना देश और इस देश की मिट्टी ही हमारा सब कुछ है . ताज भाई आस्तिकता और नास्तिकता के बीच में हमेशा इंसानियत को लेकर खड़ा रहें  . जिन समस्याओं और संघर्षो को ताज भाई जी रहें थे उतना तो मै इस जिन्दगी में नहीं जी पाता ..बहुत  बार घर ,समाज और मित्रों के बीच भी ताज भाई उपेक्षा का शिकार रहें लेकिन कभी अपनी जिजीविषा को मरने नहीं दिया . हम दोनों की मित्रता धार्मिक आधार पर हिंदू –मुस्लिम से बहुत ज्यादा ऊपर थी,उसके साथ रहते हुए मुझे हमेशा लगता कि यार इस देश में जो भी हिंदू –मुस्लिम हो रहा है वो बेकार की बात है ..धन प्रधान इस आधुनिक युग में ताज भाई जैसा निस्वार्थ भाव मैंने अपने किसी भी मित्र में नहीं देखा . पैसे के पीछे मैंने आज तक ताज भाई को भागते हुए नहीं देखा ..मै अक्सर जब उससे मिलता तो बोलता चल भाई आज बाहर पार्टी करते है ,तो बोलता यार बेवजह से पैसे खर्च मत कर चल तुझे अरहर की बेहतरीन दाल चावल बना कर खिलाता हूँ (दाल चावल हम दोनों का ही फेवरेट था ),बोलता यार घर के बाहर कितना भी पैसा खर्च कर ले लेकिन संतुष्टि नहीं मिलती. उसकी खूबियों की जितनी बात करू उतनी ही कम है लेकिन लोगों की निस्वार्थ सेवा भावना उसमें सबसे बड़ी थी .पिछले दो दिनों से हर पल उसकी याद आती है ,आँख बंद करते ही उसका चेहरा याद आता है ,मुझे यकीन ही नही हो रहा कि अब वो इस दुनियाँ में नही रहा . इस तरह से उसकी असमय मृत्यु की मैंने कभी कल्पना भी नहीं थी . वो मेडिकली भी फिट था ,किसी भी तरह के नशे और व्यसन से भी दूर था फिर भी अचानक उसका  कमरें में मृत पाया जाना मुझे किसी साजिश की आशंका से भर देता है .लेकिन दुसरे पल यह भी सोचता हूँ कि उसकी कभी किसी से कोई दुश्मनी /मारपीट /लड़ाई /विवाद/अफेयर  आदि कुछ नहीं था ऐसे में कोई उसे क्यों मारेगा .खैर इन सब सवालों के जवाब अभी भविष्य की गर्त में छिपें है लेकिन ताज भाई के इस तरह जाने ने मुझे इस एनसीआर में बिलकुल अकेला छोड़ दिया .क्योंकि वो एकमात्र मेरा ऐसा मित्र था जिससे मै हमेशा बिना किसी काम के मिलता था . उसने यह भी साबित किया कि  प्रपंच ,झूठ और दिखावे के बिना भी मित्रता  सहज तरीके से निभाई जा सकती है . खैर ताज भाई तुम हमेशा मेरी यादों में रहोगो और तुम्हे भुला पाना संभव ही नहीं है ..ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति दे ..भावभीनी श्रधांजली  

(ताज बाबु की ये अंतिम फ़ोटो मैंने अपने मोबाइल से पिछले ३ अक्टूबर को खींची थी ,अफ़सोस कि उस दिन मै उसके साथ एक सेल्फी नहीं ले सका ..बेहद व्यस्तता की वजह से उस दिन ज्यादा बात भी नहीं हो पाई )

Friday, May 20, 2016

सी फार करप्शन , सी फार कांग्रेस होता है

शशांक द्विवेदी 
कल दिल्ली एमसीडी के नतीजें आनें के बाद बहुत सारे प्रगतिशील और वामपंथी लोग बहुत उछल रहें थे (कांग्रेस की ४ सीटें आने पर ),इसे लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा बता रहें  थे ,अजय माकन तो इसका श्रेय पप्पू गाँधी को दे रहें थे और कह रहें थे सांप्रदायिकता हार गई ..खैर आज पाँच राज्यों के नतीजों के बाद तो कांग्रेस रसातल में चली गयी ,,तो क्या इसका भी श्रेय ये प्रगतिशील सेकुलर लोग पप्पू गाँधी को देंगे ? या फिर गांजा पीकर कुछ नहीं बोलेंगे आजा ..फिलहाल देश “कांग्रेस मुक्त भारत” की तरफ बढ़ रहा है देश की ४३ फीसदी आबादी में भाजपा की सरकार है जबकि सिर्फ ७ फीसदी आबादी में कांग्रेस की सरकार है (एक बड़ा राज्य कर्नाटक और दो छोटे राज्य /केंद शासित प्रदेश ) बस अब इतनी ही औकात बची है कांग्रेस की देश में ...मै कई सालों से कह रहा हूँ कि कांगेस भर्ष्टाचार की पर्याय है ..मुझे लगता है कि जैसे सी फार करप्शन वैसे ही सी फार कांग्रेस होता है .इस पार्टी ने इस देश को ६० सालों में जिस तरह से लूटा है उतना तो भारत अंग्रेजो ,मुस्लिम और वाह्य आक्रमणकारियों ने पिछले २००० साल में भी नहीं लूटा ..सच्चाई तो यह है कि इस पार्टी ने इस देश की आत्मा को ही गिरवी रख दिया था ..हर दिन के घोटालें ,लाखों करोड़ के भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता ने इन्हें अब इनकी असली औकात बता दी है ..मुझे खुशी है कि आप भाजपा की केंद्र सरकार को चाहे अच्छी कहो या बुरी लेकिन कम से कम पिछले दो सालों में घोटाले तो नहीं हुए , न ही शायद कभी होंगे ..इसी को मै सबसे बड़ी उपलब्धि मानता हूँ ..आज देश में वामपंथ का मतलब कांग्रेस और कांग्रेस का मतलब वामपंथ हो गया है ,भारत का हर प्रगतिशील /सेकुलर आदमी कांग्रेस का समर्थक जरुर होता है क्योकि कांग्रेस की सरकारों के समय इन लोगों को भी मलाई मिली थी /भ्रष्टाचार का हिस्सा मिला था ..इस लिए इन दो कौड़ी के प्रगतिशील लोगों से अब सोशल मीडिया पर भी वैचारिक लड़ाई लडनी होगी क्योकि ज़मीन पर ये दोगले अब कही है नहीं ,जनता ने इनकी औकात बता दी है ,अब इन्हें यहाँ इनको आइना दिखाना है ..भाजपा को असम की ऐतिहासिक जीत पर बधाई और बाकी सभी राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाई ..

Wednesday, October 7, 2015

दादरी में कथित सेकुलरों ने दिया सांप्रदायिक रंग

शशांक द्विवेदी 
दादरी में जो हुआ वो गलत हुआ लेकिन उसके बाद जो हुआ वो तो और भी ज्यादा ग़लत है .जितनी मेरी समझ है उसके अनुसार दादरी का मामला सुनियोजित नही था ,ये एक अफवाह के बाद हुई दुर्घटना है जिसे बाद में सेकुलर लोगों ने सांप्रदायिक रंग दे दिया ,इस मामले पर टीवी चैनलों की बेवजह रिपोर्टिंग और तूल देने से यह और बिगड़ गया .अब मुख्य सवाल यह है कि जिन लोगों ने अख़लाक़ को मारा वो तो दोषी है ही लेकिन बाद में जिन बुद्धिजीवियों /सेकुलर लोगों ने इसे जबर्दस्त तूल दिया क्या वो दोषी नहीं है ?काटजू ने कहा ,शोभा डे ने कहा कि हमनें गौमांस खाया ,क्या कर लोगों ,केरल में वामपंथियों ने बाकायदा आयोजन करके गौमांस खाया ...क्या इस सबसे हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होगी ? मै यहाँ हिन्दू –मुस्लिम की बात नहीं कर रहा हूँ बल्कि सीधे सीधे यह कह रहा हूँ कि ये कैसा वामपंथ है ,ये कैसा सेकुलरिज्म है जिसे हिन्दुओं की भावनाएं भड़काने या आहत करने में आनंद आ रहा है .ये बात भी यहाँ जानना जरुरी है कि ये सब लोग मुस्लिमों के साथ भी नहीं है बल्कि ये वो लोग है जो उनका सबसे बड़ा नुक्सान कर रहें है .आखिर ये वही बुद्धिजीवी है जिन्होंने दादरी के बाद इतना रायता फ़ैला दिया कि स्पष्ट तौर पर हिन्दू –मुस्लिम ध्रुवीकरण दिख रहा है .हर बार की तरह ,दादरी के बाद फिर मोदी को ये लोग गरियाने लगे ,दोषी बताने लगे लेकिन मुस्लिम समुदाय को ये सोचना होगा कि इन बुद्धिजीवियों के विधवा विलाप से किसे  फ़ायदा  होगा ?सीधी सी बात है इससे मोदी और भाजपा को ही फ़ायदा होगा क्योकि जब मुस्लिम एक तरफ होगा तो हिन्दुओ में भी यही भावना आयेगी ..कहने का मतलब सीधा है कि सेकुलर लोगों ही दादरी को सांप्रदायिक रंग दे दिया..जिसका सीधा फायदा ग़ाली खाने वाली भाजपा और मोदी को ही होगा और हर बार की तरह मुस्लिम समाज को फिर ये बुद्धिजीवी ठग लेंगे ...