Sunday, July 21, 2019

बहुत फायदेमंद है मूँग दाल का पानी

*वजन घटाना है, तो घबराएं नहीं.. रोजाना पिएं मूंग दाल का पानी*
 शशांक द्विवेदी
मूंग की दाल अधिकांश घरों में बनाई जाती है और काफी पसंद भी की जाती है। वैसे तो सभी तरह की दालों में पौष्टिक तत्व होते हैं, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि मूंग की दाल खाने से आपको कौन से फायदे मिलेंगे -
1 मूंग की दाल में भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है। साथ ही इसे खाने से विटमिन-सी, कार्ब्स, प्रोटीन और डायटरी फाइबर भी मिलता है।
2 मूंग की दाल खाने से एनीमिया की समस्या में राहत मिलती है और वजन कम करने में भी ये सहायक होती है।
3 मूंग की दाल का पानी पिने से फाफी देर तक पेट भरा रहता है और आप एनर्जेटिक भी फील करते हैं।
4 मूंग की दाल का पानी छोटे बच्चों के लिए भी फायदेमंद होता है, बच्चे इसे आसानी से पचा पाते हैं। ये बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
5 अगर किसी को दस्त या डायरिया की समस्या हो गई हो, तो उन्हें 1 कटोरी मूंग दाल पिलाएं। इससे उनके शरीर में पानी की कमी पूरी होगी साथ ही दस्त रूकने में मदद मिलेगी।

स्वस्थ रहनें के कुछ आसान उपाय

💐💐पहला सुख निरोगी काया💐💐अपने डॉक्टर खुद बने(वैद्यकीय डॉक्टर से सलाह भी ले)
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शशांक द्विवेदी
1 =  केवल सेंधा नमक प्रयोग करे!थायराईड बी पी और पेट ठीक होगा!
2 = केवल स्टील का कुकर ही प्रयोग करें!अल्युमिनियम में मिले हुए लेड से होने वाले नुकसानों से बचेंगे!
3 = कोई भी रिफाइंड तेल ना खाकर केवल तिल! मूंगफली सरसों और नारियल का प्रयोग करें!रिफाइंड में बहुत केमिकल होते है!जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते है!
4 = सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करे!
5 = रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है!प्रदूषित हवा बाहर करे!
6 = काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में भी अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी!
7 = देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता!
8 = ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा!
9 = ज्यादा से ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं! आयरन की कमी किसी को नहीं होगी!
10 = भोजन का समय निश्चित करे!पेट ठीक रहेगा! भोजन के बीच बात न करें!भोजन ज्यादा पोषण देगा!
11 = नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें!पोषक विटामिन और फाइबर मिलेंगे!
12 = सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें पेट ठीक रहेगा!
13 = चीनी कम से कम प्रयोग करें!ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी!
14 = चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर ले!
15 = छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करे! फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते!
16 = चाय के समय आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे!
17 = एक डस्टबिन रसोई में और एक बाहर रखें!सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें!
18 = रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों का तेल लगाएं सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें!
19 = करेले मैथी और मूली यानि कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा!
20 = पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे!
21 = प्लास्टिक और अल्युमिनियम रसोई से हटाएं दोनों केन्सर कारक है!
22‌ = माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग कैंसर कारक है!
23 = खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ पेट और दांत को खराब करती हैं!
24 = बाहर का खाना बहुत हानिकारक है!खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं!
25 = तली चीजें छोड़ें वजन पेट एसिडिटी ठीक रहेंगी!
26 = मैदा बेसन छौले राजमां और उड़द कम खाएँ गैस की समस्या से बचेंगे!
27 = अदरक अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं गैस और शरीर के दर्द कम होंगे!
28 = बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है!
29 = पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है!-U V वाला ही प्रयोग करे!सस्ता भी और बढ़िया भी!
30 = रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं!इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें!
31 = रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें!सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छानने के बाद जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें!रात को पी जाएं!पेट साफ होगा कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा
32 = सुबह रसोई में चप्पल न पहनें शुद्धता भी एक्यू प्रेशर भी!
33 = रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं एसिडिटी खतम!
34 = एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारियां शरीर से निकल जायेंगी!
35 = चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी!
36 = रसोई के मसालों से बनी चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है!
37 = सर्दियों में नाखून के बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा!
38 = सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए सर्दी से नुकसान नहीं होगा!
39 = रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी! नमक फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा!
40 = कभी - कभी नमक - हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता!
41 = बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा!
42 = सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय का ताजा दही जरूर शामिल करें! प्रोबायोटिक का काम करेगा!
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     हृदय की बीमारी के आयुर्वेदिक इलाज!
हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे!उनका नाम था महाऋषि वागवट जी!!

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी!जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!-(Astang Hridayam)

इस पुस्तक मे उन्होने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे!
              यह उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है!कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है!मतलब दिल की नलियों मे Blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त (Blood) मे Acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है!

अम्लता आप समझते है!जिसको अँग्रेजी में Acidity भी कहते हैं और यह अम्लता दो तरह की होती है !

एक होती है पेट कि अम्लता !
और
एक होती है रक्त (Blood) की अम्लता !

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है!खट्टी खट्टी डकार आ रही है!मुंह से पानी निकल रहा है!और अगर ये अम्लता (Acidity) और बढ़ जाये तो इसे Hyperacidity कहते हैं!

फिर यही पेट की अम्लता बढ़ते - बढ़ते जब रक्त मे आती है!तो रक्त अम्लता-(Blood Acidity) होती है!और जब Blood मे Acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता और नलियों में Blockage कर देता है और तभी Heart Attack होता है!इसके बिना Heart Attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है!जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं!क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!
           एसीडिटी का इलाज क्या है!
वागबट जी आगे लिखते है कि जब रक्त (Blood) में अम्लता (Acidity) बढ़ गई है!तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करें जो क्षारीय है!

आप जानते है!दो तरह की चीजे होती है!

अम्लीय (Acidic)
और
क्षारीय (Alkaline)

अब अम्ल और क्षार (Acid and Alkaline) को मिला दें तो क्या होता है!

हम सब जानते है!Neutral होता है!

तो वागबट जी लिखते है!कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है! तो क्षारीय (Alkaline) चीजे खाओ!तो रक्त की अम्लता (Acidity) Neutral हो जाएगी और जब रक्त मे अम्लता Neutral हो गई तो Heart Attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं होगी!

ये है सारी कहानी!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है! और हम खाये!

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है! जिन्हें अगर आप खायें तो कभी Heart Attack न आयेगा और अगर आ गया तो दुबारा नहीं आएगा!

आपके घर में जो सबसे ज्यादा क्षारीय चीज है वह है! लौकी जिसे हम दुधी भी कहते है!और English मे इसे Bottle Gourd भी कहते हैं जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है!

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है!इसलिये आप हर रोज़ लौकी का रस निकाल कर पियें या अगर खा सकते है!तो कच्ची लौकी खायें!

वागवतट जी के अनुसार रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है!इसलिए आप लौकी के रस का सेवन करें!

कितना मात्रा में सेवन करें!

रोज 200 से 300 ग्राम लौकी का रस ग्राम पियें!

कब पिये!

सुबह खाली पेट (Toilet) शौच जाने के बाद पी सकते है!या फिर नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं!

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय भी बना सकते हैं!जिसके लिए इसमें 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लें क्योंकि तुलसी बहुत क्षारीय है!

इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते भी मिला सकते है!क्योंकि पुदीना भी बहुत क्षारीय होता है!

इसके साथ आप इसमें काला नमक या सेंधा नमक भी जरूर डाले!ये भी बहुत क्षारीय है!याद रखे नमक काला या सेंधा ही डालें दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डालें!

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है!

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी Heart की Blockage ठीक कर देगा!-21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा और फिर आपको कोई आपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी!

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे और जो पैसे बच जायें उसे अगर इच्छा हो किसी गौशाला मे दान कर दें क्योंकि डाक्टर को देने से अच्छा है किसी गौशाला दान दे!

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा....!!
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हल्दी का पानी
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पानी में हल्दी मिलाकर पीने से यह 7 फायदें होते है...!!

1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है! सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है!

2.‌ आप यदि रोज़ हल्दी का पानी पीते हैं!तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है!और खून जमता भी नहीं है!यह खून साफ करता है!और दिल को बीमारियों से भी बचाता है!

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है!क्योंकि हल्दी का पानी टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है! इसके अलावा हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं!

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए क्योंकि हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है...!!

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है!तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है!जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है!हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते है...!!

6. शरीर में किसी भी तरह की सूजन हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें!हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है!जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है! सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी!

7. कैंसर खत्म करती है हल्दी!हल्दी कैंसर से लड़ती है! और उसे बढ़ने से भी रोक देती है!क्योंकि हल्दी एंटी - कैंसर युक्त होती है!और यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगे!
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हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम हैं...!!

१ - खाना खाने के १.३० घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए!

२ - पानी घूँट घूँट करके पीना है!जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके पेट में Acid बनता है और मुँह में छार दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा!

३ - पानी कभी भी ठंडा (फ़्रिज़ का) नहीं पीना है!

४ - सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना चाहिए!रात भर जो अपने मुँह में लार है!वो अमूल्य है! उसको पेट में ही जाना ही  चाहिए!

५ - खाना जितने आपके मुँह में दाँत है!उतनी बार ही चबाना है!

६ - खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा में बैठकर या उखड़ूँ बैठकर ही खाना चाहिए!

७ - खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही प्याज़ के साथ दूध दही के साथ उड़द की दlल!

८ - समुद्री नमक की जगह सेंधा नमक या काला नमक खाना चाहिए!

९ - रीफ़ाइन तेल डालडा ज़हर है!इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों तिल मूँगफली या नारियल का तेल उपयोग में लाए!सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है! आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते हैं!

१० - दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए!

११ - घर में चीनी (शुगर) का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर (केमिकल ) मिलाने पड़ते है!इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आज कल गुड़ बनाने में कॉस्टिक सोडा (ज़हर) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है!इसलिए सफ़ेद गुड़ ना खाए!प्राकृतिक गुड़ ही खाये!प्राकृतिक गुड़ चाकलेट कलर का होता है!

१२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए!

१३ - घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन या कुकर नहीं होना चाहिए!हमारे बर्तन मिट्टी पीतल लोहा और काँसा के होने चाहिए!

१४ - दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवश्य और शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए!

१५ - सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंधl नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए!

यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी!यदि आप बीमार है!तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग (BP, शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे!
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सर्दियों में उठायें मेथी दानों से भरपूर लाभ
     ➡ मेथीदाना उष्ण वात व कफनाशक पित्तवर्धक पाचनशक्ति व बलवर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है! यह पुष्टिकारक शक्ति स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है!सुबह–शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है!कब्ज व गैस को दूर करता है!इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं!यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी है!

➡ अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं!उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे–धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होने वाली व्याधियों जैसे घुटनों व जोड़ों का दर्द भूख न लगना हाथों का सुन्न पड़ जाना सायटिका मांसपेशियों का खिंचाव बार -बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है!गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भुने मेथी दानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है!
        मेथी दाने से शक्तिवर्धक पेय
दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४ – ५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें!
      औषधीय प्रयोग

1. कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें. ५-६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है!भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है!

2. जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें!इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें!-२ चम्मच यह मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों कमर व घुटनों का दर्द आमवात (गठिया) का दर्द आदि में लाभ होता है!इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी!

3. पेट के रोगों में :१ से ३ ग्राम मेथी दानों का चूर्ण सुबह दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच दस्त भूख न लगना अफरा दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है!

4. दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह - शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है!

5. मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें!आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म–गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है!

6. अंगों की जकड़न :भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें-१–१ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ–पैरों में होने वाला दर्द भी दूर होता है!

7. विशेष : सर्दियों में मेथीपाक मेथी के लड्डू मेथीदानों व मूँग–दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं!
                 IMPORTANT
HEART ATTACK और गर्म पानी पीना!

यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं Heart Attack के बारे में भी एक अच्छा लेख है!

चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं!ठंडा पानी नहीं!अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए!जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं!यह लेख उनके लिए ही है!

भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है!क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं!ठोस रूप में बदल देता है!

इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है!जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है!तो यह टूट जाता है!और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है!यह आँतों में एकत्र हो जाता है!फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है!और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है!

इसलिए सबसे अच्छा यह है!कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये!एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले पीना चाहिए!इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे!💐💐अपने वेद जी की सलाह जरूर ले💐डॉक्टर से भी पूछे💐💐

Friday, July 19, 2019

स्टीम करने से मिलता है ये फायदा

*बारिश के मौसम में स्टीम करने से मिलते हैं ये 3 बड़े फायदे*
 शशांक द्विवेदी
1. सर्दी जुकाम में फायदा :- बारिश के मौसम पानी के साथ-साथ तेज हवाएं भी चलती हैं। अचानक गरमी के बाद मौसम में तरावट आने से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग बीमार पड़ जाते हैं। ज्यादातर लोगों को इस मौसम में गले में इंफैक्शन और उसके बाद तेज बुखार और खांसी शुरू हो जाती है। बहुत सारे लोगों को इस मौसम में ठंड लगकर बुखार आता है कई लोगों को कफ जमने की पेरशानी भी होती है।
2. थकान होती है दूर :-  बारिश का मौसम सुहावना तो होता है मगर इस मौसम में लोग लेजी बहुत ज्यादा फील करते हैं। इस मौसम में उमस भी बहुत होती है और इसलिए बहुत जल्द ही थकावट महसूस होने लगती है। इस मौसम में जब उमस वाली गरमी पड़ती है तो ऐसे मौसम में ताजगी का एहसास नहीं होता है। मगर, आप अगर स्टीम करते हैं तो आपको थकावट भी कम होगी और आप तरोताजा महसूस करेंगे। अगर आप मिंट की पत्तियां डाल कर स्टीम लेते हैं तो आपको ठंडक का एहसास भी होगा।
3.त्वचा के लिए फायदेमंद :- स्टीम त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है। बारिश के मौसम में नमी ज्यादा होने से त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं ऐसे में त्वचा को उचित ऑक्सीजन न मिलने पर मुंहासे होने लगते हैं। इतना ही नहीं इस मौसम में त्वचा ऑयली हो जाती है। इससे भी त्वचा में संक्रमण हो जाता है। अगर आप इससे बचना चाहते हैं तो आपको इस मौसम में हर 5 दिन बाद स्टीम जरूर लेनी चाहिए। हो सके तो नीम की पत्तियों को पानी में डाल कर स्टीम लें।

Wednesday, July 17, 2019

विटामिन सी से भरपूर है

*मानसून में विटामिन सी से भरपूर ये 5 फूड्स खाएंगे तो नहीं होगें बीमार*
 शशांक द्विवेदी
1. ब्रोकली :- यह ग्रीन सब्‍जी विटामिन सी से भरपूर होती है, लेकिन हम कभी भी इसके हेल्‍थ बेनिफिट्स पर ध्‍यान नहीं देते और ना ही इसे अपनी डाइट में शामिल करते है। लेकिन अगर आप मानसून में किसी भी तरह के इंफेक्‍शन को दूर रखना चाहते हैं, तो ताजे सलाद को तैयार करने से लेकर सूप को टेस्‍टी बनाने, ब्रोकली बेहद फायदेमंद है।
2. आंवला से आप कई तरह की रेसिपी बना सकते हैं। पारंपरिक 'मुरब्बा' से लेकर उन्हें सुखाने और कैंडी के रूप में सेवन करने तक, आप इसका इस्‍तेमाल मज़े कर सकते हैं। फाइबर से भरपूर होने के अलावा, आंवला को इम्‍यून को मजबूत बनाने के लिए भी जाना जाता है।
3. आप मौसमी इंफेक्‍शन से पीड़ित हैं, तो टमाटर आपके लिए बहुत मददगार हो सकता है। मामूली सी दिखने वाली कोल्‍ड और फ्लू की समस्‍या लंबे समय तक आपको परेशान करती है। लेकिन इसका समाधान इस फूड में छिपा है। तो अपने डेली डाइट रुटीन में टमाटर को शामिल करें और ऐसा करने से आपका इम्‍यून सिस्‍टम आपको हमेशा के लिए धन्‍यवाद देगा।
4. विटामिन सी के सबसे स्रोतों में से एक पपीता है। इस फल किसी को बहुत पसंद होता है तो कुछ ये बिल्‍कुल भी पसंद नही होता है। यानि इससे आपका लव और हेट का रिश्ता है, लेकिन इसके हेल्‍थ को फायदा पहुंचाने वाले गुण इसे मानसून में जरूरी फल बनाते हैं।
5. इस ऑरेंज कलर के सॉफ्ट फल को बहुत कम लोग जानते हैं लेकिन यह अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। क्‍या आप जानते हैं कि ड्राई खुबानी न केवल कैलोरी में कम होती है, बल्कि आपकी इम्‍यून सिस्‍टम की भी रक्षा कर सकती है।

Tuesday, July 16, 2019

प्यास न बुझे तो अपनाएं ये नुस्खें

*बार-बार पानी पीने से भी न बुझे प्यास, तो आजमाएं घरेलू नुस्खे*
 शशांक द्विवेदी
1   पानी में शहद मिलाकर कुल्ला करने या लौंग को मुंह में रखकर चूसने से बार-बार लगने वाली प्यास शांत होती है।
2 . बार-बार प्यास लगने की इस समस्या को जायफल से भी दूर किया जा सकता है इसके लिए बस जायफल का एक टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहें। आपको प्यास नहीं लगेगी।
3 गाय के दूध से बना दही 125 ग्राम, शकर 60 ग्राम, घी 5 ग्राम, शहद 3 ग्राम व काली मिर्च-इलायची चूर्ण 5-5 ग्राम लें। दही को अच्छी तरह मलकर उसमें अन्य पदार्थों को मिलाएं और किसी स्टील या कलई वाले बर्तन में रख दें। उसमें से थोड़ा-थोड़ा दही सेवन करने से बार-बार लगने वाली प्यास शांत होती है।
4जौ के भुने सत्तू को पानी में घोलकर, उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर पतला-पतला पीने से भी प्यास शांत होती है।
5 चावल के मांड में शहद मिलाकर पीने से भी तृष्णा रोग यानि बार-बार प्यास लगना या प्यास न बुझने की समस्या में आराम मिलता है।
6 पीपल की छाल को जलाकर पानी में डाल दें और जब यह राख नीचे बैठ जाए, तो उस पानी को छानकर पिएं। ऐसा करने से प्यास शांत होगी। इसके अलावा पीपल का चूर्ण बनाकर फक्की लगाकर पानी पीने से भी प्यास लगना बंद होगी।
7 पान खाना भी प्यास से मुक्ति पाने का बेहद आसान और कारगर उपाय है। पान खाने से प्यास कम लगती है और मुंह और गला भी नहीं सूखता।
8 दही में गुड़ मिलाकर खाना भी प्यास बुझाने का एक कारगर घरेलु उपाय है। इससे खाना खाने के बाद लगने वाली तेज प्यास को कम किया जा सकता है।

Monday, July 15, 2019

चोकर वाले आटे के फ़ायदे

*चोकर वाले आटे के 5 फायदे जानकर, आटे से चोकर अलग करना भूल जाएंगे*
 शशांक द्विवेदी
अधिकांश लोग आटे में से चोकर अलग करके ही उसका भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो ये जानकारी आपके काम की है। अब आपको आटे से चोकर अलग करने की जरूरत नहीं है क्योंकि चोकर मिला आटा खाना सेहत के लिए फायदेमंद है। आइए, जानें कैसे -
1 शोधकर्ताओं के अनुसार चोकर खून में इम्यूनोग्लोब्यूलीन्स की मात्रा को बढ़ाता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार है। यह टीबी जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने की ताकत रखता है।
2 यह बवासीर, अपेंडिसाइटिस, बड़ी आंत एवं मलाशय के कैंसर से बचाता है और पेट साफ करने में काफी मददगार साबित होता है।
3 फाइबर से भरपूर होने के कारण चोकर युक्त आटे का प्रयोग पाचन संबंधी समस्याओं को दूर कर कब्ज की समस्या में भी लाभकारी होता है। यह आंतों में जमा मल भी निकालने में मदद करता है।
4 चोकर युक्त आटे का प्रयोग कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अहम भूमिका निभाता है, अत: मोटापे एवं हार्ट के मरीजों के लिए चोकर युक्त आटे का प्रयोग बेहद फायदेमंद साबित होता है।
5 वजन कम करने की चाहत रखने वालों के लिए तो यह एक प्राकृतिक उपाय है, जो आपके बढ़ते वजन पर नियंत्रण रखने में कारगर साबित होता है


Saturday, July 13, 2019

सही खाना क्या है?भोजन और पोषण दोनों अलग चीजें हैं !!

खाना सही तो बीमारी नहीं
Complete Nutrition Guide

तनदुरुस्त रहने के लिए हमारे भोजन में विटामिन्स और मिनरल्स का सही मात्रा में सेवन बहुत जरूरी है। इनकी कमी जहां कई तरह की बीमारियों को जन्म दे सकती है, वहीं इनकी अधिकता भी समस्या की वजह बन सकती है। विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत, सही मात्रा, इनके सोर्स और इनसे जुड़ी समस्याओं पर एक्सपर्ट्स से बात करके पूरी जानकारी दे रही हैं अनु जैन रोहतगी

केस 1
32 साल के आनंद पिछले काफी समय से कमर के निचले हिस्से में दर्द से परेशान थे। दर्द कमर से शुरू होकर घुटनों तक पहुंच जाता था। उन्हें चलने में भी दिक्कत आने लगी। आनंद को खून की भी कमी बताई गई। डॉक्टरों ने कई तरह की जांच करवाईं। किसी ने मांसपेशियों में खिंचाव बताकर तमाम टेस्ट करवा दिए, तो किसी डॉक्टर ने स्लिप डिस्क की समस्या बताकर सर्जरी कराने की सलाह दे डाली, लेकिन किसी को भी उनकी असल समस्या का पता नहीं चला। महीनों बाद आखिरकार एक डॉक्टर को लगा कि उनकी समस्या कुछ और है। उन्होंने विटामिन्स का लेवल चेक करने के लिए टेस्ट करवाए। रिजल्ट चौंकाने वाला था। आनंद विटामिन बी-12 की जबरदस्त कमी से जूझ रहे थे। इससे उनके शरीर में खून कम बन रहा था और न्यूरोलॉजिकल समस्या भी पैदा हो गई थी। डॉक्टर ने आनंद को पहले विटामिन बी-12 के इंजेक्शन दिए, फिर गोलियां खाने को दीं। 2 महीने में ही आनंद का दर्द और एनीमिया बिलकुल ठीक हो गया।

केस 2
35 साल की रेखा की सेहत पिछले काफी समय से खराब चल रही थी। उनके शरीर, खासकर जोड़ों में बहुत दर्द रहने लगा था। वह हमेशा थकान महसूस करती थीं और उन्हें चलने में भी परेशानी होती थी। काफी जांच और इलाज के बाद भी रेखा की हालत में कोई सुधार नहीं आया। आखिरकार इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में लाया गया। लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों ने हड्डियों, मांसपेशियों से संबंधित कई टेस्ट के साथ विटामिन-डी की कमी का भी टेस्ट करवाया। पता चला कि रेखा के अंदर विटामिन-डी की कमी थी। रेखा को विटामिन-डी के साथ कैल्शियम की गोलियां दी गईं और सही डायट लेने को कहा गया। 2 महीने में ही उनकी हालत में 70 फीसदी तक सुधार आ गया। विटामिन-डी की खुराक लंबी चली और वह पूरी तरह से ठीक हो गईं।

केस 3
12 साल का रमन लगातार थकावट, भूख कम लगने और वजन कम होने की समस्या से परेशान था। डॉक्टर ने टेस्ट कराए। रमन के खून में विटामिन-डी की मात्रा बहुत ज्यादा पाईं। रमन को पहले विटामिन-डी की कमी थी इसलिए डॉक्टर ने उसे विटामिन-डी का सप्लिमेंट लेने को कहा था। पैरंट्स ने उसे फिर डॉक्टर को नहीं दिखाया और विटामिन-डी की खुराक चलती रही, जो रमन के लिए घातक बन गई। दरअसल, विटामिन-डी पानी में घुलता नहीं है। अगर यह ज्यादा मात्रा में शरीर में आने लगे तो टिशू में जमा होने लगता है और फिर समस्याएं पैदा करता है। डॉक्टरों ने रमन की विटामिन-डी की डोज बंद करा दी। लगभग 2 महीने में रमन के खून में विटामिन-डी की मात्रा सामान्य हुई और वह नॉर्मल हो पाया। गनीमत थी कि विटामिन-डी के ज्यादा होने की वजह से रमन के दिल और किडनी में कैल्शियम ज्यादा जमा नहीं हुआ। अगर ऐसा हुआ होता तो बड़ी परेशानी पैदा हो सकती थी।

इन तीनों मामलों से साफ है कि विटामिन्स की कमी अगर आपको परेशान कर सकती है तो इसकी अधिकता भी कम खतरनाक नहीं है। दरअसल, हमारे शरीर को सही और संतुलित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट के अलावा विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत होती है। संतुलित खाने के अलावा रेग्युलर एक्सरसाइज भी जरूरी है क्योंकि इससे भी शरीर को खाने से मिलने वाले पोषण को जज्ब करने में मदद मिलती है।

शरीर के लिए जरूरी हैं ये
- कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर को एनर्जी देते हैं जिसकी बदौलत हम कोई भी काम कर पाते हैं। ये हमारे खाने का सबसे अहम हिस्सा हैं। सब्जियों और फलों से मिलने वाले कार्ब को सबसे बेहतर माना जाता है।

- प्रोटीन को बॉडी बिल्डिंग ब्लॉक्स भी कहा जाता है। ये हमारे शरीर में टिश्यूज को बनने में मदद करते हैं। हमारी हड्डियों और दांतों का मुख्य स्रोत प्रोटीन ही है।

- फैट शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ शरीर में कुछ विटामिन्स को जज्ब करने में भी मदद करते हैं। हमारा शरीर फैट तैयार नहीं करता इसलिए हमें इन्हें बाहर से लेना होता है। मोनोसैचुरेटिफ फैट्स को गुड फैट्स भी कह सकते हैं। इन्हें लेना बेहतर है जबकि ट्रांस फैट्स (फ्रोजन पित्जा, मार्गरिन, बेकरी आइटम, समोसा, छोले-भटूरे आदि) से पूरी तरह तौबा करना बेहतर है। सैचुरेटिड फैट्स (देसी घी, बटर, कोकोनट ऑयल आदि) कम मात्रा में ले सकते हैं।

- विटामिन्स और मिनरल्स को माइक्रो न्यूट्रिएंट कहा जाता है क्योंकि इनकी जरूरत सीमित मात्रा में होती है लेकिन ये अनिवार्य हैं। मिनरल्स पौधों, जानवरों, मछली और तरल चीजों के जरिए हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं लेकिन विटामिन्स हवा, गर्मी, धूप आदि के संपर्क में आने पर निष्क्रिय हो सकते हैं। ऐसे में इन्हें अलग से लेना जरूरी है।

- हमारे शरीर को 13 तरह के विटामिन्स की जरूरत होती है। ये विटामिन A, D, E और पानी में नहीं घुल पाते और इन्हें जज्ब करने के लिए फैट की जरूरत होती है। शरीर में ज्यादा मात्रा होने पर ये टिश्यूज़ में जमा होने लगते हैं, जबकि विटामिन C और विटामिन B-1, B-2, B-3, B-5, B-6, B-7, B-9 और B-12 पानी में घुलनशील होते हैं और इनकी अतिरिक्त मात्रा यूरीन के रास्ते बाहर निकल जाती है।
- शरीर के लिए कई तरह के जरूरी मिनरल्स होते हैं, जिनमें मुख्य हैं- कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, आयोडीन आदि भी हैं।
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*** यहां लेख में जगह-जगह RDA का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब रेकमेंडेड डायटरी अलाउंसेस है यानी इस जरूरी तत्व को एक दिन में कितनी मात्रा में खाया जाए। यहां एक वयस्क महिला और एक वयस्क पुरुष की RDA दी गई है। उम्र और सेहत के मुताबिक इसे कम-ज्यादा किया जाता है।

कार्बोहाइड्रेट
शरीर में क्या काम: शरीर की एनर्जी का मुख्य जरिया, जो शरीर को तमाम काम करने में मददगार

RDA: 130 ग्राम रोजाना
कमी के लक्षण और बीमारियां: बेहद कमजोरी, दुबलापन, मुंह का सूखना, सिरदर्द, पेट में भारीपन, कीटोसिस बीमारी
टेस्ट: आमतौर पर लक्षणों और डाइट से कमी का पता लगाया जाता है
खाने के सोर्स: अनाज (गेहूं, चावल, सूजी, मैदा, बाजरा आदि), मीठी चीजें (शुगर, गुड़, शहद आदि), फल (चीकू, केला, आम आदि), सब्जियां (आलू, शकरकंद आदि), दालें आदि
ज्यादा सेवन से नुकसानः मोटापा, शुगर और दिल की बीमारी की आशंका
विशेष: खाने का 45-60% हिस्सा कार्ब से आना चाहिए। कार्ब 2 तरह के होते हैंः सिंपल और कॉम्प्लेक्स। सिंपल में शुगर, वाइट ब्रेड, वाइट राइस, मैदा आदि आता है और ये फौरन ग्लूकोज़ में बदल जाते हैं इसलिए अच्छे नहीं माने जाते, जबकि कॉम्प्लेक्स कार्ब में साबुत अनाज, दालें, फल-सब्जियां, ब्राउन राइस आदि आते हैं। इन्हें खाना बेहतर है। हाई ग्लाइसिमिक इंडेक्स के मुकाबले लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाले कार्ब खाना बेहतर है क्योंकि ये धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलते हैं।

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प्रोटीन
शरीर में क्या काम: हड्डियों, मांसपेशियों, स्किन, बाल और जरूरी अंगों का अहम हिस्सा है प्रोटीन। इससे शरीर ठीक तरह से काम करता है।

RDA: 45 से 60 ग्राम रोजाना, 2.5 ग्राम प्रति किलो से ज्यादा खाना नुकसानदेह

कमी के लक्षण और बीमारियां: बहुत ज्यादा थकान, शरीर के हिस्सों में दर्द, बाल झड़ना, झुंझलाहट, बार-बार इन्फेक्शन आदि

टेस्ट: टोटल प्रोटीन टेस्ट

खाने के सोर्स: दूध और दूध से बनी चीजें, सोयाबीन, दालें, अंडा, मीट, मछली, टोफू, मखाना आदि

ज्यादा सेवन से नुकसानः वजन बढ़ना, कब्ज, डीहाइड्रेशन, थकान आदि

विशेष: हमें वजन के अनुसार 0.8 ग्राम प्रति किलो प्रोटीन लेना चाहिए। औसतन फैट की तरह शरीर प्रोटीन को आगे के लिए जमा कर नहीं रख पाता इसलिए हमें रोजाना जरूरत अनुसार प्रोटीन लेना ही चाहिए।
थोड़ा गुड फैट लेना जरूरी है।
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फैट
शरीर में क्या काम: एनर्जी देता है, शरीर के तापमान को संतुलित रखता है, अंगों के सुरक्षा कवच का काम करता है, जोड़ों में लचीलापन बनाए रखता है और शरीर के कई फंक्शन में मदद करता है।

RDA: 45 से 75 ग्राम फैट रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियां: बदरंग, सूखी और खुश्क स्किन, बांह के ऊपरी हिस्से में गांठें आदि

टेस्ट: मशीनों के अलावा ऑनलाइन भी टेस्ट कर सकते हैं

खाने के सोर्स: फैट 3 तरह के होते हैं सैचुरेटिड (बटर, बीफ, कोकोनट, घी आदि), अनसैचुरेटिड (कनोला, ऑलिव, पीनट, सनफ्लार, सोयाबीन, कॉर्न, सरसों आदि) और ट्रांस फैट (फ्रोजन पित्जा, मार्गरिन, नमकीन, बिस्किट, बार-बार तली जानेवाली चीजें समोसा, छोले-भठूरे आदि)। रोजाना 2-3 छोटे चम्मच तक फैट लेना चाहिए, जिसमें एक चम्मच सैचुरेटिड फैड और 1 या 2 चम्मच अनसैचुरेटिड फैट लेना चाहिए। ट्रांस-फैट से तौबा करें।

ज्यादा सेवन से नुकसानः मोटापा, डायबीटीज़, दिल की बीमारी होने की आशंका

विशेष: पुरुषों में शरीर के वजन का 8-19% और महिलाओं में 21-33 % नॉर्मल फैट रेंज है। आमतौर पर शरीर में फैट की कमी नहीं होती क्योंकि अगर घी-तेल बंद भी कर देते हैं तो भी दूध-दही, फल, सब्जियों आदि से काफी हद तक फैट की जरूरत पूरी हो जाती है। फिर भी थोड़ा गुड फैट लेना जरूरी है।
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फैट में घुलने वाले विटामिन

विटामिन A................
शरीर में क्या काम: शरीर के विकास, आंखों की रोशनी और इम्यून सिस्टम की बेहतरी के अलावा दिल, फेफड़ों और किडनी आदि के फंक्शन में मदद करना

RDA: 700 से 900 माइक्रोग्राम रोजाना, 3000 माइक्रोग्राम से ज्यादा शरीर के लिए खतरनाक

कमी के लक्षण और बीमारियां: रात में दिखाई न देना (Night Blindness), खून न बनना, इम्यून सिस्टम का कमजोर होना, गले, सीने और पेट में बार-बार इन्फेक्शन होना, बच्चों की ग्रोथ कम होना, फर्टिलिटी पर असर पड़ना, स्किन का खुरदुरा होना और बाल झड़ना

टेस्ट: विटामिन A सिरम टेस्ट, इसे रेटिनॉल (Retinol) टेस्ट भी कहते हैं

खाने के सोर्स: बीफ, अंडा, फिश, बटर, दूध, चीज़ चकुंदर, गाजर, ब्रोकली, पालक, लाल-पीली सब्जियां शिमला मिर्च, गाजर, सीताफल, पपीता, आम आदि

ज्यादा सेवन से नुकसान: थकान, हड्डियों में दर्द, चक्कर और उलटी आना, बाल झड़ना, नाखूनों का कमजोर होना, स्किन का बेहद संवेदनशील हो जाना, सिर में पानी जमा हो जाना आदि
विशेष: यह इम्यून सिस्टम को सुधारता है और कुछ तरह के कैंसर से भी बचाव में मददगार है।

विटामिन D................
शरीर में क्या काम: हड्डियों, दांतों और शरीर के तमाम जोड़ों को मजबूत बनाने, नर्व्स और मसल्स के तालमेल को बेहतर करने, इन्फेक्शन से बचाने और किडनी, फेफड़ों, लिवर और हार्ट की बीमारियों की आशंका कम करने में मददगार

RDA: 400–800 इंटरनैशनल यूनिट या 10–20 माइक्रोग्राम रोजाना, हालांकि कुछ एक्सपर्ट 1000-4000 यूनिट या 25-100 माइक्रोग्राम रोजाना की सलाह भी देते हैं

कमी के लक्षण और बीमारियां: हड्डियों, जोड़ों और मसल्स का कमजोर और खोखला होना, कमर और शरीर के निचले हिस्सों में दर्द होना खासकर पिंडलियों में, इम्युनिटी कम होना, बाल झड़ना, बहुत थकान और सुस्ती रहना, ऑस्टियोपोरोसिस, रिकेट्स (पैरों का टेढ़ा होना)

टेस्ट: 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन-D ब्लड टेस्ट, इसे विटामिन डी डिफिसिएंशी टेस्ट भी कहते हैं

खाने के सोर्स: मीट, मछली, अंडे, मशरूम और फॉर्टिफाइड दूध, जिसमें विटामिन्स-मिनरल्स ऊपर से डाले जाते हैं
ज्यादा सेवन से नुकसान: किडनी फंक्शन से लेकर मेटाबॉलिजम तक पर बुरा असर
विशेष: 20 नैनोग्राम/मिली से ऊपर नॉर्मल रेंज है लेकिन 50 नैनोग्राम/मिली या ज्यादा को बेहतर माना जाता है। लेवल 800-900 नैनोग्राम/मिली तक पहुंच जाए तो खतरनाक हो जाता है। इसका सबसे अच्छा जरिया है सूरज की किरणें। साल भर में औसतन 45-50 दिन 45 मिनट धूप में निकलने या बैठने से पर्याप्त विटामिन डी मिल जाता है। ऐसा मुमकिन नहीं है तो डॉक्टर की सलाह पर हर महीने एक बार 60,000 यूनिट का सैशे ले सकते हैं।

विटामिन E................
शरीर में क्या काम: रेड ब्लड सेल बनाने और विटामिन-K को जज्ब करने में मददगार। एंटी-ऑक्सिडेंट है यानी बुढ़ापे की रफ्तार कम करता है और इन्फेक्शन से बचाने में मदद करता है। दिल, लिवर से जुड़ी बीमारियों के अलावा स्ट्रोक्स और डिमेंशिया से बचाव में मददगार

RDA: 15 मिलीग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियां: मसल्स का कमजोर होना, चलने-फिरने और तालमेल बिठाने में दिक्कत, शरीर के हिस्सों का सुन्न पड़ना, देखने में दिक्कत होना और इम्युनिटी कमजोर होना

टेस्ट: विटामिन E सिरम टेस्ट, इसे टोकोफेरॉल (Tocopherol) टेस्ट भी कहते हैं

खाने के सोर्स: बादाम, नट्स, अनाज, दूध, खाने के तेल जैसे कि सूरजमुखी, मूंगफली या ऑलिव ऑयल, सब्जियां जैसे कि पालक, लाल शिमला मिर्च, एवोकाडो आदि

ज्यादा सेवन से नुकसान: ब्लीडिंग, मसल्स में दर्द, डायरिया, उलटी से लेकर स्ट्रोक तक का खतरा, ब्लड थिनर के इस्तेमाल में भी रुकावट पैदा करता है
विशेष: इसकी नॉमर्ल रेंज 5.5-17 मिलीग्राम/लीटर है। यह फैट में घुलने वाला विटामिन है इसलिए यह शरीर में सही से जज्ब हो, इसके लिए गुड फैट (ऑलिव ऑयल, सरसों का तेल, कनोला ऑयल आदि) लेना जरूरी है। प्रेग्नेंट और दूध पिलानेवाली महिलाओं को ज्यादा विटामिन-E की जरूरत होती है।

विटामिन K................
शरीर में क्या काम: ब्लड क्लॉटिंग यानी खून को गाढ़ा रखने के अलावा हड्डियों और दिल की सेहत दुरुस्त रखने में मदद
RDA: 90-120 माइक्रोग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियां: जरा-सी चोट लगने पर भी खून का बंद न होना

टेस्ट: PT (Prothrombin Time) टेस्ट, जिसमें ब्लड क्लॉटिंग में लगने वाले वक्त का पता लगाया जाता है

खाने के सोर्स: हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे कि पालक, पार्सले, लेट्यूस, गोभी, ब्रोकली, अंडा, बटर, दूध, लिवर आदि

ज्यादा सेवन से नुकसान: विटामिन K की ऊपरी लिमिट और इसकी अधिकता से होने वाली समस्याओं के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है
विशेष: 0.2-3.2 नैनोग्राम/मिलीलीटर नॉर्मल रेंज है। आमतौर पर विटामिन K की कमी बहुत कम पाई जाती है क्योंकि इसकी शरीर में बेहद कम मात्रा में जरूरत होती है।
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पानी में घुलने वाले विटामिन
विटामिन C................
शरीर में क्या काम: इंफेक्शन से बचाव है और इम्यून को मजबूत करना, दांतों और मसूड़ों के साथ-साथ बाल और स्किन के लिए जरूरी, आयरन को जज्ब करने के लिए भी जरूरी

RDA: 65-90 मिलीग्राम रोजाना, 2000 मिलीग्राम रोजाना से ज्यादा लेने पर नुकसानदेह

कमी के लक्षण और बीमारियां: एनीमिया, बाल झड़ना, स्किन का रूखा होना, घाव भरने में देरी होना, दांतों और मसूढ़ों की समस्याएं, स्कर्वी

टेस्ट: विटामिन C सीरम टेस्ट, टोटल ब्लड काउंट टेस्ट

खाने के सोर्स: खट्टे फल (संतरा, नीबू, मौसमी आदि), आलू, ब्रोकली, पालक, लाल-पीली शिमला मिर्च, स्ट्रॉबरी, टमाटर आदि
ज्यादा सेवन से नुकसानः आमतौर पर विटामिन सी की अधिकता नहीं होती लेकिन अगर बहुत ज्यादा मात्रा में ले लिया जाए तो उलटी, चक्कर, सिरदर्द, पेट दर्द और नींद न आना जैसी समस्याएं होती हैं
विशेष: 0.6-2 मिलीग्राम/डेसीलीटर नॉमर्ल रेंज है। शरीर को सबसे ज्यादा विटामिन C की जरूरत होती है। यह एंटी-ऑक्सिडेंट का काम कर बुढ़ापे की रफ्तार भी कम करता है।

विटामिन B................
शरीर में क्या काम: विटामिन B आठ तरह के होते हैंः B-1, B-2, B-3, B-5, B-6, B-7, B-9 और B-12

शरीर में क्या कामः B-1 मेटाबॉलिजम में मददगार है, B-2 फूड को एनर्जी में बदलता है और एंटी-ऑक्सिडेंट का काम करता है, B-3 डीएनए की देखभाल करता है, B-5 हॉर्मोन और कॉलेस्ट्रॉल बनाने में मददगार, B-6 रेड ब्लड सेल बनाता है, B-7 मेटाबॉलिजम में सपोर्ट, B-9 सेल ग्रोथ में मदद, B-12 न्यूरोलॉजिकल फंक्शन, डीएनए और रेड ब्लड सेल डिवेलपमेंट का काम

RDA: B-1 1.2 माइक्रोग्राम, B-2 1.3 माइक्रोग्राम, B-3 16 माइक्रोग्राम, B-5 5 माइक्रोग्राम, B-6 1.3 माइक्रोग्राम, B-7 30 माइक्रोग्राम, B-9 400 माइक्रोग्राम और B-12 2.5 माइक्रोग्राम जरूरी

कमी के लक्षण और बीमारियां: विटामिन B-1, B-2, B-3 की कमी से उलटी, चक्कर, पेट में दर्द, मुंह के कोने फटना आदि, B-6 की कमी से अनीमिया, स्किन रैशेज, उलटी, डिप्रेशन आदि, B-9 की कमी से डायरिया या अनीमिया, B-12 की कमी से याद्दाश्त में कमी, हाथ-पैरों में झनझनाहट, डिप्रेशन आदि समस्याएं हो सकती हैं

टेस्ट: आमतौर पर विटामिन B-12 का टेस्ट कराया जाता है, जो विटामिन B-12 नाम से ही होता है।

खाने के सोर्स: विटामिन B-1: सोयामिल्क, तरबूज, सूरजमुखी के बीज, पोर्क आदि, विटामिन B-2: ऑर्गन मीट, बीफ, मशरूम, लो-फैट मिल्क आदि, विटामिन B-3: मीट, अंडा, टूना और साल्मन फिश, मसूर की दाल, बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि B-5: लिवर, फिश, एवोकाडो, ब्रोकली, मूंगफली, मशरूम आदि, B-6: मीट, फिश, अंडा, टोफू, केला, आलू, सोया प्रोडक्ट्स आदि, B-7: अंडा, चीज़, सोयाबीन आदि, B-9: लिवर मीटर, ब्रोकली, संतरे का जूस, मूंगफली, सीड्स, पालक, शकरकंद आदि, विटामिन-B 12: मीट, अंडा, सी-फूड, साल्मन फिश, दूध और इससे बनी चीजें, सोया मिल्क आदि

ज्यादा सेवन के नुकसानः आमतौर पर विटामिन B की अधिकता नहीं होती। अगर बहुत ज्यादा सप्लिमेंट ले लेते हैं तो सिरदर्द, चक्कर, उलटी, डायरिया, सुन्नपन जैसी समस्याएं होती हैं।

विशेष: सभी विटामिन B खाने को एनर्जी में बदलने में मदद करते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा अहम विटामिन B-12 है, जोकि न्यूरो से लेकर इम्युनिटी तक से जुड़े कई काम करता है। वेजिटेरियन और वेगन लोगों में इसकी कमी खासतौर पर पाई जाती है और इनके लिए सप्लिमेंट लेना जरूरी हो जाता है।
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मिनरल्स

कैल्शियम................
शरीर में क्या काम: हड्डियों, दांतों और नाखूनों को मजबूत बनाना, न्यूरो सिस्टम को दुरुस्त रखना

RDA: 1000 mg यानी 1 ग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियां: हड्डियों में दर्द, बहुत ज्यादा थकान होना, बाल झड़ना, रिकेट्स आदि

टेस्ट: डेक्सास्कैन, इसे बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट भी कहते हैं। यह हड्डियों में मौजूद कैल्शियम के लेवल की जांच करता है

खाने के सोर्स: दूध और दूध से बनी चीजें, हरी पत्तेदार सब्जियां, साल्मन फिश, मशरूम, बीन्स, ब्रोकली, चुकंदर, कमल ककड़ी, केला, संतरा, शहतूत, सिंघाड़ा, ड्राई-फ्रूट्स, तिल, राजमा, मूंगफली आदि

ज्यादा सेवन से नुकसानः दिल और किडनी में कैल्शियम जमना, कब्ज, डायरिया, हड्डियों में दर्द आदि
विशेष: मिनरल्स में सबसे ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है हमारे शरीर को। इसकी नॉर्मल रेंज 8.8 से 10.6 मिलीग्राम/डेसीलीटर है। कैल्शियम का फायदा शरीर को मिले, इसके लिए जरूर है कि शरीर में विटामिन-D का लेवल सही हो।

आयरन................
शरीर में क्या कामः रेड ब्लड सेल बनाने और खून को हेल्दी रखने में मददगार

RDA: 8-18 मिलीग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियांः कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, बाल झड़ना, अनीमिया आदि

टेस्टः टोटल ब्लड काउंट
खाने के सोर्सः लिवर, बीफ, टर्की, अंडा, अनार, पालक, साबुत अनाज, मसूर दाल, बीन्स, चुकंदर आदि

मैग्नीशियम................
शरीर में क्या कामः मसल्स और नर्व्स के सही से काम करने और हड्डियों के लिए जरूरी

RDA: 310 से 400 मिलीग्राम

कमी के लक्षण और बीमारियांः शरीर में दर्द, ग्रोथ कम होना, अजीबोगरीब बर्ताव करना आदि

टेस्टः टोटल सीरम मैग्नीशियम टेस्ट
खाने के सोर्सः हरी पत्तेदार सब्जियां, ब्रोकली, सीड्स, होल वीट ब्रेड, सोयाबीन, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि

फॉस्फोरस................
शरीर में क्या कामः खाने को एनर्जी में बदलता है, सेल्स के काम करने और शरीर की ग्रोथ में मदद

RDA: 700 मिलीग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियांः कमजोरी, हड्डियों में दर्द और कमजोरी, कैल्शियम की कमी

टेस्टः फॉस्फोरस टेस्ट
खाने के सोर्सः दूध और दूध से बनी चीजें, मटर, अनाज, अंडे, नट्स आदि

पोटैशियम................
शरीर में क्या कामः नर्व्स के कामकाज और पानी का संतुलन बनाने में भूमिका, ब्लड प्रेशर कंट्रोल और पथरी की आशंका कम करना

RDA: 4700 मिलीग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियांः कमजोरी, पैरालेसिस

टेस्टः पोटैशियम टेस्ट
खाने के सोर्सः दही, दूध, टूना मछली, सोयाबीन, पीले फल और सब्जियां जैसे कि आलू, केला आदि

सोडियम................
शरीर में क्या कामः यह ब्लड प्रेशर ठीक रखता है और मांसपेशियों के साथ-साथ दिमागी संतुलन भी सही बनाए रखता है

RDA: 1500 मिलीग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियांः भूख कम लगना, मसल्स में जकड़न (क्रैम्प), दौरे पड़ना

टेस्टः सोडियम ब्लड टेस्ट
खाने के सोर्सः नमक, सोया सॉस, प्रोसेस्ड फूड, सब्जियां आदि

आयोडीन................
शरीर में क्या कामः थायरॉयड हॉर्मोन बनाता है जोकि दिमाग और हड्डियों के विकास के लिए जरूरी है। मेटाबॉलिज़म भी कंट्रोल करता है

RDA: 150 माइक्रोग्राम रोजाना

कमी के लक्षण और बीमारियांः मेटाबॉलिक रेट कम होना, गॉयटर बीमारी होना, जिसमें गला फूल जाता है और बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास नहीं होता

टेस्टः ब्लड टेस्ट, यूरीन टेस्ट और आयोडीन पैच टेस्ट
खाने के सोर्सः सी-फूड, डेयरी प्रोडक्ट्स, आयोडाइज्ड नमक आदि
नोटः इनके अलावा भी कॉपर, क्रोमियम, जिंक, क्लोराइड, सल्फर, फ्लोराइड जैसे कई और मिनरल्स भी शरीर के लिए जरूरी हैं।
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क्या है बैलेंस्ड डायट
बैलेंस्ड डायट वह है जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट, फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और पानी का सही संतुलन हो। हमारे शरीर को रोजाना 50-55 फीसदी कार्ब (रोटी, चावल, ओट्स, नूडल्स, आलू, मीठे फल, कॉर्न आदि), 25-30 फीसदी प्रोटीन (मीट, फिश, अंडा, सोयाबीन, दाल, दूध और दूध से बनी चीजें आदि) और 15-20 फीसदी फैट्स (घी, तेल, नट्स, चीज़ आदि) की जरूरत होती है। साथ ही, मिनरल्स और विटामिन्स की भी जरूरत होती है, जोकि सब्जी, फल, बीज, नट्स, आदि से मिलते हैं।
खाना पकाने और खाने का सही तरीका
सब्जियों को न ज्यादा पकाएं और न ही ज्यादा मसालेदार बनाएं। वरना उनमें मौजूद तमाम विटामिन्स और मिनरल्स लगभग खत्म हो जाते हैं। अगर दाल रात में भिगों दें और सुबह उसे बस थोड़ा उबाल लें तो बहुत जल्दी गल जाएगी और इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व भी नष्ट नहीं होंगे। कच्ची सब्जियों जैसे खीरा, ककड़ी, प्याज, टमामट, पत्तागोभी आदि को बहुत अच्छी तरह धोकर सलाद के रूप में खाएं। शरीर को पानी, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स भरपूर मिलेंगे। खाने खासकर अनाज से बनी चीजों को चबा-चबा कर खाएं। अगर आप रोटी, चावल या कोई और अनाज खाते हैं तो तब तक चबाएं जब तक कि उसका स्वाद जीभ पर ना आ जाए। जैसे ज्यादा चबाने पर रोटी का मीठापन महसूस करेंगे।
फलों को खाली पेट खाना बेहतर है। सुबह नाश्ते में ले सकते हैं या शाम को खाली पेट। खाने के बाद लेना है तो लगभग दो घंटे बाद फल खाएं। खाने के साथ या फौरन बाद खाने से ये ठीक से पच नहीं पाते और इनका फायदा नहीं मिल पाता। जूस के बजाय फलों का सेवन बेहतर है क्योंकि फलों से फाइबर भी मिलता है। उठते ही खाली पेट पानी पिएं। खाने के साथ पानी न पिएं। इससे खाने को पचाने के लिए शरीर में बनने वाले जूस पानी के साथ निकल जाते हैं। हमेशा खाने के आधा या एक घंटे बाद पानी पिएं।
एक्सपर्ट पैनल
डॉ. के. के. अग्रवाल, इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट
डॉ. आर. हेमलता, डायरेक्टर, नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन
डॉ. महिपाल सचदेव, डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइट
डॉ. के. के. मिश्रा, सीनियर ऑर्थोपीडिक सर्जन, प्राइमस हॉस्पिटल
डॉ. प्रियंका रोहतगी, सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल
सोनिया नारंग, डायट एक्सपर्ट

संडे नवभारत टाइम्स