Thursday, April 19, 2012

बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है ऊर्जा संरक्षण

हिन्दुस्तान लेख 
बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है ऊर्जा संरक्षण
शशांक द्विवेदी, असिस्टेंट प्रोफेसर, सेंट मार्गरेट इंजीनियरिंग कॉलेज
ऊर्जा किसी राष्ट्र की प्रगति, विकास व खुशहाली का प्रतीक होती है और खुशहाली की यह राह ही ऊर्जा संकट तक भी जाती है। आज ऊर्जा के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग के कारण जहां एक ओर ऊर्जा खत्म होने  की आशंका प्रकट हो गई है, वहीं दूसरी ओर मानव जीवन, पर्यावरण, भूमिगत जल, हवा, पानी, वन, वर्षा सभी के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता बाल्टर कान का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले तेल और प्राकृतिक गैस का कुल उत्पादन 10 से 30 साल बाद चरम पर होगा, उसके बाद उनमें तीव्र गिरावट आएगी। यानी इनके विकल्प तलाशने का समय आ गया है।
भारत की दिक्कत यह है कि वह जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल, डीजल, गैस, कोयले आदि में आत्मनिर्भर नहीं है। बाकी दुनिया में भी यह ईंधन काफी तेजी से कम होता जा रहा है। वह भी उस दौर में, जब ऊर्जा की हमारी जरूरतें बहुत तेजी से बढ रही हैं। दूसरी तरफ, 10वीं पंचवर्षीय योजना में 41,000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उत्पादन के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 21,200 मेगावाट उत्पादन ही हो पाया। 11वीं योजना में 78,577 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जिसे संशोधित कर 62,375 मेगावाट कर दिया गया। हर अगली पंचवर्षीय योजना में हमें ऊर्जा उत्पादन को लगभग दोगुना करते जाना होगा। मांग और आपूर्ति में जो अतंर है, वह कभी घटेगा, ऐसा संभव नहीं लगता।
ऐसे में, ऊर्जा उत्पादन, उपलब्ध ऊर्जा का संरक्षण और ऊर्जा को सही दिशा देना जरूरी है। ऊर्जा को बचाने के लिए हमेशा छोटे कदमों की जरूरत होती है, जिनके असर बड़े होते हैं। मसलन, पूरे प्रदेश में बिजली की बचत वाले सीएफएल बल्ब लगाने के केरल सरकार के अभियान से ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल होने का अनुमान है। इसके तहत पूरे प्रदेश में सीएफएल बल्ब वितरित किए गए हैं। 95 करोड़ रुपये की इस प्रदेशव्यापी योजना से 520 मेगावाट बिजली की बचत की उम्मीद है। योजना पर अमल से केरल में इस बार बिजली की अधिकतम मांग वाले समय में भी कोई लोड शेडिंग नहीं हुई। कुछ ऐसा ही प्रयोग हिमाचल प्रदेश में भी हुआ है। वहां परंपरागत बल्ब के बदले सीएफएल वितरित करने की योजना बनी और आप को दूर-दराज के गांवों में भी सीएफएल जलते दिख जाएंगे। हिमाचल एक पावर सरप्लस राज्य है। यानी ऐसा राज्य, जो अपनी जरूरतों से ज्यादा बिजली पैदा करता है और उस बिजली को वह दूसरे प्रदेशों को बेचता है। इसीलिए सीएफएल योजना से प्रदेश को दोहरा लाभ हुआ है। केरल और हिमाचल की इन कोशिशों से बाकी राज्य भी सबक ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा संरक्षण उपायों से देश भर में 25,000 मेगावाट बिजली की बचत की जा सकती है। हिन्दुस्तान में 14/12/11 को प्रकाशित 

कालेधन पर

नई दुनिया लेख -शशांक द्विवेदी 
कालेधन पर क्यों चुप है सरकार
पिछले दिनों राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने संसंद में बजट सत्र पर  अपने अभिभाषण में काला धन पर केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार ने काले धन की समस्या से प्रभावी ढंग से निबटने के लिये कुछ कानून बनाए हैं। विदेशों में जमा काले धन के बारे सूचनायें एकत्र करने के लिए सरकार चौनल भी स्थापित कर रही है जिसके तहत विदेशों में नई आयकर यूनिटें शुरू करना और नए दोहरे कराधान निवारण करार करना शामिल है।
अब यहाँ पर सवाल उठता है कि पिछले 3 सालों में सरकार ने कालेधन को देश में लाने के लिए क्या प्रभावी प्रयास किये जबकि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 30 जुलाई 2009 को राज्यसभा में बताया था कि विदेशी बैंकों से काले धन को वापस देश में लाने के लिए सरकार कदम उठा चुकी है। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी सदन में वित्त विधेयक पर वित्त मंत्री के बयान पर खुद दी गई थी। प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त किया था कि स्विस बैंकों में जमा एक लाख करोड़ रुपये के भारतीय काले धन को सत्ता संभालने के 100 दिन में वापस देश में ले आएंगे। लेकिन ये धन आज तक नही आया ।
कालाधन का मुद्दा देश में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है पिछले दिनों  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने चेतावनी दी है कि भारत को मनी लॉन्डरिंग यानी काले धन को वैध बनाने और चरमपंथियों को आर्थिक सहायता का ख़तरा सबसे बड़ी चुनौती है ।
काले धन के मुद्दे पर ध्यान दे तो पता चलता है अभी तक इस विषय में सरकार द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया । संसद के शीतकालीन सत्र में भी इस विषय पर संसद में चर्चा हुई लेकिन इसका कोई भी सार्थक नतीजा नहीं निकला जबकि यह देश के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा है ।  
पिछले दिनों दिल्ली में इस मुद्दे पर इंटरपोल के प्रथम भ्रष्टाचार विरोधी वैश्विक कार्यक्रम का आयोजन हुआए जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार से होने वाली कमाई की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय और सीमापार जांच में कानूनी मदद के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों में जांचकर्ताओं और अभियोजकों का ज्ञान तथा कौशल बढ़ाना था । अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे पर कितना संजीदा है और कालेधन को लाने में क्या प्रभावी कदम उठाती है ।
आईएमएफ़ द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है, एशिया की उभरती आर्थिक ताकत के रूप में भारत अहम है लेकिन उसे मनी लॉन्डरिंग और चरमपंथियों तक आर्थिक सहायता पहुँचने का ख़तरा एक बड़ी चुनौती है। इसमें कहा गया है कि भारत में मनी लॉन्डरिंग देश और देश के बाहर की ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों का नतीजा हैं। आईएमएफ़ का मानना है कि भारत चरमपंथियों का निशाना पहले भी बना है और आगे भी उनके निशाने पर रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार चरमपंथियों को विभिन्न स्रोतों से धन पहुँचने का ख़तरा है। इसमें भारत के अंदर और बाहर ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ, मादक पदार्थों का कारोबार, धोखाधड़ी, संगठित अपराध, मानव तस्करी, भ्रष्टाचार, नकली धन और अवैध धन वसूली जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं।
भ्रष्टाचार देश की जड़ों को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के अनेक रूप हैं लेकिन काला धन इसका सबसे भयावह चेहरा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी के अनुसार भारत के लोगों का लगभग 20 लाख 85 हजार करोड़ रूपए विदेशी बैंकों में जमा है। देश में काले धन की समानांतर व्यवस्था चल रही है। चूंकि इस धन पर टैक्स प्राप्त नहीं होता है इसलिए सरकार अप्रत्यक्ष कर में बढ़ोतरी करती है, जिसके चलते नागरिकों पर महंगाई समेत तमाम तरह के बोझ पड़ते हैं।
अपनी कमाई के बारे में वास्तविक विवरण न देकर तथा कर की चोरी कर जो धन अर्जित किया जाता है, वह काला धन कहा जाता है। विदेशी बैंकों में यह धन जमा करने वाले लोगों में देश के बड़े-बड़े नेता, प्रशासनिक अधिकारी और उद्योगपति शामिल हैं। विदेशी बैंकों में भारत का कितना काला धन जमा है, इस बात के अभी तक कोई अधिकारिक आंकड़े सरकार के पास मौजूद नहीं हैं लेकिन स्विटजरलैंड के स्विस बैंक में खाता खोलने के लिए न्यूनतम जमा राशि 50 करोड़ रुपये बताई जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जमाधन की राशि कितनी विशाल होगी। स्विस राजदूत ने माना है कि भारत से काफी पैसा स्विस बैंकों में आ रहा है। कुछ महीनों पहले स्विस बैंक एसोसिएशन ने भी यह कहा था कि गोपनीय खातों में भारत के लोगों की 1456 अरब डॉलर की राशि जमा है।
पिछले दिनों विदेशों में जमा काले धन का मुद्दा और गर्मा गया जब स्विस बैंकर और ह्निसल्ब्लोअर रुडोल्फ एल्मर ने स्विस कानूनों को तोड़ते हुए स्विटजरलैंड की बैंकों में खुले 2000 खातों ें की जानकारी की सीडी विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे को दे दी। इस सीडी में स्विटजरलैंड की बैंकों में खाता रखने वाले अमेरिकाए ब्रिटेन और एशिया के नेताओं और उद्योगपतियों के नाम हैं।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने विदेशों में जमा काले धन के मामले को जोर शोर से उठाया था और इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। उस दौरान प्रधानमंत्री ने भी इसका समर्थन करते हुए प्रचार अभियान में वादा किया था कि सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर वे इस दिशा में ठोस कार्रवाई करेंगे लेकिन वह अपने वायदों से दूर भाग रहे हैं।
वास्तव में सरकार भ्रष्टाचार से निपटने और विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने में ने जिस जिस प्रकार से निष्क्रियता दिखा रही है उससे देश के लोगों का विश्वास कम हो रहा है ,लोगों को  यह महसूस होता है कि काले धन का मुद्दा कभी सुलझ नहीं सकता क्योंकि आधे से ज्यादा पैसा तो भ्रष्ट राजनेताओ का है । इसी वजह से इस मुद्दे पर कोई ठोस कानून नहीं बन पा रहा है न ही गंभीरता के साथ इस पर कार्यवाही हो रही है . जबकि कई बार और कई स्रोतों से यह पाता चल चुका है कि विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले सबसे अधिक संख्या में भारतीय हैं और किस प्रकार यह पैसा ब्रिटिश विर्जिन द्वीप समूह, केमैन द्वीप समूह आदि जैसे विभिन्न टैक्स हैवंस में दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस के रास्ते पहुंचता है। पिछले दिनों जेनेवा में एचएसबीसी में जमा इस प्रकार के कालेधन के 1200 खातों के खुलासे से देश को भारी मात्रा में कालेधन के होने का पता चला है, दुर्भाग्यवश, सरकार इन खातों को क्राइम मनी न मानकर केवल कर बचाने का मामला मान रही है। यह चोरी की संपत्ति मानी जानी चाहिए क्योंकि इस प्रकार से जमा पैसा अन-अकाउंटिड लाभ में परिवर्तित किया जा रहा है, इससे भी खराब बात यह है कि लिच्टेंस्टीन बैंक खातों के बारे में जानकारी पर अपेक्षित गंभीरता से कार्यवाही नहीं की गई है,
जबकि सरकार को देश के चुराये गये इस धन का पता लगाने और आपराधिक कार्रवाई करके दोषियों को दंडित करने के लिए अपेक्षित गति से और कड़ाई से कार्रवाई करनी चाहिए और कि एचएसबीसी बैंक के 1200 खाताधारियों के नामों को तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए .
पिछले दिनों सर्वाेच्च न्यायालय ने विदेशी बैंकों में जमा काले धन पर चिंता जताई। प्रख्यात वकील श्री राम जेठमालानी द्वारा दायर एक याचिका पर सर्वाेच्च न्यायालय ने कहा कि विदेशों में जमा काला धन केवल टैक्स की चोरी मात्र नही है, यह गंभीर अपराध, चोरी और देश की लूट का मामला है। न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति एसएस निज्जर वाली पीठ ने यह कड़ी टिप्पणी की। काले धन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भी इस ओर इशारा किया है कि विदेशों में जमा काला धन ही आतंकियों को वित्तीय मदद के रूप में भारत में आता है
काले धन पर यूपीए सरकार के ढुलमुल रवैये से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार भ्रष्टाचारियों के साथ है। विदेशी बैंकों में जमा काले धन के बारे में सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि काले धन को तुरंत वापस लाना आसान नहीं है और इस संबंध में मिली जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। जहां प्रधानमंत्री विदेशी बैंकों में भारतीय खाताधारकों के नाम बताने से इनकार कर रहे हैं वहीं कांग्रेस महासचिव श्री राहुल गांधी कह रहे हैं कि काला धन रखने वालों पर मामला दर्ज होना चाहिए। यह बयान केवल एक मजाक है। क्योंकि उन्हें बयान जारी करने की बजाए ठोस पहल प्रारंभ करनी चाहिए।
अभी तक विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत वापस लाने के लिए हमारे पास ठोस कानून नहीं है। इसलिए इस दिशा में ठोस कानून बनाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही काले धन के मुद्दे पर राष्ट्रीय आम सहमति बनाने का प्रयास हो तथा विदेशों में भारतीय नागरिकों द्वारा जमा किए गए काले धन को वापस लाने के लिए सरकार प्रबल इच्छाशक्ति का परिचय दे। काले धन की वापसी से भारत की अर्थव्यवस्था का कायापलट हो सकता है। अगर ये काला धन देश की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ दिया जाए तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, बिजली आदि बुनियादी आवश्यकताओं को सहज ही पूरा किया जा सकता है।
लेखक शशांक द्विवेदी ,नई दुनिया में 19/04/12 को प्रकाशित 
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Tuesday, April 17, 2012

जल संकट -संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट

प्रभात खबर लेख 
जल संकट की बड़ी आहट

।। शशांक द्विवेदी ।।
(
एसएमइ कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर)
पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र ने विश्व के सभी देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पानी की बर्बादी को जल्द नहीं रोका गया तो जल्दी ही विश्व गंभीर जलसंकट से गुजरेगा. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में अनेक बड़ी चुनौतियां, मसलन गरीब तबके को स्वच्छ जल और साफ-सफाई की सुविधा मुहैया कराना, विश्व आबादी को खाद्यान्न उपलब्ध कराना, भूमंडलीय तापमान में वृद्धि के दुष्प्रभाव आदि पूरे विश्व के सामने खड़ी हैं.
इन समस्याओं और चुनौतियों से निपटना हर देश की प्राथमिकता में सबसे ऊपर होना चाहिए, क्योंकि वर्ष 2050 तक विश्व की आबादी मौजूदा सात अरब से बढ़कर नौ अरब हो जाने की उम्मीद है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस रिपोर्ट में कहा है, कृषि की बढ़ती जरूरतों, खाद्यान उत्पादन, उर्जा उपभोग, प्रदूषण और जल प्रबंधन की कमजोरियों की वजह से स्वच्छ जल पर दबाव बढ़ रहा है.पर्यावरणीय प्रदूषण आज विश्वव्यापी समस्या बन चुका है और भारत भी उससे अछूता नहीं है. इस क्रम में जल प्रदूषण को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जतायी जा रही है. आने वाले समय में जहां स्वच्छ पेय जल की कमी को लेकर विश्वयुद्ध की संभावना जतायी जा रही है, तो दूसरी ओर जो जल हमारे पास उपलब्ध है, उसे प्रदूषित किया जा रहा है.
दुनिया में तकरीबन 20 फीसदी लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है और 40 फीसदी लोग सफाई की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. इन वंचितों में से आधे से ज्यादा लोग चीन या भारत में हैं. दुनिया में एक अरब 10 करोड़ लोग पीने के साफ पानी से अब भी वंचित हैं.इसके अलावा दो अरब 60 करोड़ लोगों को साफ-सफाई की मूलभूत सुविधाएं हासिल नहीं हैं. भारत में विश्व की लगभग 16 प्रतिशत आबादी निवास करती है. लेकिन, उसके लिए 4 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है. जल संकट आज देश के कई हिस्सों में विकराल रूप धारण कर चुका है. जल संरक्षण से हम इस समस्या से काफी हद तक निजात पा सकते है. कहावत है बूंद-बूंद से सागर भरता है, यदि इस कहावत को अक्षरश: सत्य माना जाए तो छोटे-छोटे प्रयास एक दिन काफी बड़े समाधान में परिवर्तित हो सकते हैं. वर्षा जल संग्रहण इस दृष्टि से पानी संरक्षण का सबसे नायाब और असरदार तरीका है. यदि पानी का संरक्षण एक दिन शहरी नागरिकों के लिए अहम मुद्दा बनता है, तो निश्चित ही इसमें तमिलनाडु का नाम सबसे आगे होगा. लंबे समय से तमिलनाडु में नए मकानों की छतों पर वर्षा जल के संरक्षण के लिए इंतजाम करना आवश्यक है, पर पिछले कुछ सालों से गंभीर सूखे से जूझने के बाद अब तीन महीनों के अंदर सारे शहरी मकानों और भवनों की छतों पर वर्षा जल संरक्षण संयंत्रों (वजस) को लगाना अनिवार्य कर दिया गया है.
नौकरशाहों को वर्षा जल संरक्षण संयंत्रो को प्राथमिकता बनाने के लिए कहा गया. कई ऐसे उदाहरण है जिनसे आम आदमी को थोड़ा पैसा और थोड़ा प्रयास लगा कर इस काम को करने की प्रेरणा मिलती है. इन कामों के लिए किसी भी सहायता या निगरानी की जरूरत नहीं है और न ही नदियों को जोड़ने जैसी बृहद परियोजनाओं की.
इन बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने में समय लगता है, पैसा लगता है और साथ में भारी पर्यावरणीय, राजनीतिक और तकनीकी क्षतियां हो सकती हैं. इन सब कामों में ठेकेदारों के मिले होने की वजह से भ्रष्टाचार फैलता है. नयी पीढ़ी को ये अहसास नहीं कि पानी हमारे लिए प्रकृति की एक अमूल्य भेंट है.
सरकारों की यह जिम्मेदारी है कि वे हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराए, लेकिन वे इसके लिए सजग नहीं. भारत में पेयजल संकट बढ़ती आबादी और कृषि की जरूरतों के कारण भी गंभीर होता जा रहा है. करीब 65-70 प्रतिशत जल कृषि कार्यो में खप जाता है.
इसके अतिरिक्त उद्योगों के संचालन में भी जल का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. विडंबना यह है कि न तो उद्योग एवं कृषि क्षेत्र को अपनी आवश्यकता भर पानी उपलब्ध हो पा रहा है और न ही आम आदमी को.
आज जब जल संकट का विकट दौर चल रहा है, तो हमें यह समझना होगा कि जल का कोई विकल्प नहीं है, मानव का अस्तित्व जल पर ही निर्भर है, जल सृष्टि का मूल आधार है, जल है तो खाद्यान्न है, जल है तो वनस्पतियां हैं, जल का कोई विकल्प नहीं है, जल संरक्षण से ही पर्यावरण संरक्षण है, जल का पुर्भरण करना ही जल का उत्पादन करना है . इसलिए हमें जल संकट ही इस आहट को पहचानना होगा और इसके लिए सतत प्रयास करने होंगे.
प्रभातखबर में 14/04/12 को प्रकाशित 
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Monday, April 16, 2012

हिंदुस्तान कॉलेज में सम्मान


पिछले दिनों 19 फरवरी 2012 को शारदा ग्रुप आफ इंस्टिट्यूसन द्वारा हिंदुस्तान कॉलेज आँफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित अलुम्नी मीट में मुझे सम्मानित किया गया .ये अवार्ड मुझे देश के प्रमुख समाचार पत्र पत्रिकाओ में कॉलम लिखने के लिए "एक्सीलेंस इन अदर वाक आफ लाइफ "कटेगरी में दिया गया .ये सम्मान मेरे लिए बहुत खास है क्योंकिइसी दिन मेरी शादी की सालगिरह भी है . मैंने इसी कॉलेज से पढाई की ,यही से मुझे जीवन में सब कुछ मिला .ये सम्मान  मुझे उस डॉ एस .एन लाल सर के हाँथों से मिला जिनका मै सबसे ज्यादा सम्मान करता हूँ ,जब वो कालेजे के प्रिन्सीपल थे तब उन्होंने मुझे लेखन के लिए बहुत ज्यादा प्रोत्साहित किया .इस मौके पर प्रियंका सहित पूरा परिवार मौजूद था जिसने मेरी खुशी दुगनी कर दी .सोचा मंजिल पाने के लिए अभी तो ये एक पड़ाव है ,अभी तो बहुत आगे जाना है ,बहुत काम करने है जिंदगी में . 

स्पीच देते हुए मेरा अंदाज 

विज्ञान प्रसार द्वारा सम्मान



विज्ञान प्रसार और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ,भारत सरकार द्वारा सम्मान 
28-28 फरवरी २०१२ को नेशनल साइंस सेंटर ,नई दिल्ली  में विज्ञान प्रसार ,विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ,भारत सरकार द्वारा सयुक्त रूप से  राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित हुए .इस अवसर पर लेखन के लिए मुझे भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया .यह मेरे लिए बहुत सम्मान और खुशी की बात थी .यहाँ काफी अच्छे कार्यक्रम हुए ,यहाँ आकार काफी अच्छा लगा और आत्मविश्वास भी बढ़ा .पहली बार लगा कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जोश और जूनून हो तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं है .यहाँ आकार लगा कि सपने जरूर देखने चाहिए ,वो जरूर पूरे होते है .
vigyan prasar award link 
http://www.vigyanprasar.gov.in/nsd2012_photographs.htm


दैनिक भास्कर ,अलवर संस्करण में इससे सम्बंधित खबर 

लेखन के लिए शशांक का सम्मान 
अलवरत्न नीमराना स्थित सेंट मार्गेट इंजीनियरिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर शशांक द्विवेदी का विज्ञान प्रसार और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की ओर से विज्ञान एवं तकनीकी लेखन के लिए सम्मान किया गया। शशांक विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में देश के प्रमुख अखबारों के लिए नियमित रूप से स्वतंत्र लेखन के कार्य से भी जुड़े हुए हैं। पिछले 10 वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे शशांक आम आदमी तक विज्ञान की उपलब्धियों को सरल भाषा में पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इनके लेख कई राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।



लिंक 
http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-1939218-3051888.html?HT1=